कवि और अनुवादक सौरभ राय को आप पढ़ते आ रहें हैं.वह बेंगलुरु में रहते हैं. अपने नये कविता संग्रह ‘काल वैसाखी’ की तैयारी में हैं. कुछ कविताएँ इसी संग्रह से. इन कविताओं में महानगर की यांत्रिकता की भयावहता के बीच आपको राग-तत्व की उपस्थिति भी मिलेगी, छूट गए कस्बे की यादें भी और कविता इसे ही बचाती है.
सौरभ राय की कविताएँ