मंगलाचार : दर्पण साह
पिथौडागढ़ (उत्तराखण्ड) के दर्पण साह (जन्म : 3-09-1981) की कविताएँ देखें. लोकल और ग्लोबल के बीच हमारी युवा पीढ़ी की सहज आवाजाही है. इन युवा कविताओं में हिंदी कविता का नया मुहावरा आकार लेता दिखता है....
View Articleसबद - भेद : स्थानीयता-बोध : सतीश जायसवाल
Akbar riding the elephant Hawa'I pursuing another elephantसतीश जायसवाल वरिष्ठ कथाकार – संपादक हैं. रचना में स्थानीयता और सार्वभौमिकता को लेकर लम्बी बहसें चली हैं. यह आलेख असरदार तरीके से इस गुत्थी से...
View Articleकथा - गाथा : सारंग उपाध्याय
यह कहानी फिल्मों की दुनिया में संघर्ष कर रहे चार युवाओं – मिनर्वा, अंजुम, रफीक और अदृश्य ‘चौथे लडके’ की कहानी है जो दरअसल हर 'असफल'युवा की कहानी है. कहानी असर छोडती है. सारंग उपाध्याय मुंबई में हैं और...
View Articleपरख : हुल पहाड़िया (उपन्यास) - राकेश कुमार सिंह : राकेश बिहारी
नेपथ्य का नायक – तिलका मांझी राकेश बिहारी बाहरीशक्तियों द्वारा किसी समाज या समुदाय विशेष की पहचान और अस्मिता के अतिक्रमण तथा उसके विरोध की कड़ियों के दस्तावेजीकरण से इतिहास की शृंखला का एक बड़ा...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : बहादुर पटेल
बहादुर पटेल जीवन से संलग्नता के सजीव, संवेनशील और सक्षम कवि हैं. उनमें एक खुरदरापन और जीवटता है जो आत्माभिमान से आलोकित है. जब वह कहते हैं –‘और हम सबमें एक चापलूस की आत्मा भी उतर आई है.’ तो यह प्रतिकार...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : हरिओम
Nitin Mukul-REALM OF THE SENSESनासिख के शिष्य ‘आग़ा- कल्लब हुसैन खां’ का एक शेर हैलोग कहते हैं कि फन्ने शायरी मनहूस हैशेर कहते कहते मैं डिप्टी कलक्टर हो गया.डॉ. हरिओम के साथ मसला दूसरा है, वह कलक्टर...
View Articleकथा - गाथा : कविता (आवाज़ दे कहाँ है)
आभार के साथ- Alfred Degensयुवा कथाकार कविता की यह दिलचस्प कहानी पहले तो आपको पढने के लिए मजबूर करती है फिर रेडियो और एफ. एम. की दुनिया की आवाज़ों के पीछे की कहानियों से जोड़ देती है. दरअसल यह अपने मूल...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : मणि मोहन
चित्र गूगल से आभार सहित गंज बासौदा (म.प्र.) के रहने वाले हिंदी के कवि मणि मोहन के कविता संग्रह "शायद"को इस वर्ष के म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन के वागीश्वरी पुरस्कार के लिए चुना गया है. समालोचन की ओर...
View Articleकथा - गाथा : अनुज (‘अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया’)
पेंटिग : जगन्नाथ पंडासमकालीन कहानियों पर एकाग्र श्रृंखला, 'भूमंडलोत्तर कहानी 'में युवा आलोचक राकेश बिहारी किसी चुनी हुई कहानी के माध्यम से उस कहानी और कहानी में अभिव्यक्त यथार्थ की विवेचना करते...
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी (४) : अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया (अनुज) : राकेश बिहारी
कथादेश के नवम्बर २०१२ में युवा कथाकार अनुज की कहानी'अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया'प्रकाशित हुई और परिकथा के मई–जून २०१३ से लेकर जुलाई–अगस्त २०१४ तक इस पर लम्बी परिचर्चा चली जिसमें मैनेजर पाण्डेय,...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : रामजी तिवारी
वैसे तो समकालीन हिंदी कविता ने छंद और तुक को अपनी दुनिया से लगभग बाहर ही कर दिया है, पर रामजी तिवारी जैसा सचेत कवि जब इस तुक को मध्यवर्गीय जीवन की पराजय से जोड़ता है तब कविता आलोकित हो उठती है, उसमें...
View Articleपरख : काफ़िर बिजूका (सत्यनारायण पटेल) : विजय शर्मा
काफ़ेर बिजूका उर्फ़ इब्लीस (कहानी संग्रह)कहानीकार : सत्यनारायण पटेलप्रकाशक :आधार प्रकाशन, पंचकुला, हरियाणाप्रथम संस्करण: २०१४/पृष्ठ संख्या: १३५मूल्य: २०० रुपएसत्यनारायण पटेल के तीसरे कहानी-संग्रह ‘काफ़िर...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : महेश वर्मा
पेंटिंग : Rajan Krishnan महेश वर्मा समकालीन हिंदी कविता के (कब तक युवा कहा जाता रहेगा – चालीस को कब का पार कर गए.) महत्वपूर्ण कवि हैं. आज हिंदी कविता अपने कथन और कहन में जहाँ तक पहुंची है उसमें एक अलग...
View Articleकथा - गाथा : जयश्री रॉय
‘ज़ून, ज़ाफरान और चांद की रात’कहानी के नेपथ्य में कश्मीर की हकीकत है. यह प्रेम कहानी हब्बा खातून के विरह से भीगी है,यह हब्बा के प्रेमी युसुफ शाह की विडम्बना को आज के कश्मीर में पुन: सृजित करती है. इस की...
View Articleअन्यत्र : महामल्ल्पुरम : अपर्णा मनोज
अपर्णा मनोज पिछले दिनों महामल्ल्पुरम की यात्रा पर थीं और इस सफर को उन्होंने इस संस्मरण में सांस्कृतिक यात्रा में बदल दिया है. इस धरोहर के संचयन के अनके स्तरों को जिस तीक्षणता के साथ समझने का वह प्रयास...
View Articleसबद भेद : कबीर का घर और देश : सदानन्द शाही
कबीर की कविता में घर और देश को लेकर आलोचक प्रो. सदानन्द शाही का यह व्याख्यान भक्तिकाल के तीन बड़े कवियों कबीर, तुलसी और रैदास के अपने-अपने आदर्श राज्यों की बुनावट की भी पड़ताल करता है. जिस कबीर ने घर...
View Articleसबद - भेद : सात कवियों के उपन्यास : अविनाश मिश्र
नामवर सिंह ने उदय प्रकाश के संदर्भ में एक बार यह कहा था कि कवि अच्छे कथाकार हो सकते हैं. भाषा की सृजनात्मकता उनके ध्यान में रही होगी जो कवियों के पास होती ही है, ऐसा समझा जाता है. अविनाश मिश्र ने जब...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : परमेश्वर फुंकवाल
पेंटिग कुंवर रवीन्द्रपरमेश्वर फुंकवाल गीतात्मक संवेदना के कवि हैं. लगाव के बिसरे भूले-क्षण और अलगाव की चुभती- टीसती यादें उनकी कविताओं में जब तब उभर आती हैं. एक कविता रेल से कट गए एक बूढ़े पर है जिसके...
View Articleकथा - गाथा : हृषीकेष सुलभ
पेंटिग के.रवीन्द्रवरिष्ठ रंगकर्मी और कथाकार हृषीकेष सुलभ का नया कहनी संग्रह ‘हलंत’ राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. ‘द्रुत विलम्बित’ इसी संग्रह की मार्मिक कहानी है जो अंत तक पहुँचते पहुँचते विडम्बना...
View Articleकथा - गाथा : राकेश बिहारी
कला कृति Abdullah M. I. Syedराकेश बिहारी कथा–आलोचना में सक्रिय हैं. वह खुद कथाकार भी हैं. उनका कहानी संग्रह ‘वह सपने बेचता था’ प्रकाशित है. प्रतीक्षा कहानी फाइनान्समें कार्यरत एक ऐसे युवा की कहानी है...
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