ज्योति शोभा की कविताएँ
ज्योति शोभा की कविताएँ इधर खूब पढ़ी और सराही जा रहीं हैं. पिछले वर्ष समालोचन के ‘मंगलाचार’ में वह रेखांकित हुईं थीं. इस बीच उनकी कविताओं ने अपने मूल स्वर की रक्षा करते हुए लगातार अपने को पुष्ट किया है....
View Articleपरख : अनासक्त आस्तिक (ज्योतिष जोशी ) : मीना बुद्धिराजा
अनासक्त आस्तिक : जैनेन्द्र कुमार की जीवनीज्योतिष जोशीप्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली-2प्रथम संस्करण-2019आवरण चित्र-प्रदीप कुमारमूल्य- रू- 299पृष्ठ संख्या- 299क्रांतिकारी कथाकार और मौलिक चिंतक...
View Articleअपने आकाश में (सविता भार्गव) : अनुपमा सिंह
“प्रेम में पड़ी स्त्री मुझे अच्छी लगती हैलेकिन मुझे दुख होता हैकिसी पुरुष की तरह कामोत्तेजित होकर उससेमैं प्यार नहीं कर सकतीनहीं देखा जाता मुझसेछली गयी स्त्री का दुखलेकिन मुझे दुख होता हैमैं नहीं दे...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : सौरभ राय
कवि और अनुवादक सौरभ राय को आप पढ़ते आ रहें हैं.वह बेंगलुरु में रहते हैं. अपने नये कविता संग्रह ‘काल वैसाखी’ की तैयारी में हैं. कुछ कविताएँ इसी संग्रह से. इन कविताओं में महानगर की यांत्रिकता की भयावहता...
View Articleकथा-गाथा : तमाशा (अफसर अहमद) : शिव किशोर तिवारी
अफसर अहमद बांग्ला भाषा के मशहूर कथाकार हैं. मृणाल सेन की फ़िल्म ‘आमार भुबोन’उनके ही उपन्यास ‘धानज्योत्स्ना’पर आधारित है. अफसर अहमद के २७ उपन्यास और १४ कथेतर कृतियाँ प्रकाशित हैं. उन्हें कहानी के लिए...
View Articleअन्यत्र : मुम्बई : संदीप नाईक
कभी अली सरदार जाफ़री ने बम्बई पर पर अपनी एक नज़्म में कहा था -“एक जन्नत जहन्नम की आग़ोश में या इसे यूँ कहूँ एक दोज़ख़ है फ़िरदौस की गोद में” आज ‘बम्बई’ मुम्बई है पर आज भी यह तमाम नरकों का स्वर्ग है....
View Articleसावित्रीबाई फुले की कविताई : बजरंग बिहारी तिवारी
महान सुधारक सावित्रीबाई फुले कवयित्री भी थीं. उनके मराठी में दो संग्रह प्रकाशित हुए- ‘काव्यफुले’ (१८५४) तथा ‘बावन्नकशी सुबोधरत्नाकर’ (१८९१).‘क्रांतिज्योति’सावित्रीबाई फुले की कविताएँ औपनिवेशिक भारत में...
View Articleकथा-गाथा : अवशिष्ट : नरेश गोस्वामी
नरेश गोस्वामी की कहानियाँ आप समालोचन पर पढ़ते आ रहें हैं, आम नागरिक की लाचारी और डर को जिस तरह से वह लगातार लिख रहे हैं, वैसा अब तक देखने में कम मिला है. कसी हुई कथा-वस्तु उनकी विशेषता है. ‘अवशिष्ट’...
View Articleसबद भेद : बेवतनी से बदवतनी तक : बलवन्त कौर
(Photo by James Groleau)राष्ट्र के महाख्यान में दर्द और ज़ख्मों के तमाम अध्याय छुपा लिए जाते हैं, कोशिश होती है उनसे आँख चुराने की. उन्हें याद करना अपने को यातना के कटघरे में खड़ा करना है. बलवन्त कौरआजकल...
View Articleमति का धीर : लक्ष्मीधर मालवीय
मदनमोहन मालवीय के पौत्र लक्ष्मीधर मालवीय हिंदी के शिक्षक, भाषाशास्त्री, संपादक, कथाकार, चित्रकार आदि तो थे ही जापान में उनका घर लेखकों का एक सहज आत्मीय अड्डा भी बना रहा. उन्होंने साहित्यकारों के बेजोड़...
View Articleकथा-गाथा : ज़ोम्बी : शिवेंद्र
ज़ोम्बी चलता फिरता मृत मानव शरीर है जिसे तांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा जीवित किया जाता है पर वह शव की ही तरह व्यवहार करता है उसमें स्वतंत्र सोच या विवेक का अभाव रहता है. वह मनुष्यों को संक्रमित कर उसे भी...
View Articleसबद - भेद : मुद्राराक्षस का नारकीय : संतोष अर्श
“एक ही फन हमने सीखा है,जिस से मिलिये उसे ख़फा कीजिये” (जॉन एलिया)मुद्राराक्षस (२१ जून १९३३- १३ जून २०१६) इसी तरह के व्यक्ति थे, उनका आत्मपरक उपन्यास ‘नारकीय’ इस बात की तसदीक़ करता है. उनका मूल नाम...
View Articleकथा-गाथा : अशोक अग्रवाल : कोरस
किसी भी लेखक के लिए पांच दशकों का सक्रिय रचनात्मक जीवन आसन नहीं होता, ख़ासकर हिंदी का कथाकार जो आजीविका के लिए तमाम दूसरे कर्मो पर निर्भर रहता है. वरिष्ठ कथाकार अशोक अग्रवाल की पहली कहानी ‘अवमूल्यन’...
View Articleभाषा का अवमूल्यन : यादवेन्द्र
मनुष्य के पास विकसित भाषा है, भाषा में ही वह रहता है. किसी भी समाज के सांस्कृतिक पतन की आहट उसकी भाषा में सुनी जा सकती है. सबसे पहले भाषा पतित होती है, गिरती है. राजनीति मनुष्यों के समूह की सार्वजनिक...
View Articleमंगलाचार : सोमेश शुक्ल
हिंदी कविता की दुनिया में विविधता उसी तरह है जिस तरह इस समाज में है. एक ही समय में तमाम चीजें एक साथ चलती रहती हैं. आप अपने लिए कोई सी जगह चुन सकते हैं किसी भी स्वर में कह सकते हैं. शोर में शामिल होने...
View Articleपरख : रिनाला खुर्द (ईश मधु तलवार) : मीना बुद्धिराजा
रिनाला खुर्दईशमधु तलवारप्रकाशक- राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली-110002प्रथम संस्करण-2019पृष्ठ सं-160मूल्य- पेपरबैक्स- रू. 150“रिनाला खुर्द पढ़ने के बाद लगा, जैसे मैं नीम का कोई पेड़ हो गया हूँ और उस पेड़ से...
View Articleसबद भेद : पॉल गोमरा का स्कूटर (उदय प्रकाश) : शिप्रा किरण
पॉल गोमरा का स्कूटरबाज़ार से यूं ही गुज़र जाना आसान कहाँ शिप्रा किरण“बड़ी तेजी से दुनिया बनती जा रही है एक बड़ा गाँवलोभ क्रोध ईर्ष्या द्वेष के लिए अब कहीं और नहीं जाना पड़तामनुष्यों के संबंध...
View Articleकथा-गाथा : ईश : प्रचण्ड प्रवीर
प्रचण्ड प्रवीर जो भी लिखते हैं उसमें दर्शन की सुदृढ़ भावभूमि अवश्य होती है वैसे वह पेशे से केमिकल इंजीनियर हैं. उनका एक उपन्यास, हिंदी और अंग्रेजी में एक एक कहानी संग्रह, विश्व सिनेमा को भारतीय रस...
View Articleकृष्ण बलदेव वैद : डायरी का दर्पण : आशुतोष भारद्वाज
उदयन वाजपेयी के संपादन में प्रकाशित त्रैमासिक ‘समास’ साहित्य की कुछ गिनती की गम्भीर पत्रिकाओं में से एक है. इसके सोलहवें अंक (जुलाई-सितम्बर 2017) में हिंदी के महत्वपूर्ण उपन्यासकारों में से एक कृष्ण...
View Articleसबद भेद : कृष्णा सोबती :ओम निश्चल
सुपरिचित आलोचक ओम निश्चल की लेखन शैली की यह विशेषता है कि वह जो भी करते हैं पूरी तैयारी के साथ करते हैं और लगभग सभी पक्षों को समेटने का प्रयास करते हैं. उनके यहाँ मुकम्मल दर्ज़ होता है. वे आलोच्य का गहन...
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