हरजीत के यार (१) : नवीन कुमार नैथानी और तेजी ग्रोवर
ये हरे पेड़ हैंहरजीत सिंह की आठ ग़ज़लें 1कश्तियों से क्या पूछें सब्ज़ झील की बातेंबत्तखों से पूछेंगे झील की सभी बातें कांच की हैं दीवारें जिनमें अब वो रहता हैकांच की तरह नाज़ुक उसके प्यार की बातें...
View Articleअस्मिता भवन, स्वामी दयानंद रोड, राजधानी: अम्बर पाण्डेय
अम्बर पाण्डेय की कहानियों ने अपनी पहचान अर्जित की है और उनके अपने पाठक भी तैयार हुए हैं. उष्म भाषा, नवाचारी शिल्प और विचारों की उत्तेजना के बीच उनकी कहानियां हर बार कुछ अप्रत्याशित घटित करती हैं....
View Articleहरजीत के यार (१) : नवीन कुमार नैथानी और तेजी ग्रोवर
आज हरजीत (१९५९-१९९९)होते तो अपना ६२ वां जन्म दिन अपने यारों के साथ मना रहे होते. इस मकबूल शायर और बेहतरीन कलाकार को जाने की जल्दी थी.हरजीत की कुछ ग़ज़लें और तेजी ग्रोवर के संस्मरण २०१८ में समालोचन पर...
View Articleमाणिक बंद्योपाध्याय: स्वामी - स्त्री : अनुवाद - शिव किशोर तिवारी
माणिक बंद्योपाध्याय(9 May 1908 – 3 December 1956)की १९४४ में लिखी प्रसिद्ध कहानी ‘स्वामी-स्त्री’ का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद शिव किशोर तिवारी ने किया है. माणिक दा ने ३६ उपन्यास और ढाई सौ से अधिक...
View Articleराहुल राजेश की कविताएँ
राहुल राजेश की कविताएँ १.बाजारपोठिया माछ की तरह चाँदी का वर्क हैचंचल चितवन से चपल है मुस्कानटोकरी में बस चार अमरूद बचे हैंबाकी सब बिक गये सिलेट पर आखर अभ्यास का समय नहीं दुपहरिया बैठकर दुहरा लेगी...
View Articleमंगलेश डबराल : दिस नंबर दज़ नॉट एग्ज़िस्ट : धीरेन्द्र कुमार
इधर की कविता में सक्रिय युवा पीढ़ी को मंगलेश डबराल ने बहुत प्रभावित किया है. देखने में शांत, संयमित, बोलने में संकोच के साथ हिचक का सादापन लिए मंगलेश खुलने पर उतने ही गम्भीर, सतर्क और सख्त मिलते थे....
View Articleराहुल राजेश की कविताएँ
‘अब मैं इतना दरिद्र हुआकि मुझ पर अब किसी केप्रेम का कर्ज़ भी नहीं.’ कवि राहुल राजेश आज उस मोड़ पर हैं जहाँ वह अपनी कविताओं में तोड़-फोड़ कर सकते हैं. एक समय के बाद हर कवि को ऐसा लगता है और वह करता भी है....
View Articleफर्नांडो सोरेंटिनो : जीवनशैली : कैफ़ी हाशमी
फर्नांडो सोरेंटिनोजीवनशैलीअनुवाद : कैफ़ी हाशमी अपनी जवानी के दिनों में, एक किसान और पशुपालक बनने से पहले मैं एक बैंक का कर्मचारी था. यह सब कुछ इस प्रकार घटित हुआ.उस वक्त मैं चौबीस साल का था और कहने...
View Articleविष्णुचंद्र शर्मा : वह एक अकेला कर्मशील : प्रमोद कुमार तिवारी
हिंदी साहित्य का अधिकांश ऐसे लेखकों द्वारा सृजित है जो स्वभाव से दरवेश थे/हैं- सांसारिक अर्थों में निपट अव्यावहारिक पर साहित्य और विचार को लेकर सतर्क और सन्नद्ध. भारतेंदु से शुरू करके आप विष्णुचंद्र...
View Articleफर्नांडो सोरेंटिनो : जीवनशैली : कैफ़ी हाशमी
अर्जेंटीना के लेखक फर्नांडो सोर्रेंटिनो (जन्म: 8 नवंबर, 1942) स्पेनिश भाषा में लिखते हैं. अब तक उनके छह कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए हैं जिनका पन्द्रह से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. फर्नांडो आम...
View Articleसांस्कृतिक हिंसा के रुप (राजाराम भादू) : हरियश राय
सांस्कृतिक हिंसा के रुप : राजाराम भादू प्राकृत भारती अकादमी, जयपुरप्रथम संस्करण : 2020मूल्य रु 320/- सांस्कृतिक हिंसा के रुप : संरचनागत और सांस्कृतिक हिंसा हरियश राय केवल हथियारों के उपयोग से...
View Articleशशि कपूर, लता मंगेशकर और कपिल शर्मा: हरि मृदुल
हरि मृदुल ने ‘अमर उजाला’ के मुंबई ब्यूरो में विशेष संवाददाता रहते हुए चमकती फिल्मी दुनिया के अँधेरे और टूटन को भी करीब से देखा है, उनकी ये तीनों कहानियाँ यहीं से पैदा हुईं हैं. तीन कहानियाँ...
View Articleऐरण उर्फ़ ऐरिकिण : भारत के विस्मृत नगर(१) : तरुण भटनागर
प्राचीन भारतीय नगरों के बनने, मिटने और खोजने की गाथा ‘भारत के विस्मृत नगर’ की पहली कड़ी ऐरण अर्थात ऐरिकिण पर आधारित है. ‘ऐरण’ मध्य प्रदेश के सागर से लगभग ९० किलोमीटर दूरी पर है. यह भारत के प्राचीनतम और...
View Articleहेमरतनकृत गोरा-बादल पदमिणी चउपई का हिंदी कथा रूपांतर: माधव हाड़ा
(18th-century painting of Padmini.)महाकवि जायसी कृत ‘पदमावत’ के ४८ वर्ष बाद 1588 ईस्वी में हेमरतन ने ‘गोरा बादल पदमिणी चउपई’की रचना राजस्थानी भाषा में की थी. लगभग ६१६ छंदों और दस खंडों की इस कृति का...
View Articleजिस सुबह पिता गुजरे: सुभाष गाताडे
(दो)सुभाष गाताडे जिस सुबह पिता गुजरे ! ऐसा नहीं हुआ किपृथ्वी का चलना अचानक थम गया,न चिड़ियों की वह आवाज़ेंजो कभी कभी बगल के पेड़ सेसुनायी पड़ती...
View Articleरज़ा : जैसा मैंने देखा (८) : अखिलेश
कलाओं के आपसी रिश्ते घनिष्ठ रहें हैं. संगीत से कविता का नाता आदि से अबतक अनवरत है. चित्र से कविता की यारी भी पुरानी है, भारतीय चित्रकला में इसकी पुष्ट परम्परा मध्यकाल तक चली आई थी. आधुनिक चित्रकला में...
View Articleविशेष आयोजन: कला के व्योम में शब्द और कर्म
पेंटिंग देखकर कवियों ने कविताएँ लिखीं हैं, कविताएँ पढ़कर भी चित्र बनाये जाते हैं. कभी-कभी दोनों साथ-साथ भी रहते हैं. पतंगे वैसे तो उड़ती रहती हैं पर मकर संक्रांति के दिन वे ख़ास तौर से उड़ती है. इस बार...
View Articleअशोक वाजपेयी से अरुण देव की बातचीत
जन्म दिन पर ख़ासअशोक वाजपेयी से अरुण देव की बातचीत१.‘ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता’(ग़ालिब) आपका कवि कर्म सुदीर्घ है. लगभग छह दशको में पसरा हुआ. तीस के...
View Articleगोरख पाण्डेय : शिवमंगल सिद्धांतकर
गोरख पाण्डेय के लेखन की शुरुआत १९६९ के किसान आंदोलन में उनके जुड़ाव से हुई और वे भोजपुरी में गीत लिखने लगे बाद में वे जन संस्कृति मंच के संस्थापक सदस्य और प्रथम महासचिव बने. उनकी कविताओं का संग्रह...
View Article