Quantcast
Channel: समालोचन
Viewing all articles
Browse latest Browse all 1573

सबद - भेद : मुद्राराक्षस का नारकीय : संतोष अर्श

$
0
0




























“एक ही फन हमने सीखा है,
जिस से मिलिये उसे ख़फा कीजिये (जॉन एलिया)

मुद्राराक्षस (२१ जून १९३३- १३ जून २०१६) इसी तरह के व्यक्ति थे, उनका आत्मपरक उपन्यास ‘नारकीय’ इस बात की तसदीक़ करता है. उनका मूल नाम सुभाषचन्द्र आर्य है. लेखक, चिंतक, एक्टिविस्ट और धर्म-संस्कृति के मौलिक व्याख्याकार मुद्राराक्षस ने दस नाटक, नौ उपन्यास, तीन कहानी संग्रह, दो व्यंग्य संग्रह, दो आलोचना पुस्तकें और पुनर्पाठ आदि लिखे हैं.

नारकीय उनके लेखकीय जीवन का वृतांत है जिसमें उनका जीवन-संघर्ष, राजनीतिक सामाजिक बदलाव और समकालीन तमाम लेखकों से उनके मुठभेड़ के किस्से आदि दर्ज़ हैं. यह लेखक के उसके समय और समाज का भी वृतांत है.

प्रस्तुत आलेख हिंदी के यशस्वी अध्येता-आलोचक संतोष अर्श ने लिखा है. बहुत ही महत्वपूर्ण आलेख है. विस्तार से मुद्राराक्षस के व्यक्तित्व और वैचारिकी को परखता समझता है. इस आलेख में कुछ रोचक प्रसंग भी आ गयें हैं.




मुद्राराक्षस के नरक की नियतिहीनता : नारकीय           
संतोष अर्श 






Viewing all articles
Browse latest Browse all 1573

Trending Articles



<script src="https://jsc.adskeeper.com/r/s/rssing.com.1596347.js" async> </script>