कथा - गाथा : जयश्री रॉय (दौड़)
जयश्री रॉय की यह नई कहानी ‘दौड़’ एक बेरोजगार युवक की कहानी है जो हवलदार की नौकरी के लिए तय ५ किलोमीटर की दौड़ तो पूरी कर लेता है पर ... इस कहानी में वह मुख्यालय में शारीरिक परिक्षण के लिए खड़ा है और...
View Articleविष्णु खरे : सत्ता-एक्टर-मीडिया भगवान, बाक़ी सब भुनगों समान
'यदि उसे (सोनम) भी हेमा मालिनी के साथ अस्पताल ले जाया जाता, तो उसकी जान बच जाती'_________________________मशहूर अभिनेत्री और सांसद हेमामालिनी की कार दुर्घटना की खबरे सबने पढ़ी और तस्वीरें देखीं, पर यह...
View Articleकथा-गाथा : प्रभात रंजन (किस्से)
कथाकार, अनुवादक, संपादक प्रभात रंजन इधर अपनी कृति, ‘कोठागोई’ के लिए चर्चा में हैं. किस्सों की श्रृंखला ‘देश की बात देस का किस्सा’ का एक किस्सा आपके लिए. इस श्रृंखला के प्रकाशन की शुरुआत समालोचन से हो...
View Articleपरख : गाँव भीतर गाँव (सत्यनारायण पटेल) : शशिभूषण मिश्र
समीक्षा हाशिए के समाज का संकट शशिभूषण मिश्रभेम का भेरू मांगता कुल्हाड़ी ईमान, लाल छीट वाली लूगड़ी का सपना, काफ़िर बिजूका उर्फ़ इब्लीस जैसे चर्चित कहानी–संग्रहों के...
View Articleसबद भेद : आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी और उनका अभिनंदन : मैनेजर पाण्डेय
महान संपादक आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी को १९३३ में काशी नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से एक अभिनंदन ग्रन्थ भेंट किया गया जिसमें देश – विदेश के साहित्यकारों – मनीषियों के लेख संकलित थे. उसकी भूमिका श्याम...
View Articleपरख : प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता (लवली गोस्वामी) : संजय जोठे
मिथकों और पुराशिल्पों के अध्ययन और विश्लेषण पर दामोदर धर्मानंद कोसंबी (१९०७-१९६६) ने बेहतरीन कार्य किया है. उनके लिखे शोध निबन्धों की संख्या १०० से भी अधिक हैं. अंग्रेजी में लिखे इन निबन्धों में से कुछ...
View Articleमंगलाचार : सुदीप सोहनी की कविताएँ
हर नया स्वर, हर नई कविता और कवि उम्मीद होते हैं, न सिर्फ भाषा के लिए, जहाँ भाषाएँ बोली जाती हैं उस दुनिया के लिए भी. सुदीप, कवि के रूप में अपनी पहचान की यात्रा शुरू कर रहे हैं. रचनात्मक तो वह हैं हीं....
View Articleविष्णु खरे : यह बाहु कुबेर, इंद्रजाल और कैमरे के बली हैं
एस॰एस॰ राजामौली के निर्देशन में तेलगु भाषा में बनी 'बाहुबली'फिल्म को देश की अब तक की सबसे महंगी फिल्म बताया जा रहा है जिसमें दो भाइयों के बीच साम्राज्य पर शासन के लिए युद्ध की गाथा दिखायी गयी है. इसे...
View Articleकथा - गाथा : उत्तर प्रदेश की खिड़की
कहानीउत्तर प्रदेश की खिड़की (प्रिय मित्र सीमा आज़ाद के लिए)विमल चन्द्र पाण्डेयप्रश्न-मेरे घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं है और मेरे पिताजी की नौकरी छूट गयी है. वो चाहते हैं कि मैं...
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी (७) : उत्तर प्रदेश की खिड़की (विमल चन्द्र पाण्डेय) : राकेश...
भूमंडलोत्तर कहानियों के चयन और चर्चा के क्रम में इस बार विमल चंद्र पाण्डेय की चर्चित कहानी ‘उत्तर प्रदेश की खिड़की’ पर आलोचक राकेश बिहारी का आलेख- ‘प्रेम, राजनीति और बदलती हुई आर्थिक परिघटनाओं के...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : पंकज चतुर्वेदी
पेंटिग : Abir Karmakar (Room)प्रारम्भ से ही पहचाने और रेखांकित किये गए पंकज चतुर्वेदी, हिंदी कविता के समकालीन परिदृश्य में अपनी कविता के औदात्य के साथ पिछले एक दशक से उपस्थित हैं, हाल ही में उनका...
View Articleमीमांसा : जुरगेन हेबरमास : अच्युतानंद मिश्र
विश्व के प्रमुख बुद्धिजीवियों में शुमार, जर्मन समाजशास्त्री और दार्शनिक जुरगेन हेबरमास (Jürgen Habermas, 8 June 1929), लोकवृत्त (Public sphere) की अपनी अवधारणा के कारण जाने और माने जाते हैं, इसके साथ...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : नूतन डिमरी गैरोला
नूतन डिमरी गैरोला की इन कविताओं में उनकी काव्य – यात्रा का विकास दीखता है. संवेदना और शिल्प दोनों ही स्तरों पर वह परिमार्जित हुई हैं. कविताएँ अनुभवों की सघनता और सच्चाई से आश्वस्त करती हैं. लगभग सभी...
View Articleविष्णु खरे : जो आत्मकथा साहित्यिक-फ़िल्मी इतिहास बनाएगी
क्या आप ने किशोर साहू का नाम सुना है? क्या आपको पता है २२ अक्तूबर २०१५ को उनके जन्म के १०० साल पूरे हो रहे हैं? शायद आपको यह भी ज्ञात न हो कि उन्होंने अपनी आत्मकथा भी लिखी थी जो अब तक विलुप्त थी...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : मोनिका कुमार
मोनिका कुमार की कविताएँ आप 'समालोचन'पर इससे पहले भी पढ़ चुके हैं. प्रस्तुत है उनकी छह नयी कविताएँ. टिप्पणी दे रहे हैं अविनाश मिश्र मोनिका कुमार की कवितायेँ...
View Articleपरख : अपनों में नहीं रह पाने का गीत (प्रभात) : प्रमोद कुमार तिवारी
समकालीन हिंदी आलोचना में प्रभात की कविताओं को लेकर उत्साह है, हालाँकि अभी उनका एक ही काव्य-संग्रह ‘अपनों में नहीं रह पाने का गीत’ प्रकाशित है. कविताओं के अतरिक्त आदिवासी लोक साहित्य पर भी उनका कार्य...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : महेश वर्मा
युवा कथाकार चन्दन पाण्डेय ने महेश वर्मा की कविताओं पर समालोचन में ही एक जगह लिखा है – “एक घटना याद पड़ती है. मान्देल्स्ताम को पढ़ते हुए अन्ना अख्मातोवा ने अभिभूत और परेशान, दोनों, होकर लिखा था कि इस कवि...
View Articleमैं कहता आँखिन देखी : सच्चिदानंद सिन्हा
मुजफ्फरपुर (बिहार) के एक छोटे-से गांव मणिका (मुसहरी प्रखंड) के सवेराकुटी में वर्षों से रहते हुए ८५ वर्षीय प्रख्यात समाजवादी चिंतक और विचारक सच्चिदानंद सिन्हा आज भी सक्रिय हैं, भारत की समकालीन राजनीति...
View Articleविष्णु खरे : भीषम साहनी हाज़िर हो
भीष्म साहनी की जन्मशतवार्षिकी पर यह मुनासिब है कि उनकी अदबी, इल्मी, ड्रामाई और फिल्मी दुनियाओं को न सिर्फ फिर से देखा-पढ़ा जाए बल्कि उनके आपसी रिश्तों की बारीकियों को समझ कर उनकी खुसूसियत से रूबरू भी...
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी (८) : नीला घर (अपर्णा मनोज) : राकेश बिहारी
भूमंडलोत्तर कहानियों के चयन और आलोचना के क्रम में इस बार अपर्णा मनोजकी कहानी ‘नीला घर’पर आलोचक राकेश बिहारी का आलेख- ‘नीला घर के बहाने’समालोचन प्रस्तुत कर रहा है. अपर्णा मनोज की कहानियाँ समालोचन के...
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