सहजि सहजि गुन रमैं : बाबुषा कोहली (लंबी कविता : ब्रेक-अप)
हिन्दी में प्रेम – कवितायें कम हैं,ब्रेक-अप पर तो नहीं के बराबर. युवा कवयित्री बाबुषा कोहली की लंबी कविता ‘ब्रेक-अप’इस कमी को पूरा तो करती ही है,हिन्दी कविता की बदलती संवेदना और उसकी सबलता को भी...
View Articleपरख : पंचकन्या (मनीषा कुलश्रेष्ठ ) : विवेक मिश्र
सामयिक प्रकाशन, जटवाडा दरियागंज नई दिल्ली -110002कीमत 395 रुपएसतीत्व और मातृत्व से मुक्त-स्त्री की सृजनशीलता : पंचकन्याविवेक मिश्र'शिगाफ़'और'शालभंजिका'जैसे उपन्यासों के बाद मनीषा कुलश्रेष्ठ का नया...
View Articleकिताब : तरुण भटनागर
किताब : तरुण भटनागर (युवा कथाकार तरुण भटनागर की प्रिय किताब)जब पता चला कि प्रिय किताब पर बोलना है तो एक उहापोह था. प्रिय याने क्या ? कौन सी ? और फिर यह भी कि वह भी...
View Articleसबद - भेद : सबदन मारि जगाये रे फकीरवा : सदानन्द शाही
किसी भी कवि की कविता को समझने के लिए सह्रदयता की आवश्यकता होती है. आम जन सैकड़ो वर्षो से भक्ति-काल के कवियों को इसी औजार से समझते रहे हैं. कबीर की कविता की इस सर्व- संप्रेषणीयता ने ही उन्हें...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : विष्णु खरे
लोग थर्रा गए जिस वक़्त मुनादी आयीआज पैग़ाम नया ज़िल्ले इलाही देंगे.परवीन शाकिर का यह शेर इधर मुझे बार – बार याद आता है, ख़ासकर जब विष्णु खरे कुछ कहते हैं.एक बौखलाए बाबू की मगरमच्छी ब्लर्ब-वेदना...
View Articleमंगलाचार : महाभूत चन्दन राय
पेंटिंग : Mahesh Balasubramanianमहाभूत चन्दन राय (1981, वैशाली, बिहार) पेशे से केमिकल इंजीनियर हैं और कविताएँ लिखते हैं. किसी युवा में जिस तरह के ‘एंटी – स्टेबलिसमेंट’ की हम उम्मीद करते हैं, वह यहाँ...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : लोकमानस के गाँधी : सुशोभित सक्तावत
‘हम एक जैसे होने के बजाय भिन्न रहते हुए एक दूसरे को ज़्यादा बेहतर ढंग से समझ सकते हैं’. धार्मिक उन्माद और सांस्कृतिक एकीकरण के उफान में गांधी ऐसे नैतिक, मानवीय दृष्टिकोण हैं जो आज भी प्रासंगिक है....
View Articleपरिप्रेक्ष्य : विष्णु खरे (२)
'देखियो ग़ालिब से उलझे न कोई, है वली पोशीदा और काफ़िरखुला.'मिथिलेश श्रीवास्तव के कविता संग्रह ‘पुतले पर गुस्सा’ के उमेश चौहान द्वारा लिखित ब्लर्ब पर विष्णु खरे की टिप्पणी पर प्रतिक्रियाओं के क्रम में...
View Articleपरख : दलाल की बीवी (रवि बुले) : राकेश बिहारी
दलाल की बीवी युवा कथाकार रवि बुले का पहला उपन्यास है. उनके दो कहानी संग्रह प्रकाशित और चर्चित रहे हैं. इसे 'मंदी के दिनों में लव, सेक्स और धोखे की कहानी'कहा गया है. हार्परकालिंस पब्लिशर्स इण्डिया से...
View Articleकथा - गाथा : लक्ष्मी शर्मा (२) इला न देणी आपणी
steve mccurryस्थानीयता से कथा में एक खास तरह की प्रमाणिकता आती है, उसके जमीन से जुड़ाव का अहसास बना रहता है, और कथा-रस कहानी को पठनीय बनाने में सहायक होता है. लक्ष्मी शर्मा की यह कहानी एक ऐसी स्त्री को...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : शिरीष कुमार मौर्य
रात नही कटती? लम्बी यह बेहद लम्बी लगती है ?इसी रात में दस-दस बारी मरना है जीना हैइसी रात में खोना-पाना-सोना-सीना है.ज़ख्म इसी में फिर-फिर कितने खुलते जाने हैंकभी मिलें थे औचक जो सुख वे भी तो पाने...
View Articleकथा - गाथा : मनोज कुमार पाण्डेय
कालजयी फ़िल्म the bicycle Thief का एक दृश्ययुवा कथाकार मनोज कुमार पाण्डेय की कहानी – ‘चोरी’, छोटे –छोटे विवरणों शुरू से होकर बड़ी विडम्बनाओं तक पहुंचती है. बचपन की मासूम चोरियों के दिलचस्प चित्र एक...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : मोदियानो : गीत चतुर्वेदी
२०१४ के साहित्य के नोबेल पुरस्कार की जब घोषणा हुई तब फ्रेंच भाषा के लेखक Patrick Modiano की भारत जैसे अंग्रेजी के उपनिवेश रह चुके देश में तलाश शुरू हुई. फ्रांस के इस सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक को हम कितना...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : पैट्रिक मोदियानो से हेलेन हेर्नमार्क की बातचीत
" मैं 45 साल से एक ही किताब को रुक-रुक कर लिख रहा हूँ.." पैट्रिक मोदियानो(2014 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद, फ्रांसीसी भाषा के उपन्यासकार पैट्रिक मोदियानो सेनोबेल मीडिया की तरफ से की...
View Articleसबद भेद : उत्तर - अशोक : आशुतोष भारद्वाज
फोटो : कविता वाचक्नवीअशोक वाजपेयी हिंदी आलोचना में अपनी प्रेम कविताओं के कारण चर्चित, प्रशंसित और निंदित रहे हैं. पर बाद की उनकी कविताओं के आयतन में विविध विस्तार दिखते हैं. ‘उत्तर–अशोक’ में कबाड़ी,...
View Articleरंग - राग : हैदर : सारंग उपाध्याय
सिनेमा के दर्शक सार्थक फिल्मों की हिंदी की मुख्य धारा के फ़िल्म-उद्योग से उम्मीद रखते हैं. कभी-कभी कुछ फिल्में ऐसी बनती हैं जो प्रबुद्ध दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान अपनी और खीचने में कामयाब रहती हैं....
View Articleपरख : लौटती नहीं जो हँसी (तरुण भटनागर) : राकेश बिहारी
हँसी का नियोजित अकस्मात राकेश बिहारी"`हमकोचूतिया समझे हो. बट्टू की खलिहान वाली हंसी और वो हँसुली के पास पड़ा रुद्राक्ष और उस पर फिर बट्टू की हंसी. शास्त्री की चूंदी की गांठ. स्साला गंठीली...
View Articleमंगलाचार : गौतम राजरिशी
ग़ज़ल कविता का ऐसा ढांचा है जो ब-रास्ते फारसी से होते हुए दुनिया की अधिकतर भाषाओँ में मकबूल है. हिंदी को यह तोहफा उर्दूं की सोहबत से हासिल है या यूँ कहें की जब हिंदी और उर्दूं एक थे और हिन्दवी आदि नामों...
View Articleबात - बेबात : कवि जी : राहुल देव
एक सीधे -सादे नागरिक से जब स्थानीय 'महाकवि'मिलता है तब उसकी क्या दशा (दुर्दशा) होती है ?उम्मीद (आशंका) है कि ऐसे महाकवि आपके नगर- कस्बे में भी होगे - आप बच कर रहे - 'खुदी'हाफिज़.राहुल देव का एक जोरदार...
View Articleरंग - राग : सनी लिओने : विष्णु खरे
किसी भी व्यस्क समाज में यौन – विषयों को सहजता से लेने की नैतिकता रहती है. कामसूत्र के देश से इतने साहस की उम्मीद आज भी किया जाना चाहिए कि वह कला के किसी भी ऐसे विषय से आखँ नहीं चुराएगा. विष्णु खरे ने...
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