परख : केवल कुछ वाक्य (उदयन वाजपेयी) : मिथलेश शरण चौबे
केवल कुछ वाक्यस्मृति की आत्मा, कल्पना की देह : आकांक्षा का स्थापत्य मिथलेश शरण चौबे'यदि मुझे किसी के मन से प्रेम है तो मुझे उसके शरीर से भी प्रेम है. यदि मुझे किसी के शब्द अच्छे लगते हैं तो मुझे उसके...
View Articleपरख : 'एंट्स एमंग एलीफेंट्स (सुजाता गिडला) : शुभनीत कौशिक
शुभनीत कौशिक इतिहास के अध्येता हैं, सुजाता गिडला की चर्चित किताब 'एंट्स एमंग एलीफेंट्स: एन अनटचेबल फ़ेमिली एंड द मेकिंग ऑफ मॉडर्न इंडिया'पर लिखी यह उनकी समीक्षा है. इस किताब और उसके तमाम सन्दर्भों को...
View Articleवांग पिंग की कविताएँ : अनुवाद लीलाधर मंडलोई
आप्रवासी कविता हम अपने साथ अपनी मातृ भाषा लिए जा रहे हैं मैं वहाँ से आया हूँ मैं यही का हूँ मैं न वहाँ हूँ, न यहाँ हूँ मेरे दो नाम हैं जो कभी आपस में मिल जाते हैं कभी जुदा हो जाते हैं मैं बोलता भी दो...
View Articleबटरोही : हम तीन थोकदार
हम तीन थोकदार बटरोही यह कहानी बहुत पुराने ज़माने की है, हालाँकि इसका सम्बन्ध आज के हिंदुस्तान का साथ है. आज के ज़माने में थोकदार तो होते नहीं,...
View Articleक्या आचार्य रामचंद्र शुक्ल जातिवादी और साम्प्रदायिक हैं ? प्रेमकुमार मणि
आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य के इतिहास-लेखन और आलोचना के क्षेत्र में अभी भी शीर्ष पर हैं. बिना उनसे वाद–विवाद के आप हिंदी साहित्य से संवाद नहीं कर सकते. उनपर बहुत पहले से जातिवादी और...
View Articleकोरोना वायरस के बाद क्या होता है ? : यान लियांके
कोरोना का कहर चीन में दिसम्बर से शुरू हो गया था. अब वह इसपर जीत के जश्न की मुद्रा में है. कहानी सिर्फ इतनी नहीं है ? इस बीच बहुत कुछ घटित हुआ. यातना,पीड़ाऔर असहायता की जीती जागती कहानियाँ विजय के दर्प...
View Articleऋषि कपूर : सौन्दर्य का साधारणीकरण : सुशील कृष्ण गोरे
ऋषि कपूरसौन्दर्य का साधारणीकरण सुशील कृष्ण गोरे1973 का वर्ष हिंदी सिनेमा का एक बहुत निर्णायक वर्ष था. 70 का पूरा दशक एक-दूसरे को लपेटती और एक दूसरे के ऊपर से निकलने की...
View Articleकथा-गाथा : वह दूसरा : जया जादवानी
वह दूसरा जया जादवानी जब से हमने होश संभाला है, हम हमेशा साथ ही रहते रहे हैं. साथ खाना-पीना. उठना-बैठना-सोना, लड़ना-झगड़ना, रूठना-मनाना भी....
View Articleशशिभूषण द्विवेदी : मैं उसके फोन का इंतज़ार कर रहा हूँ : हरे प्रकाश उपाध्याय
कथाकार शशिभूषण द्विवेदी के कुसमय चले जाने से हिंदी साहित्यिक समाज अवसाद में है. शशिभूषण द्विवेदी अपनी तीखी बेलौस कहानियों के कारण जाने जाते थे. दिल्ली जैसे महानगर में कलम की बदौलत टिकना आसान नहीं है....
View Articleकोरोना काल में चित्रकार
(कोलाज: सुमन सिंह)आइडिया ऑफ़ समालोचन यह था/है कि यह निरी साहित्य की ही पत्रिका न रहे दूसरे सामाजिक अनुशासनों से भी संवादरत रहे और कला के दीगर माध्यमों से भी जुड़ी रहे. आलोचक रवि रंजन ने मिखाइल बख्तिन के...
View Articleमंटो का उपन्यास : बग़ैर उनवान के : विनोद तिवारी
सआदत हसन मंटोहम मर्ज़ बताते हैं लेकिन दवाखानों के मुहतमिम[1]नहीं विनोद तिवारी मैं तहज़ीबो-तमद्दुन की और सोसायटी की चोली क्या उतारूँगा,जो है ही नंगी. मैं उसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नहीं करता,इसलिए कि वह...
View Articleछज्जे से झाँकती पृथ्वी : संतोष अर्श
छज्जे से झाँकती पृथ्वीसंतोष अर्श “Possibly, a good side of the Coronavirus, is it might bring people to think about what kind of a world do we want.”Noam...
View Articleस्मृति शेष : इतिहासकार हरि वासुदेवन : शुभनीत कौशिक
कोरोना समय में अलग-अलग क्षेत्रों के कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हमसे हमेशा के लिए जुदा हो गए, फिल्मों से अभिनेता इरफ़ान और ऋषि कपूर, इतिहासकार हरि वासुदेवन, समाजशास्त्री योगेंद्र सिंह और अब आलोचक नंदकिशोर...
View Articleनंदकिशोर नवल : आलोचक का दायित्व-बोध : विमल कुमार
श्रद्धा सुमन नंदकिशोर नवल : आलोचक का दायित्व-बोध विमल कुमार नंद जी खड़ाऊँ पहनते थे. मुझे आज भी उनके खड़ाऊँ की आवाज़ कानों में साफ सुनाई पड़ती रहती है. वे अपने ऊपर के कमरे से सीढ़ियों से उतरते थे. आंगन...
View Articleकथा-गाथा : पातकी रूढ़ि : अम्बर पाण्डेय
अम्बर पाण्डेय की नई कहानी ‘पातकी रूढ़ि’ पृष्ठभूमि, विषय और भाषा तीनों स्तरों पर विस्मित करती है. अम्बर आख्यान अतीत से उठाते हैं, उसपर शोध करते हैं और फिर अपनी कल्पना से बुन कर एक नया संसार खड़ा कर देते...
View Articleमहामारी : आर्थिक, राजनीतिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण : सौरव कुमार राय
(Photo courtesy : Ben Mckeown )कोरोना आपदा को केंद्र में रखकर लिखे गये वैचारिक और सृजनात्मक लेखन समालोचन पर आप अनवर पढ़ रहें हैं अबतक आपने- अशोक वाजपेयी, विजय कुमार (कविताएँ),राजिंदर सिंह बेदी, फणीश्वर...
View Articleबटरोही : हम तीन थोकदार (दो)
वरिष्ठ कथाकार बटरोही के आख्यान ‘हम तीन थोकदार’ की यह दूसरी किश्त है. इतिहास, संस्कृति,और मिथक कैसे बनते और बदलते रहते हैं इसे यहाँ देखा जा सकता है. कथारस से संतुलित इस यात्रा में बटरोही पाठकों की...
View Articleतिब्बत : भुचुंग डी सोनम की कविताएँ : अनुवाद - अनुराधा सिंह
भुचुंग डी सोनम तिब्बत के महत्वपूर्ण कवि हैं, निर्वासन की उनकी कविताओं ने विश्व में प्रतिष्ठा प्राप्त की है. हिंदी में उन्हें प्रस्तुत कर रहीं हैं अनुराधा सिंह, कविताओं का अनुवाद किया है और टिप्पणी भी...
View Articleकथा-गाथा : वापसी : प्रेमकुमार मणि
वापसी प्रेमकुमार मणियूँतो हप्ते भर से बीमारी को लेकर खुसुर-पुसुर मची थी, और इस बात की चर्चा थी कि कारखाना कभी भी बंद हो सकता है, लेकिन आज एलानिया तौर पर कह दिया गया था कि कल से...
View Articleबिहार की गिरमिटिया मजदूरिनें और जॉर्ज ग्रियर्सन : यादवेन्द्र
स्वाधीन भारत के इस कोरोना काल में मजदूरों की जो दुर्दशा हो रही है, वह अमानवीय तो है ही औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों द्वारा कुली के रूप में हिन्दुस्तानियों ख़ासकर बिहार और पूर्वी उत्तर-प्रदेश के मजदूरों...
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