नरेश सक्सेना से संतोष अर्श की बातचीत (दूसरी क़िस्त)
मैं उल्का फूल फेंकता मधुर चन्द्रमुख पर (नरेश सक्सेना से संतोष अर्श की बातचीत भाग-२)(कवि के जीवनानुभवों का प्रमाणन उसकी कविता में प्रकट साक्ष्यों से होता है. नरेश सक्सेना के पास...
View Articleवी.एस.नायपॉल : आधा जीवन - ३ : जय कौशल
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वी.एस.नायपॉल के महत्वपूर्ण उपन्यास 'आधा जीवन' (Half a Life) का तीसरा और अंतिम भाग प्रस्तुत है. इसका अनुवाद जय कौशल ने किया है, यह अनुवाद उनके अकादमिक कार्य का हिस्सा है. यह...
View Articleभूपिंदरप्रीत की पन्द्रह कविताएँ (पंजाबी) : रुस्तम सिंह
'कवि का काम शीशा साफ़ करना नहींधुँधले-सेआकार पैदा करना है'भूपिंदरप्रीत (जन्म :1967) समकालीन पंजाबी कविता के परिदृश्य में महत्वपूर्ण और अग्रणी कवि माने जाते हैं, उनके छह कविता संग्रह प्रकाशित हैं. उनकी...
View Articleएकांत: राकेश श्रीमाल की कविताएँ
राकेश श्रीमाल की कविताएँ एक____कोई तारीखकोई महीनाकोई मौसमतय नहीं किया जा सकताहमारे मिलने के लिएहम आने वाले इतिहास में मिलेंगेएकांत में रहते हुएदो______मैं तुम्हेंउतना ही जानूंगाजितना...
View Articleराहुल राजेश की कविताएँ
राहुल राजेश की कविताएँ गवैयेपहले वे कतार में खड़े हो जाते हैंबाद में नियम और शर्तें पढ़ते हैंऔर स्वादानुसारअपनी आवाज गढ़ते हैंउन्हें मालूम हैआवाज में कितना नमक मिलाएँकि जूरी का मुँह मीठा...
View Articleराग पूरबी (कविताएँ) : शिरीष मौर्य
भूमिका राग पूरबी जब मग़रिब में सूरज डूबता हैबजता हैमशरिक़ में राग पूरबी संझा की द्वाभा वाला एक राग ख़ासजिसके मग़रिब और मशरिक़ऋषभ और धैवत दोनों कोमल किसीसपने सरीखेशेष शुद्धज्यों चलता संसार का अपना सब...
View Articleनदियों की प्रेमकथा और रेजा-राजगीर : प्रेमशंकर शुक्ल
कविताएँ : प्रेमशंकर शुक्ल नदियों की प्रेम-कथा--------------------------अद्वितीय है बावस्ता होना नदियों की प्रेम-कथा सेयद्यपि हमारी प्रेम-कथाओं का नदियों से है अथाह सम्बन्धलेकिन नदियों...
View Articleनवस्तुति : अविनाश मिश्र और वागीश शुक्ल
वरिष्ठ पीढ़ी में कुछ लेखक-आलोचक ही हैं जो समकालीन लेखन से बखूबी परिचित हैं, युवा लेखकों को न केवल पढ़ते हैं, लिख कर या फोन से अपनी सहमति-असहमति भी दर्ज़ करते हैं. विष्णु खरे अब नहीं रहे. नरेश सक्सेना और...
View Articleकोरोना : सभ्यता का संकट: सुशील कृष्ण गोरे :
दिक्कत यह है कि मनुष्य अपने को इस धरती का सर्वश्रेष्ठ प्राणी समझता है, उसके धर्म भी उसे यही मिथ्या विश्वास देते रहते हैं. प्रकृति के लिए मनुष्य और किसी कीड़े में कोई फ़र्क नहीं है. जन्म, प्रजनन और...
View Articleगणेश पाण्डेय की कविताएँ
गणेश पाण्डेय की कविताएँ प्रिय कवि सीरीज१.प्रिय कवि की कारस्तानीवह बहुचर्चित कविजो बहुभाषी कविता पाठ के मंच परअपने पाठ से ठीक पहलेबड़ी विनम्रता से देर तक हाथ जोड़े खड़ा थानहीं दिखने...
View Articleक्वारनटीन : राजिंदर सिंह बेदी
उर्दू के प्रसिद्ध कथाकार राजिंदर सिंह बेदी (1915–1984) की एक कहानी का शीर्षक है ‘क्वारनटीन’ जो अंग्रेजी राज में फैली प्लेग महामारी को केंद्र में रखकर लिखा गयी है. इस कहानी को पढ़ते हुए आज भी डर लगता है....
View Articleकोरोना के इर्द-गिर्द कुछ गद्य : मदन सोनी
कोरोना के इर्द-गिर्द कुछ गद्य मदन सोनीकोरोना महामारी एक सदी बाद अब तक की सबसे सांघातक, सबसे भयावह वैश्विक महामारी है. इसके पहले अन्तिम वैश्विक महामारी सम्भवत:'स्पेनिश...
View Articleयुवा कविता : दो : ओम निश्चल
युवा कविता : दोसमकालीनता और शाश्वतता की वय:संधि पर कवि ओम निश्चलकविता की लौ कभी मंद नहीं होती. अँधेरा जितना भी सघन हो,कवि अपने मोर्चे पर अथक सक्रिय रहता है. हाल में आए कवियों की नई रचनाओं से गुज़रते...
View Articleकोरोना एकान्त में कुछ कविताएँ : अशोक वाजपेयी
(photo Credit: Oxbridge India)कोरोना महामारी के इस विकट दौर में लोग घरों में क़ैद हैं, बचे हुए बाहर की क़ैद में छटपटा रहें हैं. इस भयावह एकांत को कवियों, लेखकों, कलाकारों ने भरना शुरू किया है,...
View Articleमृत्यु के सौ साल बाद रोज़ा लक्ज़मबर्ग : अमरेन्द्र कुमार शर्मा
मैं थी, हूँ और रहूँगी मृत्यु के सौ साल बाद रोज़ा लक्ज़मबर्गअमरेन्द्र कुमार शर्मा“सरल जीवन को खोलने वाली चाबी खुद जीवन में ही है. यदि सिर्फ देखने का नजरिया बदल दिया जाए तो रात का गहरा...
View Articleपरख: वंचना (भगवानदास मोरवाल) : अंकित नरवाल
'वंचना'भगवानदास मोरवाल (१९६०) का सातवां उपन्यास है, जिसे राजकमल ने प्रकाशित किया है. मोरवाल जी के उपन्यासों के अनुवाद मराठी,उर्दू और अंग्रेजी में हुए हैं,उन्हें दिल्ली हिंदी अकादेमी जैसी अनेक संस्थाओं...
View Articleपरख : रानी रूपमती की आत्मकथा (प्रियदर्शी ठाकुर 'ख़याल')
रानी रूपमती की आत्मकथा’ उपन्यास है जिसे प्रियदर्शी ठाकुर ‘ख़्याल’ ने लिखा है जो इसी वर्ष राजकमल से छप कर आया है, इस उपन्यास की चर्चा कर रहीं हैं साधना अग्रवाल.रानी रूपमती की आत्मकथाइतिहास और किंवदंतियों...
View Articleपरख : कौन देस को वासी : वेणु की डायरी (सूर्यबाला) : ओम निश्चल
वरिष्ठ कथाकार सूर्यबाला का नया उपन्यास प्रकाशित हुआ है.- ‘कौन देस को वासी: वेणु की डायरी’. यह उपन्यास प्रवास की सामाजिक–मानसिक उलझनों से जूझता है. इसका उत्स खुद लेखिका का अपना अमेरिका प्रवास है. ऐसा...
View Articleपहलवान की ढोलक : फणीश्वनाथ रेणु
यह फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म शताब्दी वर्ष है, उनकी प्रसिद्ध कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ हालांकि बदलते भारत में देसी कलाकारों के लगातार अप्रासंगिक होते जाने की कथा है पर इसमें ‘हैजे और मलेरिया’ जैसी महामारी का...
View Articleकोरोना-काल में किताबें : कुँवर प्रांजल सिंह
कोरोना-काल में सिर्फ साहित्य की किताबें ही पढ़ी-गुनीं नहीं जा रहीं हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीतिशास्त्र विभाग के शोधार्थी प्रांजल सिंह ने अवध का किसान विद्रोह, इतिहास की पुनर्व्याख्या, पुरबिया का...
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