प्राचीन भारतीय नगरों के बनने, मिटने और खोजने की गाथा ‘भारत के विस्मृत नगर’ की पहली कड़ी ऐरण अर्थात ऐरिकिण पर आधारित है. ‘ऐरण’ मध्य प्रदेश के सागर से लगभग ९० किलोमीटर दूरी पर है. यह भारत के प्राचीनतम और समृद्ध नगरों में से एक था जिसकी खोज़ ब्रिटिश काल में कनिंघम ने की थी.
कथाकार-लेखक तरुण भटनागर ने इस इतिहासपरक आख्यान में बड़े ही रोचक ढंग से इस नगर का वृत्त लिखा है, तथ्य निपुणता से कथा की शैली में बुन दिए गये हैं. जो इतिहास से छूट जाता है उसे साहित्य देख लेता है.
इस स्मृतिहीन समय में यह श्रृंखला अतीत को देखते हुए खुली दृष्टि भी विकसित करती है, और अपने प्राचीनतम धरोहरों के रखरखाव और उसके प्रति लगाव की जरूरत को भी रेखांकित करती है.
प्रस्तुत है.
ऐरण उर्फ़ ऐरिकिण
विस्मृत अवशेषों का देश काल
तरुण भटनागर
अपनेनामकरणकेतमाम तथ्योंकेबीच, हमारी दुनिया मेंयहअनसुनासानामही रहा है- ऐरण. यूँयह तमामजगहोंपरलिखाहुआमिलता हैप्राचीनहिन्दूऔरबौद्धग्रंथोंमें, पुरातनसिक्कोंऔरअभिलेखोंमें और इस तरह सेकईजगह, सैकड़ों, हज़ारोंबार उल्लिखित है. विद्वानकनिंघमनेइसशहरकेतीनअलग-अलगनामोंकाहवालादियाथा. होसकताहैऔरभीऐसेहवालेहों, कहींकिसीप्राचीनकिताबमेंयाअबतकनढूंढेजासकेकिसीशिलालेखयापुरातनसिक्केमें. भलेआजवक्तकेसाथयहजगहअपरिचितसीहोगयीहो, पर इससे क्या होता है,इसकेहवालेमिलतेहैं, खूबमिलतेहैं. यह बात कि लोगअगरप्राचीनशहरोंकोभूलजाएँ, तबभीउसकेवेहवालेयथावतरहतेहीहैं कुछ इस तरह कि इन हवालों से गुजरो तो ऐरण का एक किस्सा ही बन जाता है.
एकहवालाहैऐरकैणयाइरिकिणनामसेऔरजैसाकिकनिंघमनेअपनीएकरिपोर्टमेंदर्जकियाहैकिऐरणकेवराहअभिलेखमेंइसशहरकायहीनामउसनेपढ़ाथा. इसतरहएकशख़्सजिसकीमातृ भाषाअंग्रेजीहै, पत्थरपरसंस्कृतमेंउकेरेगएनामकोगौरसेपढ़ताहै, हर्फ़दरहर्फ़औरलिखताहै- यहीपढ़ाथा, यही, एकदमयही. दूसरानाम वहबताताहैजो यहाँसेउसे मिला,जो कईकिस्मकेसिक्कोंपरउल्लिखितहै- ऐराकणययाएरकणय. यहनामकईसिक्कोंपरउकेराहुआहै.कहतेहैंइसप्राचीनशहरमेंएकटकसालथीजिसनेभारतमेंसिक्कोंकोढालनेकेतरीकोंमेंनयेपरिवर्तनकियेथे. जोसिक्केढालेजातेउनमेंइसशहरकानामलिखाहोता-ऐराकणययाएरकणय.
तीसराजोनामप्रचलितहै, आजभीऔरजबआपइसजगहजातेहैंतोइसीनामकोपूछतेहुएयहाँतकपहुँचसकतेहैं यानीऐरण. ऐरणकाअर्थजैसाकिकनिंघमलिखतेहैं, नर्मऔरनाज़ुककिस्मकीघासहैजोइसइलाकेमेंबहुतायतमेंरहीहोगी.जिससेइसेइसकानाममिला.एरकायाइरकानामकीमुलायमऔरनर्मघासकेइलाकेमेंफैलाएकशहरयानीऐरण. इसतरह किसीघासकेनामपरएकशहरकानामहोताहैऔरफिलहालऐसाकोईशहरयादनहींआताकिउसकानामघासकेकिसीप्रकारपररखागयाहो. यहनामहज़ारोंसालतकचलतारहा. होसकताहैउनप्राचीनदिनोंमें कोईश्रेष्ठी, कोईकृषक, कोईकर्मकार, कोईपुक्कस,कोईसार्थवाह, कोईनर्तक, कोईस्नातक, कोईसारथीयाकोईभीरोजमर्राकाकामकाजीइसशहरसेजाताहोकाशी, कौशाम्बी, त्रिपुरीयापाटलिपुत्रहीऔरकिसीकेपूछनेपरकिकहाँसेआयेहो,गर्वसेबताताहो- ऐरण.
एकखूबसूरतबातयहभीहैकिदोजगहइसकेदोनामलिखेहैं. येनामएककेबादएककईसालोंकेबादलिखेगएऔरजोरोचकरूपसेएकजैसेहैं. गुप्तशासकसमुद्रगुप्तकेएकअभिलेखमेंऐरिकिणऔरऐसाहीएकनामइरिकिणजोहूणराजातोरमाणके 510 AD केअभिलेखमेंदर्ज़है. बदलते नामों की तमाम पहचानों के बीच भी एक सी ध्वनि सुनाई देती है जो इस शहर के नामकरण का आधार रही होगी और आज जो एक गाँव है इस बात पर अचरज का बायस है कि यह एक ऐसा विशाल और महत्वपूर्ण शहर रहा होगा कभी खासकर दूसरी सदी ईसा पूर्व से लेकर पाँचवीं सदी तक.
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अठारहवींसदीकेअंतमेंकिसीसमययहाँसेमिलेसिक्कोंमेंसेएकसिक्केपरकनिंघमकेसाथकेलोगोंकोएकनदीकिआकृतिदिखीथी. आजसेडेढ़हज़ारसालसेभीपहलेकेइससिक्केपरउकेरीगयीयहनदीबीनानदीहैजोआजभीइसइलाकेमेंबहतीहै. ऐरणकेभग्नावशेषइसीनदीसेथोड़ी दूरबिखरेपड़ेहैं. यहाँकेटकसालकेकारीगरोंनेइन सिक्कोंकोढालतेवक्तइसपरइसनदीकोउकेराथा. पतानहींक्याथाकिइससिक्केपरराजाकेचित्र, कीजगहबीनानदीकाचित्रबना, किसीराजकीयप्रतीककीजगहबहतीनदीकीलकीरेंउकेरीगयींऔरकिसीवैभवशालीनामयाप्रशस्तिकीजगहनदीकीलहरोंकोबनादियागया.
ऐरणकानामइतिहासकीपरीक्षाओंऔरखासकरनौकरीकेलिएदीजानेवालीप्रतियोगितापरीक्षाओंकेवक्तसे इसतरहसेयादरहाकिएकदोस्तअक्सरपूछताथाकिवहकौनसीजगहहैजहाँसेकिसीकेस्त्रीकेसतीहोनेकासबसेपुरानासाक्ष्यमिलताहै.हूणराजातोरमाणका ऐरणसेमिलावहीअभिलेखजो 510 AD काहैसतीप्रथाकासबसेपुरानासाक्ष्यमानाजाताहै. उसकेइसप्रश्नपरजोवहदोस्तअक्सरपूछताथा, यहभीलगताहीथा, किकोईजगहइतिहासकीपढ़ाईमेंइसवजहसेजानीजातीहैकिवहाँसेसतीकापहलासाक्ष्यमिलताहै. परयहज्यादतीभीहै, इतिहासकेअध्ययनमेंप्रचलिततथ्योंकीज़्यादती. यद्यपियहसाक्ष्यइसबातकोस्थापितकरतारहाहैकिसतीकीकुप्रथाहमारेयहाँराजपूतोंकेकालसेभीपहलेसेथीऔरइसलिहाज़सेसतीकायहसाक्ष्यमहत्वपूर्णमानाजाताहै.परवेतथ्यजोऐतिहासिकसचहोतेहैं, उनतथ्योंकीभीज्यादतीहोतीहीहै, किएकशहरजोकभीसपनोंकाशहरभीरहाहोगा, होगाहीक्योंकिआमआदमीकेसपनेहीकिसीशहरकोशहरबनातेहैं, अपनीएकबेहदछोटीयाअपमानजनकपहचानमेंसिमटजाताहैऔरउसपरतुर्रायहकिइतिहासबदनामकरनेयाग्लोरिफ़ाईकरनेकेलिएतोनहींहैन.
यहकहनेमेंसंकोचनहींकिउसपुरानेदोस्तकेबादएकऔरदोस्तमिलाथापूरेपच्चीससालबादऔरइसतरहऐरणक्याहैमैंजानपायाथा. वहऐरणजोसतीकेसबसेपुरानेसाक्ष्यवालाशहरहोतेहुएभी, किसीदौरकेसपनोंकाशहरथा हीजहाँकेबारेमेंइसीदोस्तसेपच्चीससालबादजानाकिजबपहलीबारइसशहरकाउत्खननहुआथातबइसकेभग्नावशेषोंकेआसपाससे 3000 सेज्यादाप्राचीनसिक्केमिलेथे, सैकड़ोंसालपुरानेसिक्केखासकर 300 BC सेलेकर 500 AD तककेजो इस तरह एक ही जगह से मिले सिक्कों के सबसे बड़े जखीरे में से एक है औरयहभीकि बादमेंकनिंघमकीरिपोर्ट‘ऑनटूर्सइनबुंदेलखंडएंडमालवा’मेंलिखेएकचैप्टरमेंइसकाविस्तृत अध्ययनअचरजसेभरदेनेवालालगताहै. फ्लीटकेन्यूमैसमैटिक्सकेअध्ययनमेंखासकर 300 BC से 100 AD तककेइनसिक्कोंकाविश्लेषणहैजोइसशहरका, इससतीवालेप्रचलितइकहरेतथ्यसेकहीं ज्यादा विस्तृतएकमुख्तलिफकिस्साबताताहै.
यहसबउससमयकीबातहैजबहूणोंकेहमलेशुरूहुएथे. ऐरणउसवक्तएकबड़ा शहरथा. पर्याप्तसाक्ष्यहैंकियहएकसमृद्धशहररहाहोगा. 18 वींसदीमेंजबकनिंघमऔरउसकेलोगोंनेयहाँकामकियाथाउसवक्तकैमरेनहींहोतेथे. इसतरहइसजगहकेस्कैचतैयारकियेगएथे. उसदोस्तनेमुझेयेसबदिखायाथा. वहकनिंघमकीकिताबऔरउनस्कैचेकेचित्रों को लेकरआयाथा. मैंउसकेतरतीबसेकढ़ेबालोंऔरसुनहरेनाज़ुकफ्रेमकेचश्मेकोदेखतारहगयाथाऔरवहउनपुरानेसकैचों कोमेरेसामनेरखताजाताथा, जिनकेनीचेकिसीअनामसेचित्रकारकानामलिखाहोता-
'येवहस्तम्भहैजोबुद्धगुप्तकेवक्तमेंमैत्रीगुप्तऔरधन्यविष्णुनेबनायाथा, देखोतबभीइसपरयेदोनोंगरुड़ बनेथेजिनकीपीठजुडीहैऔरजिनकेसिरकेपीछेयहचक्राकारआकृतिबनीहै'.
वहइतनीतल्लीनतासेबताताथा, किखुदहीकिताबऔरचित्रदेखताथाऔरबोलताजाताथा-
'येवोस्तम्भहैजिसपरलिखेअभिलेखसेऔरतोरमाणवालेअभिलेखसेलोगकन्फ्यूजहोजातेहैंक्योंकिदोनोंकावक्तएकहीहै.परजोस्तम्भपरलिखाहैवहभानुगुप्तकाअभिलेखहैजोकिएकबादकागुप्तराजाथाऔरदूसराजोवराहपरहैवहभी 510 AD काहैऔरहूणराजातोरमाणकाअभिलेखहै.'
वहअपनेसाथबौद्धधर्मकीएककिताब'मंजूश्रीमूलकल्प'औरराधाकुमुदमुख़र्जीकी'गुप्तकालीनभारत'लायाथा. मेरीउससेबहसहुईथीकिवहइतनाश्योरकैसेहैकि 510 AD तकतोरमाणनेयहाँकेगुप्तशासकभानुगुप्तकोपरास्तकरदियाथा, शायदयहबातसहीनहींजोवहबतातारहताहै.अपनीइसबातकेसबूतकेरूपमेंउसकेपासयेचारचीजेंथीं- 1888 कातोरमाणऔरभानुगुप्तकेअभिलेखोंकाट्रांसक्रिप्ट, कनिंघमकीकिताब'रिपोर्टऑफ़टूर्सइनबुंदेलखंडएंडमालवाइन 1874-75'केकुछहिस्से, राधाकुमुदमुखर्जीकीकिताब'गुप्तकालीनभारत'औरबौद्धधर्मग्रन्थ'मंजूश्रीमूलकल्प'.
मैंनेउसेबड़ेतरतीबसेमंजुश्रीमूलकल्पकेपन्नोंकोपलटतेदेखाथा.इतनीनफ़ासतसेमानोजराजोरसेपलटेतोपन्नामुड़करटूटजाएजैसाकिबहुतपुरानेपन्नोंकेसाथहोताहै. यद्यपिउसकिताबकेपन्नेइतनेनाजुकनथे, शायदइसलिएवहइतनीनफ़ासतसेउसकेपन्नेपलटताथाताकिवेसलामतरहेंऔरपुरानेहोकरभी बरसोंतकउसकेपासटिकेरहें. मंजूश्रीमूलकल्पकीउसकिताबपरउसकेअनुवादककानामलिखाथा- राहुलसांकृत्यायन.यहनामदेखनेकेबादमैंअपनीकुर्सीसेउठकरउसकेपासचलाआयाथाऔरकिताबकेएकदमपासअपनाचेहरालाकरउसेटकटकातासादेखनेलगा.मेरीयहहरकतउसेठीकनलगी- 'तुमबैठोन. मैंतुम्हेंबतातोरहाहूँ.’- उसनेमेरीआँखोंकीओरदेखकरकहा.
'येराहुलसांकृत्यायनकाअनुवादहै.'-मैंनेथोड़ाअचरजसेपूछा.'तुमतोऐसाप्रदर्शितकररहेहोमानोइसलेखककोजानतेहो.मैंनेकहानमैंबतातोरहाहूँ.'- उसनेथोड़ातल्ख़ीसेकहाथा. मैंनेदेखाकिकनिंघमकेदौरकेनक्शोंऔरकुछट्रांस्क्रिप्टसकोउसनेएकपन्नीमेंसंभालकररखाहुआथा. शायद इसलिए के उसके बिखरते पन्ने सलामत रहें, मंजुश्रीमूलकल्पकाएकपृष्ठउसनेबड़ीहिफाज़तसेखोललियाथा. मुझेपहलीबारलगाकिभलेआपने राहुल सांकृत्यायनकोपढ़ाहोऔरउनकीकिसीअनुदितकिताबकोदेखअचरजमेंपडभीजाएंतबभीऐसेदोस्तकीबातगौरसेसुनलेनीचाहिएजोकिसीपुरानीकिताबकेपन्नोंकोबड़ीहिफाज़तसेपलटताहै, उसकेकिसीहिस्सेकेबारेमेंइसतरहसेबतानेकोआतुरहोताहै मानोबतानरहाहो खुदसेहीबातकररहाहो.
तोइसतरहमैंनेऐरणकोपहलीबारजानाथा.
फ्लीटऔरकनिंघम केप्राम्भिकअध्ययनयेबतातेहैंकियहाँसेमिलेसिक्केजिन्हें कनिंघमनेपंचमार्क, ड्राईस्ट्रक, कास्टऔरइन्स्क्राइब्डकीश्रेणीमेंबाँटाहै, यहाँस्थितकिसीविशालमिंटयानेसिक्केगढ़नेकेकारखानेमेंबनेहोंगे. इनसिक्कोंपरजे.सी. ब्राउनकेइसनिष्कर्षमेंकाफीतर्कहैकिभारतमेंपुरानेपंचमार्कसिक्कोंकीजगहडाईस्ट्रकसिक्केबनानेकाकामऐरणमेंहीशुरूहुआथा. डाईस्ट्रकसिक्केधातुकी दोपरतोंकोएकदूसरेपरपीटकरतैयारकियेजातेथेऔरपुरानेपंचमार्कसिक्कोंसेआगेकीतकनीककेथे. ईसापूर्वसातवींसदीसेलेकरकमसेकम 300 ईस्वीतककेजोसिक्केइसस्थानसेमिलेहैंउनकाप्रसारउज्जैन, मालवाऔरत्रिपुरीतकथा. यानीसिक्कोंकीसप्लाईकेकेंद्रकेरूपमेंयहशहरथाहीजहाँयेसिक्केढालेजातेथेऔरइनकीआपूर्तिकीजातीथी. तमिलनाडुकेसुलूरजैसेदूरस्थइलाकेकेउत्खनन मेंऐरणकेयेसिक्केमिलेहैं. कनिंघमकायहमाननारहा हैकिऐरण सेमिलेप्राचीनताम्बेकेसिक्केभारतमेंमिलेसबसेउत्तमगुणवत्ताकेसिक्केहैं. उनकेअनुसारप्राचीनभारतकेसबसेबड़ेऔरसबसेछोटेआकारकेसिक्केभीयहींसेमिलेहैं. कुछसिक्कोंमेंचंद्राकारआकृतिबनीहै. कनिंघमके अनुसारयहचंद्राकारआकृतिऐरणशहरकाप्रतीकहै. यहआकृतिऐरणशहरकेविन्यासकोदिखातीहै. ऐरणशहरचंद्राकारआकारकाथाऔरइसकेइसीआकारकोदर्शाते चंद्राकारआकृतिसिक्कोंमेंअंकितकीगयी. यह बात हमेशा रोचक लगी कि एक शहर का नाम दूर–दूर तक फैली घास के नाम पर होता है और जो चंद्राकार आकृति का है और जिसके सिक्कों में उस इलाके की नदी को उकेरा जाता है.
हूणोंमेंसबसेपहलेहमलाकरनेवालेहूणकिराडाइटहूणबतायेजातेहैं. किडाराइटहूणवेहूणथेजिन्होंनेसबसेपहलेउत्तरपश्चिमभारतकेइलाकोंपरकब्ज़ाकियाथाऔरबादमेंगुप्तसाम्राज्यकेपश्चिमीइलाकोंपर.स्कंदगुप्तकेवक्तकाभितारीअभिलेखइनकेसाथएकभयानकयुद्धकाहवालादेताहै.बादमेंइन्हींहूणोंकीएकशाखाजिसेएलकॉनहूणोंकेनामसेजानाजाताहैउनकेहमलेहुएजिसमेंपुरानेहमलावरकिडाराइटहूणोंकीशिकस्तहुई.इन्हीं एलकॉनहूणोंमेंएकराजाहुआतोरमाण. ऐरणकेदोनोंअभिलेखोंयानेभानुगुप्तऔरवराहवालेअभिलेख, बौद्धग्रन्थ'मंजूश्रीमूलकल्प'तथा राधाकुमुदमुख़र्जीऔरअन्यइतिहासकारोंकेनिष्कर्षोंकेआधारपरमानाजासकताहैकिऐरणकाराजाभानुगुप्तइसीतोरमाणसेजंगमेंहारागयाथाऔरइसतरहपश्चिमीगुप्तसाम्राज्यकायहहिस्साजिसमेंआजकामालवाका क्षेत्र शामिलहै, हूणोंकेकब्जेमेंचलागया. परयहाँएकदिक्कतयहहैकिइनदोनोंअभिलेखोंकीदोव्याख्याएंहैं. एक 1888 कीजोकनिंघमकीटीमनेकीथीऔरदूसरी 1981 मेंआर्किओलॉजिकलसर्वेऑफ़इंडियाकीऔरदोनोंमेंअंतरहै.इसकीवजहयहहैकिप्राचीनकालमेंअभिलेखप्रशस्तियाअन्यजानकारीकोकाव्यात्मकऔरप्रतीकात्मकरूपमेंदर्शितकरतेथेजिसकीअलग-अलगव्याख्याएंनिकालीजासकतीथीं.मैंउसदोस्तकोसुनताथाजोमंजुश्रीमूलकल्पकेआधारपरयहबातकहताथाकितोरमाणनेभानुगुप्तकोपरास्तकियाथाऔरऐरणपरकब्ज़ाकरलियाथा.राधाकुमुदमुखर्जीकीकिताबउसपरथीही.
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(एरण का विष्णु मंदिर मण्डप) |
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(एरण स्थित वराह की विशालकाय प्रतिमा) |
वराहमंदिरकेस्तम्भोंकाअलंकरणबेहदशानदारहै. संभवतःराजाधन्यविष्णुकेबनायेइसमंदिरकेइनस्तम्भोंमेंसभीओरअलंकरणहैं हीजोपत्थरमेंकाफीगहराईलिएहुएहैऔरचक्र, कमल, सिंह, घण्टीआदिकेआकारोंसेबनायेगएबेलबूटोंऔरकंगूरोंसेभरेहुए हैं.स्तम्भपरअलंकरणोंमेंबेहदसटीकज्यामितीयसममितताऔरसाम्यहैतथाइनकेसजावटीनमूनेएकदमअलगहैंजोउसदौरमेंविकसितस्थापत्यसेहमेंरूबरूकरातेहैं.कनिंघमनेइनस्तम्भोंकाएकरेखाचित्रभीतैयारकरवायाथा, जोउसकीरिपोर्टकाहिस्साहै. वराहकीशानदारमूर्तीपरकैथरीनबेकरकाएकआलेखहै'नॉटयोरएवरेजबोअर : दकोलोसलवराहएटऐरण,एनआईकॉनोग्राफिकइनोवेशन'जोइसवराहकीशानदारमूर्ति केबारेमेंहै.
उन्होंनेइसेमूर्ति विद्याकानवाचारकहाहै. वेइसकेऊपरकियेगए जटिलअलंकरणों, इसकेदाएँटस्कसेलटकतीदेवीकीमूर्ति, इसपरलिखेअभिलेखऔरअन्यबारीकियोंकीवजहसेइसेप्रतीकात्मकआख्यानकीमूर्तिभीकहतीहैं. उन्होंनेयहतर्कभीकियाहैकिइसकेचारोंओरबनामंदिरजैसाकिस्तम्भोंऔरमंडपकेअवशेषोंसेपताचलताहैठीकवैसाहीरहाहोगाजैसाकिखजुराहोकेवराहमंदिरमेंदेखनेकोमिलताहै.तमामअनुसंधानकर्ताओंद्वाराप्रस्तुतइसमंदिरकेसंभावितवास्तुऔररेखांकनोंकेबीचइसमंदिरकाएकविस्तृतविन्यासउन्होंनेप्रस्तुतकियाहैजोपूर्वमेंऔरखासकरकनिंघमद्वाराप्रस्तावितचौकोरविन्याससेकाफीअलगहै. इसकेपक्षमेंकुछअत्यंतरोचकऔरमहत्वपूर्णसाक्ष्यभीउन्होंनेप्रस्तुतकियेहैं.
कैथरीनबेकरकायहआलेखइसपुरातनतमवराहकीइस मूर्तिकीव्याख्याप्रस्तुतकरताहै. वराहकेदाहिनेदन्तसेधरतीमाताकोदिखायागयाहैजिनकाकेशविन्यासऔररत्नजड़ितपगड़ीबेहदखूबसूरतहै.वराहकेकानोंकेपासदैवीयवाद्ययन्त्रवादकोंकाअंकनहै.पीठपरएकतरफसाधुओंकाएकसमूहउत्कीर्णितहैजोएकहाथमेंकमंडललिएहैंऔरदूसरेमेंयोग मुद्राकाप्रदर्शनकर रहे हैं. नीचेकाएकहिस्साजिसपरसेपत्थरकीचिप्पीउखड़गयीहैबहुतसंभवहैउसपरविष्णुकाकोईअंकनरहाहोविशेषतःउनकेउनअवतारोंमेंसेकोईजिसमेंउन्हेंमनुष्यकीदेहसेअलगकिसीदैवीयजीवके रूपमेंदिखायागयाहो. बेकरनेयहनिष्कर्षकुछअन्यवराहकीमूर्तियोंसेइसकीतुलनाकरनिकालाहै. इसतरहइनचारदैवीयमानवीयआकृतियोंकेअलावाएकआकृतिवराहकीजीभपरअंकितहै. इसवराहकीजीभजरासीबाहरकोनिकलीहैऔरइसपरबनीआकृतिकोबेकरकेइसलेखमेंसरस्वतीबतायागयाहै,जीव्हापरसरस्वतीकावासहोनेकीहिन्दूमान्यताकेआधारपर.
बेकरकामाननाहैकिवाराहकेगलेमेंउत्कीर्णितमालाजिसमेंअट्ठाईसफूलनुमाज्यामितीयआकृतियाँउत्कीर्णितहैंवे अट्ठाईसनक्षत्रोंकोदर्शातीहैं.यद्यपिइसकाकोईसुस्पष्टआधारउनकेइसलेखमेंनहींदिखताहैपरप्रत्येकनक्षत्रकीखगोलीयस्थितिऔरउसमेंपुरुषऔरस्त्रीतत्वोंकेसमावेशनपरउन्होंनेविस्तारसेलिखाहै.
वराहकीछातीपरअंकितहूणराजातोरमाणके 510 AD केअभिलेखकीबेकरकीव्याख्याइसपरप्रचलितऔरमान्यऐतिहासिकतथ्योंजैसीहीहै.मालवाकेपूर्वीक्षेत्रोंपरहूणोंकेकब्जेऔरगुप्तराजाकेपराजयकोइसअभिलेखकेमाध्यमसेउन्होंने भी बतायाहै.सतीकेबारेमेंभीवहीहैजोपहलेउल्लिखितकियागया.यद्यपिवराहकेशिल्पऔरऐतिहासिकताकीकई-कईजगहभावुकऔरअलंकृतभाषामेंव्याख्याकीगयीहै, परफिरभीइसअद्भुतमूर्तिकोजाननेसमझनेकेलिएयहएकअहमलेखहै.
हूणोंकेहमलोंकोलेकरउसदोस्तकेपासबहुतकुछथा, जैसेकौशाम्बीकोनष्टकियेजानेकेप्रमाणजिनमेंकौशाम्बीमेंआर्किओलॉजीकलसर्वेऑफ़इंडियाकीएकपुरातात्विकखोजकाज़िक्रभीथा, जिसमेंलगभगपाँचसेंटीमीटरकीराखकेअवशेषोंकेनीचेदबाएकविशालप्रसादमिलताहै.एकबेहदअविश्वसनीयरिपोर्टपरउसकाएकमजबूततर्कपाटलिपुत्रकोलेकरभीथा, किहूणोंकेहमलेकेबादमगधकावहसबसेआलीशानशहरएकगाँवमेंतबदीलहोगयाथा.कुछसाक्ष्यइसबातकेभीथेकिअंततःउज्जयिनी, विदिशाऔरमथुराजैसेशहरोंकाविनाशभीइनहमलोंमेंहुआही.ऐरणपरऐसाकुछभीकहींनहींदीखताइसमजबूतप्रमाणकेबादभीकिहूणोंनेयहाँकेगुप्तराजाकोपरास्तकिया. सिक्कोंकेविशालजख़ीरेकेअलावा ऐरण इसजगहसेमिले सिद्धवरमन, समुद्रगुप्त, बुद्धगुप्त, तोरमाणऔरभानुगुप्तकेअभिलेखोंकेलिएभीइतिहासमेंअपनीजगहरखताहै, यद्यपिअपनीअस्पष्टताऔरइसवजहसेबार-बारइनअभिलेखोंकेट्रांसक्रिप्टकेकारणआजभीइनपरकाफीकामकियाजानाहै. 1881 केकनिंघमकेट्रांसक्रिप्शनऔर 1988 का ASI केट्रांसक्रिप्शनकेबादएकलम्बावक्तबीताहैऔरइसकालकोसमझनेकीऐतिहासिकचेतनाका काफीविकासभीहुआहै.कनिंघमनेउसवक्तकिसीस्थानीयव्यक्तिकेघरपरविष्णुसेजुडीएकप्राचीनमूर्तिदेखीथी, जिसकाजिक्रकियाहै. होसकताहैवहअबभीवहाँहो.संरक्षणऔरखोजकुछऔरचीजोंकोसामनेलातीहीहै.
एकअद्भुतबातयहभीहैकिउत्खनननेयहबतायाकियहजगहकहींज्यादापुरानीरहीहै.यहाँसेचैलियोलिथिककालकेऔजारमिलेहैं. जोइसकीपुरातनताकोकमसेकमएकहज़ारआठसौसाल ईसा पूर्व तक लेजातेहैं. मध्यप्रदेशकेसागरजिलेमेंबीनाकेनिकटयहस्थानआजभीहैही. नरसिंह मंदिर, गरुड़ स्तम्भ, वराह मंदिर, विष्णु मंदिर आदि के साथ-साथ तमाम प्राचीन इमारतों के भग्नावशेष यहाँ हैं ही और एक शहर की प्राचीर जिसे कनिंघम ने तसदीक किया उसके बाहर भी हैं.
लगता है किसी दौर में इस शहर के चर्चे रहे होंगे ही, खासकर इसलिए भी कि जिस तरह से इसका उल्लेख आता है और ईसा से एक हज़ार साल से भी पहले से इसका एक विकास क्रम मिलता है. हो सकता है इसके पतन का भी कोई वाकया हो जो अब भी अस्पष्ट है. एक बेहद जानकार शहर का नाम अगर सुना जाना बंद हो जाए तो इसके कुछ मायने हैं. नर्म मुलायम घास के समंदर यहाँ अब भी दिखते हैं, बारिश के बाद और बहती है बीना नदी भी, मानो इतने प्राचीन समय के बाद भी कुछ है जो यथावत है, बहुत कम जाने सुने गए किसी किस्से कि तरह से. मानो इस बात से कोई ख़ास फर्क न पड़ता हो कि कोई अब इस तरफ नहीं आता. खुले आकाश के नीचे पुराने वक्त के ऐरण के टुकड़े सांस लेते रहते हैं. जैसे कोई मणिक होता है, जो अपनी दुनिया में होता है, बेशकीमती, भले अभी उसे ठीक तरह से कोई जान न पाया हो और उसे बिना निहारे आगे चला जाता हो.
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तरुण भटनागर का जन्म 24सितम्बर को रामपुर, छतीसगढ़ में हुआ. अब तक उनके तीन कहानी-संग्रह प्रकाशित हैं- ‘गुलमेहंदी की झाड़ियाँ’,‘भूगोल के दरवाज़े पर'तथा ‘जंगल में दर्पण’. पहला उपन्यास 'लौटती नहीं जो हँसी'वर्ष 2014में प्रकाशित. दूसरा उपन्यास ‘राजा,जंगल और काला चाँद’ वर्ष २०१९ में प्रकाशित. ‘बेदावा'तीसरा उपन्यास है. कुछ रचनाएँ मराठी, उड़िया, अंग्रेजी और तेलगू में अनूदित हो चुकी हैं. कई कहानियों व कविताओं का हिन्दी से अंग्रेजी में अनुवाद.
कहानी-संग्रह "गुलमेंहदी की झाड़ियों'को युवा रचनाशीलता का 'वागीश्वरी पुरस्कार' 2009; कहानी 'मैंगोलाइट'जो बाद में कुछ संशोधन के साथ ‘भूगोल के दरवाजे पर'शीर्षक से आई थी, ‘शैलेश मटियानी कथा पुरस्कार'से पुरस्कृत. उपन्यास ‘लौटती नहीं जो हँसी'को 2014का 'स्पंदन कृति सम्मान’ ‘वनमाली युवा कथा सम्मान' 2019मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा का हिन्दी सेवा सम्मान 2015आदि.
वर्तमान में भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत.
tarun.bhatnagar1996@gmail.com