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Channel: समालोचन
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सुषमा नैथानी की कविताएँ

सुषमा नैथानी की कविताएँ            \सत्यातीत समय मेंपोस्ट ट्रुथवैश्वीकरण की नाव पर चढ़कर आया है.दीवार खड़ी करने का हठ हो या ब्रेक्जिटसब ग्लोबल गाँव में छीना-झपटी के नये पैंतरे हैं.पिछले पच्चीस की खुली...

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‘तब वे वही चुटकुले सुना रहे थे जिन्हें वे आंसुओं की जगह इस्तेमाल करते आये...

(Artwork of Johnson Tsang)संपादक प्रथम पाठक है, कई बार रचनाएँ उसे उसी तरह सुख देती हैं तब वह आनायास ही किसी पाठक की तरह चाहता है कि जो आनंद उसे मिला है उसे वह साझा करे. आशुतोष भारद्वाज इसी तरह का वैभव...

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कथा-गाथा : दादीबई शाओना हिलेल की जीवनी :अम्बर पाण्डेय

दादीबई शाओना हिलेल की जीवनी                      अम्बर पाण्डेय (“To destroy a man is difficult, almost as difficult as to create one.”)खंडवा से बम्बई आते हुए मेरे नाना त्र्यम्बक दिगम्बर काणे की पहली...

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कृष्ण बलदेव वैद से आशुतोष भारद्वाज की बातचीत

हिंदी कथा संसार में एक बहुमूल्य त्रिगुट है- निर्मल वर्मा, कृष्णा सोबती और कृष्ण बलदेव वैद. ये तीनों हस्तियाँ आपस में मित्र भी रहीं हैं. कृष्ण बलदेव वैद का लेखन विस्तृत है. उनके पास अनुभव और अध्यवसाय की...

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कथा-गाथा : दादीबई शाओना हिलेल की जीवनी :अम्बर पाण्डेय

अम्बर पाण्डेय की कहानी ‘४७१४ नहीं बल्कि ४७११’ एक माह पूर्व समालोचन पर प्रकाशित हुई थी, अब उनकी दूसरी कहानी ‘दादीबई शाओना हिलेल की जीवनी’ प्रस्तुत है. कभी उदय प्रकाश के विषय में नामवर सिंह ने कहा था कि...

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राजभाषा : अंतर्विरोध और बुनियादी सरोकार : मोहसिन ख़ान

भाषा त्वचा की तरह होती है. क्या कभी त्वचा भी बदली जा सकती है. इस देश की विडम्बनाओं का कोई अंत नहीं. शायद अकेला देश है जो भाषा दिवस मनाता है. संकट जन भाषा हिन्दुस्तानी को लेकर नहीं है विश्व में बड़ी तीन...

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भाष्य : नंद बाबू की एक कविता : सदाशिव श्रोत्रिय

जैसे कोई कोई ही कवि होता है उसी तरह से कुछ ही सहृदय होते हैं जहाँ कविताएँ खुलती हैं. सुरुचि, समझ और धैर्य ये भावक की ज़िम्मेदारियाँ हैं. सदाशिव श्रोत्रिय कवि हैं और कविता के व्याख्याकार भी. नंद...

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मंगलाचार : अनामिका अनु की कविताएँ

अनामिका अनु पेशे से वैज्ञानिक हैं, त्रिवेन्द्रम में रहती हैं और कविताएँ लिखती हैं. कविता को मनुष्यता की पुकार कहा गया है, जिस चोट को आप गद्य में नहीं अभिव्यक्त कर सकते उसे कविता न केवल मुखर करती है,...

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जश्न ए दोस्ती की कविताएँ

‘फ़रियाद की कोई लय नहीं है नाला पाबंद-ए-नय नहीं है.’ (ग़ालिब)साहित्य कला है, वह आवाज़, पुकार और मशाल है. वह दोस्ती है और दोस्ती का जश्न भी. कुछ स्त्रियाँ मिलती हैं और इस एहसास को कि तमाम अंतर के बाद हैं...

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कृष्णा सोबती : लेखन और नारीवाद : रेखा सेठी

कृष्णा सोबती की स्त्रियाँ दबंग हैं और अपनी यौनिकता को लेकर मुखर भी. पर क्या वे ‘स्त्रीवादी’ भी हैं? कृष्णा सोबती खुद को स्त्रीवादी लेखिका के रूप में नहीं देखती थीं. क्या यह सामर्थ्य खुद उसी परम्परा में...

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राकेश मिश्र की कविताएँ

राकेश मिश्र के तीन कविता संग्रह इसी वर्ष प्रकाशित हुए हैं. उनकी कवितायेँ सहज, सरल, सुबोध हैं. वे जीवन से कुछ पल और प्रसंग उठाते हैं और उन्हें  शब्दों से रंग देते हैं, उनकी अपनी ही आभा दिखने लगती है....

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परख : योगफल (अरुण कमल) : मीना बुद्धिराजा

योगफलअरुण कमलवाणी प्रकाशन, नयी दिल्लीप्रथम संस्करण -2019मूल्य- रू. 295प्रसिद्ध हिंदी कवि अरुण कमल की २०११ से २०१८ के बीच लिखी गयी कविताओं का संग्रह ‘योगफल’ इस वर्ष वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. मीना...

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चर्यापद : शिरीष कुमार मौर्य

चर्यापद“गौतम बुद्ध के मित्र व शिष्य भद्रक किंवा भदिया द्वारा इक्कीसवीं सदी में विरचित ये नवीन चर्यापद इस विधा के प्रथम व मूल प्रस्तोता शबरपा और उनके गुरु सरहपा को सादर समर्पित हैं.” शिरीष कुमार...

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कथा-गाथा : साठ साल बाद बैल की वापसी : बटरोही

साहित्य और सत्य के बीच कल्पना है, साहित्य को सार्वभौम बनाती हुई. कल्पना से यथार्थ और यथार्थ से जादुई होती कथा की दुनिया जटिल समय को अंकित करती चल रही है. कथा में वर्तमान, इतिहास, पौराणिक-जातीय आख्यान,...

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चर्यापद : शिरीष कुमार मौर्य

किसी विषय को केंद्र में रखकर कविताओं की श्रृंखला तैयार करने की प्रवृत्ति हिंदी में है, नदी, पहाड़, प्रेम और प्रकृति पर केन्द्रित कविता- संग्रह इधर प्रकाशित हुए हैं. कवि-आलोचक शिरीष कुमार मौर्य ने आठवीं...

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विष्णु खरे : विवरण में संसार : सविता सिंह

विष्णु खरे : विवरण में संसार                          सविता सिंहकिसी कवि को कैसे याद करना चाहिए कि वह ठीक-ठीक याद किया जाए और समझा जाए, वह भी यदि वह विष्णु खरे जैसा कवि हो जिसकी कविताओं के बनने की एक...

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वाम बनाम दक्षिण की साहित्य परम्परा : विमल कुमार

हिंदी साहित्यकारों और सेवियों को राजनीतिक आधार पर बांट कर क्या हम समग्र साहित्य को क्षति पहुंचा रहें हैं ? स्वतंत्रता दिवस पर वरिष्ठ कवि पत्रकार विमल कुमार की यह टिप्पणीराष्ट्रवादी लेखन और वाम बनाम...

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विष्णु खरे : विवरण में संसार : सविता सिंह

विष्णु खरे : विवरण में संसार                          सविता सिंहकिसी कवि को कैसे याद करना चाहिए कि वह ठीक-ठीक याद किया जाए और समझा जाए, वह भी यदि वह विष्णु खरे जैसा कवि हो जिसकी कविताओं के बनने की एक...

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मुक्तिबोध की कहानियाँ : सूरज पालीवाल

रायपुर में पिछले दस वर्षो से अनवरत ‘मुक्तिबोध स्मृति व्याख्यान’के अंतर्गत इस वर्ष ११ सितम्बर को व्याख्याता थे वरिष्ठ आलोचक सूरज पालीवाल, और विषय था– ‘दीमक के व्यापारियों के विरुद्ध प्रति-संसार रचती...

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मंगलाचार : शालिनी मोहन की कविताएँ

सादगी   सादगी को जब छुओगे तुमतुम्हारे हाथ आएँगे ढ़ेर सारे रंगसब अलग-अलगटेढ़ी-मेढ़ी, टूटी-फूटी रेखाएँउभर कर, स्पष्ट दिखने लगेंगीकिसी एक दिनजब तुम्हारा दिमाग़ बिल्कुल ऊब चुका होगासोचने, पहचानने और समझने की...

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