अनामिका अनु पेशे से वैज्ञानिक हैं, त्रिवेन्द्रम में रहती हैं और कविताएँ लिखती हैं. कविता को मनुष्यता की पुकार कहा गया है, जिस चोट को आप गद्य में नहीं अभिव्यक्त कर सकते उसे कविता न केवल मुखर करती है, उसे वह किसी कलाकृति में बदलने की क्षमता भी रखती है जिससे कि उसे व्यापकता मिले. दुःख सबका दुःख बन सके.
उनकी कुछ कविताएँ आपके लिए.
अनामिका अनु की कविताएँ
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