परख : बिसात पर जुगनू (वंदना राग) : सत्यम श्रीवास्तव
‘बिसात पर जुगनू’ कथाकार वंदना राग का पहला उपन्यास है, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर है. कई बार मुझे लगता है कि साहित्य इतिहास में जिसे होना चाहिए चाहे वह व्यक्ति हो या घटना उसे भी गढ़ सकता है गढ़ लेता है. एक तरह...
View Articleकथा-गाथा : कोरोना से ऐन पहले : पंकज मित्र
कोरोना से ऐन पहलेपंकज मित्र१) क्वॉरेंटाइनना बोल सुन सकने वाले कोका की उपस्थिति सोसाइटी की सबसे वाचाल उपस्थिति थी जहां पर भी कुछ शोरोगुल हो रहा हो यकीन मानिए कि वहां पर कोका जरूर होगा. मंगोलियन...
View Articleसत्यजित राय और पाथेर पंचाली : रंजना मिश्रा
सत्यजित राय (সত্যজিৎ রায়)२ मई १९२१–२३ अप्रैल १९९२)सत्यजित राय और पाथेर पंचाली रंजना मिश्रा‘For many a year,I have travelled many a mileTo lands far awayI have gone to see...
View Articleउपनिवेश में महामारी और स्त्रियाँ : सुजीत कुमार सिंह
(Female patient recovering from bubonic plague)आज सम्प्रभु भारत कोरोना महामारी से जूझ रहा है, अंग्रेजी राज में जब प्लेग,हैजा, मलेरिया आदि महामारियाँ फैलतीं थीं तब तत्कालीन पत्र-पत्रिकाओं की क्या भूमिका...
View Articleसंजुक्ता दासगुप्ता की कविताएँ (अनुवाद- रेखा सेठी)
'संजुक्ता दासगुप्ताअंग्रेज़ी की प्रतिष्ठित कवयित्री हैं. उनके छह कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं— Snapshots (1996), Dilemma (2002), First Language (2005), More Light (2008), Lakshmi Unbound (2017)और...
View Articleभाषा, हिंदी और उपनिवेश : उदय शंकर
डॉ. राजकुमार की पुस्तक ‘हिंदी की जातीय संस्कृति और औपनिवेशिकता’ भारत में अंग्रेजी राज के दरमियान निर्मित और विकसित हुए हिंदी भाषा,साहित्य और संस्कृति से उलझती है जिसे हम भारतीय कहते हैं उसमें कितना...
View Articleहां बोल दो न : टोबॉयस वोल्फ (यादवेन्द्र)
अमरीकन कथाकार Tobias Wolff(जन्म: जून १९, १९४५) की कहानी ‘Say Yes’ का लेखक-अनुवादक यादवेन्द्र द्वारा हिंदी रूपांतरण ‘हां बोल दो न’ पढ़ते हुए लगता है कि आप किसी टिक-टिक करते टाइम बम्ब पर बैठे हैं जो अब...
View Articleसंजुक्ता दासगुप्ता की कविताएँ (अनुवाद- रेखा सेठी)
'संजुक्ता दासगुप्ताअंग्रेज़ी की प्रतिष्ठित कवयित्री हैं. उनके छह कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं— Snapshots (1996), Dilemma (2002), First Language (2005), More Light (2008), Lakshmi Unbound (2017)और...
View Articleतालाबंदी में किसी अज्ञात की खोज : विजय कुमार
(पिकासो)लम्बी कवितातालाबंदी में किसी अज्ञात की खोजविजय कुमार(कोरोना महामारी में संघर्ष करते हुए तमाम अनाम योद्धाओं को समर्पित)उतरती धूप और सिहरती हुई पत्तियों नेकहा कुछ मद्धम मद्धमकबूतरों की शरारती...
View Articleमुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएं : गरिमा श्रीवास्तव
मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएंचुप्पियाँ और दरारें गरिमा श्रीवास्तवहज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर...
View Articleभूपिंदरप्रीत की पन्द्रह कविताएँ (पंजाबी) : रुस्तम सिंह
'कवि का काम शीशा साफ़ करना नहींधुँधले-सेआकार पैदा करना है'भूपिंदरप्रीत (जन्म :1967) समकालीन पंजाबी कविता के परिदृश्य में महत्वपूर्ण और अग्रणी कवि माने जाते हैं, उनके छह कविता संग्रह प्रकाशित हैं. उनकी...
View Articleलॉकडाउन के बाद : स्कन्द शुक्ल
डॉ. स्कन्द शुक्ल (MBBS, MD, DM : Rheumatologist, Immunologist) हिंदी के पाठकों के सुपरिचित लेखक हैं. रोगों की जटिलता, बचाव और निदान को सृजनात्मक भाषा में जिस तरह से वो प्रस्तुत करते हैं, वह अप्रतिम तो...
View Articleवैधानिक गल्प: वैधानिक गल्प: एक इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट : सत्यम श्रीवास्तव
कथाकार चंदन पाण्डेय का उपन्यास ‘वैधानिक गल्प’ चर्चा में है. कृति जब अपने समय को छूती है और उसका एक तरह से प्रतिपक्ष रचती है, उसका पूरक बनती है तब वह उस समय का जरूरी आख्यान तो बनती ही है भविष्य में भी...
View Articleमुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएं : गरिमा श्रीवास्तव
मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएंचुप्पियाँ और दरारें गरिमा श्रीवास्तवहज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर...
View Articleराहुल राजेश की कविताएँ
पहली कविता बहेलिये की तरफ से नहीं पक्षी की तरफ से चीख़ बनकर उठी थी हालाँकि बहेलिये का भी कोई सच हो सकता है. कविता सच और सच में फ़र्क करती है, इतनी नैतिकता उसमें है, होनी चाहिए. वह किसी की भी कैसी भी...
View Articleमुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएं : गरिमा श्रीवास्तव
मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएंचुप्पियाँ और दरारें गरिमा श्रीवास्तवहज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर...
View Articleइरफ़ान ख़ान : साधारण का सौन्दर्य : रश्मि रावत
इरफ़ान ख़ान (७ जनवरी १९६७- २९ अप्रैल २०२०)इरफ़ान ख़ान : साधारण का सौन्दर्य रश्मि रावत ‘अंग्रेजी मीडियम’ फिल्म के दौरान दर्शकों को दिए हुए उनके इस संदेश के बाद उनकी आवाज सुनने को नहीं मिलेगी, ये...
View Articleराग पूरबी (कविताएँ) : शिरीष मौर्य
कवि-आलोचक शिरीष मौर्य इधर विषय केन्द्रित कविताएँ लिख रहें हैं. बौद्धमत से सम्बंधित सिद्धों के ‘चर्यापद’ को आधार बनाकर लिखी उनकी कुछ कविताएँ आपने समालोचन पर अभी कुछ दिनों पहले पढ़ी हैं. प्रस्तुत श्रृंखला...
View Articleइरफ़ान ख़ान : साधारण का सौन्दर्य : रश्मि रावत
अभिनेता इरफ़ान ख़ान (७ जनवरी १९६७- २९ अप्रैल २०२०) अब नहीं रहे, उनकी प्रभावशाली आँखों का अभिनय, उनकी फ़िल्में बची रहेंगी. विदेशी फिल्मों में भी वे नज़र आते थे. कल बी. बी. सी. ने उनपर एक वृत्त चित्र भी...
View Articleयतीश कुमार की कविताएं
यतीश कुमार की कविताएं इंतज़ार वह रो नहीं रही थीउसके गालों परआँसुओं के अवशेष थेइंतज़ार कोमुरझाने की बीमारी हैप्रतीक्षा में फड़फड़ाती चिन्दियाँरोशनदान से झाँकती रहती हैंमद्धिम रोशनी में दीखता...
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