सबद भेद : बेवतनी से बदवतनी तक : बलवन्त कौर
(Photo by James Groleau)राष्ट्र के महाख्यान में दर्द और ज़ख्मों के तमाम अध्याय छुपा लिए जाते हैं, कोशिश होती है उनसे आँख चुराने की. उन्हें याद करना अपने को यातना के कटघरे में खड़ा करना है. बलवन्त कौरआजकल...
View Articleभाष्य : प्रभात की कविता : सदाशिव श्रोत्रिय
प्रभात की कविताओं पर लिखते हुए अरुण कमल ने माना है कि ‘यह हिंदी कविता की उंचाई भी है और भविष्य भी’. उनका संग्रह ‘अपनों में नहीं रह पाने का गीत’ साहित्य अकादेमी ने २०१४ में प्रकाशित किया था.प्रभात की...
View Articleविनोद पदरज की कविताएँ
कोई तो रंग है’ और ‘अगन जल’ संग्रहों के कवि विनोद पदरज (13 फरवरी 1960-सवाई माधोपुर) का तीसरा संग्रह ‘देस’ बोधि प्रकाशन से इसी वर्ष प्रकाशित हुआ है. स्थानीयता को सलीके से बरतने और शिल्प की कसावट के लिए...
View Articleएक था डॉक्टर एक था संत : विमर्शमूलक विखंडन और उकसावेबाजी के बीच : अरुण...
लेखिका और विचारक अरुंधति रॉय की किताब ‘The Doctor and the Saint’ का हिंदी अनुवाद अनिल यादव ‘जयहिंद’ और रतन लाल ने ‘एक था डॉक्टर एक था संत’ शीर्षक से किया है, जिसे राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित किया है....
View Articleआर्टिकल 15 : संविधान, सच और सिनेमा : संदीप नाईक
अनुभव सिन्हा के निर्देशन में अभी हाल ही भी प्रदर्शित हिंदी फ़िल्म 'आर्टिकल 15'सभी तरह के दर्शकों में खूब लोकप्रिय हो रही है. इस फ़िल्म को हिंदी के चर्चित कथाकार गौरव सोलंकी ने लिखा है. संदीप नाईक इस...
View Articleअंकिता आनंद की कविताएँ
अंकिता आनंद ‘आतिश’नाट्य समिति और "पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स’की सदस्य हैं. इससे पहले उनका जुड़ाव सूचना के अधिकार के राष्ट्रीय अभियान, पेंगुइन बुक्स और समन्वय: भारतीय भाषा महोत्सव’से था....
View Articleरंजना मिश्रा की कविताएँ
कवियों पर कविताएँ कवि लिखते रहें हैं. ‘पुरस्कारों की घोषणा’ में रंजना मिश्रा ने कवियों पर जो मीठी चुटकी ली वह कमाल की ही. एक कविता अभिनेता संजीव कुमार पर है तो कुछ कविताएँ अपने शोहदे प्रेमी अंजुम के...
View Articleपरख : शिलाहवा (किरण सिंह) : मीना बुद्धिराजा
मिथकीय पात्रों को केंद्र में रखकर सृजनात्मक लेखन अतीत का वर्तमान के सन्दर्भ में पुनर्लेखन है, कथाकार किरण सिंह शोध-अन्वेषण के साथ अपने पात्रों का सृजन करती हैं. ‘अहल्या’ को आधार बनाकर लिखा गया उपन्यास...
View Articleपंकज चौधरी : समय, सत्ता और प्रतिपक्ष : शहंशाह आलम
पंकज चौधरी की कविताएँ अभिधा की ताकत की कविताएँ हैं, इस ताकत का इस्तेमाल वह सत्ता चाहे समाजिक और धार्मिक ही क्यों न हो की संरचनाओं में अंतर्निहित असंतुलन को समझने में करते हैं. वह करुणा की ताकत के कवि...
View Articleयक्षिणी (विनय कुमार) : अंचित
विनय कुमार का कविता संग्रह ‘यक्षिणी’ इसी साल राजकमल से छप कर आया है. यक्षिणी की खंडित मूर्ति को केंद्र में रखकर लिखी गयी यह काव्य-श्रृंखला, कविता के शिल्प में मिथक को जहाँ साकार करती है वहीँ समय के...
View Articleमंगलेश डबराल की कविताएँ
हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि मंगलेश डबराल की काव्य-यात्रा का यह पांचवा दशक है. इन पचास वर्षो में वह हिंदी कविता के विश्वसनीय और जरूरी कवि बने हुए हैं. ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘हम जो देखते...
View Articleकथा-गाथा : आखेट से पहले : नरेश गोस्वामी
ख़रीद फ़रोख़्त का जो यह ऑन लाइन व्यवसाय है, जो हर जगह पसरा है यहाँ तक कि आप दिवंगत के लिए शोक संदेश लिख रहे थे और बगल में किसी नामी कम्पनी का उत्पाद अच्छे खासे डिस्काउंट पर चमकने लगता है और इसी बीच आप...
View Articleकृष्ण बलदेव वैद : डायरी का दर्पण : आशुतोष भारद्वाज
उदयन वाजपेयी के संपादन में प्रकाशित त्रैमासिक ‘समास’ साहित्य की कुछ गिनती की गम्भीर पत्रिकाओं में से एक है. इसके सोलहवें अंक (जुलाई-सितम्बर 2017) में हिंदी के महत्वपूर्ण उपन्यासकारों में से एक कृष्ण...
View Articleकथा-गाथा : आखेट से पहले : नरेश गोस्वामी
ख़रीद फ़रोख़्त का जो यह ऑन लाइन व्यवसाय है, जो हर जगह पसरा है यहाँ तक कि आप दिवंगत के लिए शोक संदेश लिख रहे थे और बगल में किसी नामी कम्पनी का उत्पाद अच्छे खासे डिस्काउंट पर चमकने लगता है और इसी बीच आप...
View Articleमेघ-दूत : डब्ल्यू. एस. मरविन की आठ कविताएँ : सरबजीत गरचा
हमारे समय के महत्वपूर्ण कवियों में से एक डब्ल्यू. एस. मरविन (William Stanley Merwin : September 30, 1927 – March 15, 2019) का इसी साल मार्च में निधन हो गया, स्मरण करते हुए उनकी आठ कविताओं का हिंदी...
View Articleकथा-गाथा : गूँगी रुलाई का कोरस : रणेन्द्र
रणेंद्र के तीसरे अप्रकाशित उपन्यास ‘गूँगी रुलाई का कोरस’ के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत हैं. ‘ग्लोबल गाँव के देवता’ और ‘गायब होता देश’ से चर्चित, प्रशंसित रणेंद्र के इस तीसरे उपन्यास से भी बहुत उम्मीदें हैं....
View Articleनिज घर : लटक मत फटक : व्योमेश शुक्ल
तस्वीर : आभार सहित Sughosh Mishraहिंदी के कवि व्योमेश शुक्ल, इधर रंगकर्मी, प्रखर. उनके निर्देशित नाटकों ने देश भर में ध्यान खींचा है, कामायनी, राम की शक्ति पूजा, रश्मिरथी चित्रकूट आदि को आधार बनाकर...
View Articleकृष्ण बलदेव वैद से आशुतोष भारद्वाज की बातचीत
कृष्ण बलदेव वैद (२७ जुलाई,१९२७,पंजाब, पीएच डी- हार्वर्ड विश्वविद्यालय)उपन्यासउसका बचपन, बिमल उर्फ जाएँ तो जाएँ कहाँ, नसरीन, दूसरा न कोई, दर्द ला दवा, गुज़रा हुआ ज़माना, काला कोलाज, नर-नारी, मायालोक, एक...
View Articleमोहम्मद रफ़ी : तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे : सुशील कृष्ण गोरे
३१ जुलाई १९८० को महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफ़ी हमसे हमेशा के लिए अलग हो गये पर इस महाद्वीप में आज भी उनकी आवाज़ गूंजती रहती है. उन्हें याद कर रहें हैं सुशील कृष्ण गोरे. तुम मुझे यूं भुला ना...
View Articleसबद - भेद : विष्णु खरे : अप्रत्याशित का निर्वचन : ओम निश्चल
कवि विष्णु खरे के दो संग्रह ‘प्रतिनिधि कविताएँ’ और ‘और अन्य कविताएँ’ २०१७ में एक साथ प्रकाशित हुईं. पहली की भूमिका केदारनाथ सिंह ने लिखी है दूसरे का फ्लैप कुँवर नारायण ने. अब ये तीनों बड़े कवि हमारे बीच...
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