विनय कुमार का कविता संग्रह ‘यक्षिणी’ इसी साल राजकमल से छप कर आया है. यक्षिणी की खंडित मूर्ति को केंद्र में रखकर लिखी गयी यह काव्य-श्रृंखला, कविता के शिल्प में मिथक को जहाँ साकार करती है वहीँ समय के प्रहार को भी मुखर करती है.
युवा कवि अंचित यात्राओं के सन्दर्भ में इस कृति को देख रहें हैं -
यक्षिणी
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अंचित