प्रयाग शुक्ल की कविताएँ
प्रयाग शुक्ल हिंदी के दुर्लभ कवि-लेखक हैं जिन्होंने बच्चों के लिए बहुत लिखा है. उनकी कविताओं में ताज़गी और अकुंठ मनुष्योचित औदात्त आप पाते हैं. वह प्रकृति और परिवेश को शब्दों और रंगों से लिखते हैं. इन...
View Articleउस्ताद के क़िस्से मेरे हिस्से (तीन) : विवेक टेंबे
हिंदी समाज में कलाओं को लेकर उत्सुकता और उत्साह का अभाव है. ख़ासकर जब इसकी तुलना हम मराठी और बांग्ला जाति से करते हैं. यह बढत इन दोनों भाषाओं ने ‘पुनर्जागरण’ काल में ही अर्जित कर लिया था. जगदीश...
View Articleशोभा सिंह की कविताएँ
शोभा सिंह की कविताएँ बारिश से पूर्व की शाम (एक पेटिंग देखते हुए)समय के सूरज कीदहकती आंखमूंदने-मूंदने कोढक लिया हैधुएं के बादल और अनर्गल पत्तियों ने...
View Articleमार्खेज़ : मैं अपने सपने बेचती हूँ : सुशांत सुप्रिय
गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज़मैं अपने सपने बेचती हूँ अनुवाद : सुशांत सुप्रियएक सुबह नौ बजे , जब हम चमकते सूर्य तले हवाना रिविएरा होटल की छत पर नाश्ता कर रहे...
View Articleयुगल राग : रंजना अरगड़े
युगल राग कहे न बनत, बिन कहे कल न परतरंजना अरगड़े (एक)आसावरी वहडूबते सूरज की पीताभ चादर परसोई हुई थी.जब आँख खुलीतो वहएक जामुनी फूल बन गई...
View Articleकविता क्यों और कैसे पढ़ें? : रामेश्वर राय
कविता क्या है के साथ-साथ कविता क्यों और कैसे पढ़े भी साहित्य के बड़े सवाल हैं. ख़ासकर विमर्शों द्वारा उनके अनुकूलन और व्याख्या/दुर्व्याख्या के इस दौर में यह और प्रासंगिक बनते जा रहें हैं. क्या उन्हें हम...
View Articleमैनेजर पाण्डेय : शब्द, साधना और आलोचना : सुधि शंकर
वरिष्ठ आलोचक प्रो. मैनेजर पाण्डेय आगामी २३ सितम्बर को अपने जीवन के अस्सी वर्ष पूरे करने वाले हैं. आलोचक के रूप में वह हिंदी आलोचना में पिछले पांच दशकों से सक्रिय हैं और विचारोत्तेजक बने हुए हैं. अनुभव...
View Articleजननायक कृष्ण : वीरेन्द्र सारंग
जननायक कृष्णवीरेन्द्र सारंगराजकमल प्रकाशन प्रा. लि.१-बी नेताजी सुभाष मार्ग, दरियागंजनई दिल्ली - ११०००२संस्करण : २०१९मूल्य : २९९ (पेपरबैक) वीरेन्द्र सारंग का यह नया उपन्यास इस मायने में महत्त्वपूर्ण है...
View Articleराहत इंदौरी : एक ख़ुद्दार शायर : मोहसिन ख़ान
फोटो : तनवीर फारूकी (साभार : आशुतोष दुबे )राहत इंदौरी : एक ख़ुद्दार शायर मोहसिन ख़ानराहत इंदौरी अदब की दुनिया में तरक्कीपसंद शायरों में शुमार होते हैं. उनकी ग़ज़लें...
View Articleफराओ और बुद्ध : दीपक जायसवाल
फराओ और बुद्ध दीपक जायसवालमिस्र के फराओअपने ऐश्वर्य को बनाए रखने के लिएमृत्यु के बाद की दुनिया के लिए भीसोने चाँदी अपने क़ब्रों में साथ ले गएदफ़नाएँ गये हज़ारों-हजार...
View Articleतुलसी का आत्मसंघर्ष और कवितावली : प्रेमकुमार मणि
गोस्वामी तुलसीदास के इर्द-गिर्द भक्ति/धर्म/अस्मिता का ऐसा प्रभा मंडल तैयार किया गया है कि कवि तुलसी अलक्षित रह जाते हैं. हम भूल जाते हैं कि उनका जीवन कवि का था जो कठिन आत्म और बाह्य संघर्ष से होता हुआ...
View Articleबटरोही : हम तीन थोकदार (आठ )
शैलेश मटियानी बीहड़ अनुभव के कथाकार थे,ख़ासकर पहाड़ के दुर्गम और अलक्षित जीवन और संवेदना के. आंचलिकता में वह रेणु के समानांतर थे. लेखन भी उनका विस्तृत था. उनका खुद का जीवन अत्यन्त संघर्षमय था, सामाजिक और...
View Articleसाल का सातवाँ गहन : अम्बर पाण्डेय
photo by AshrafulArefinअम्बर पाण्डेय की कहानियां इधर आप पढ़ रहें हैं. अम्बर अपने को तरह-तरह से अनेक विधाओं में अभिव्यक्त कर रहें हैं. यह कहानी उनकी पिछली कहानियों के बनिस्बत आकार में छोटी है, भाषा और...
View Articleसमकालीन हिंदी कविता ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य ( ओम निश्चल) : शुभा श्रीवास्तव
प्रसिद्ध लेखक-आलोचक ओम निश्चल की इसी वर्ष प्रकाशित ‘आलोचनानुशीलन’ की पुस्तक ‘समकालीन हिंदी कविता ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (1980 -2020) विजय बुक प्रकाशक से छपी है जो हिंदी कविता के सदी के अंतिम बीस वर्षों...
View Articleपंडित जसराज : अमूर्तन का आलाप : रंजना मिश्रा
गन्धर्व रसराज-जसराजअमूर्तन का आ ला प रंजना मिश्राकुछ उपस्थितियाँ अपनी अनुपस्थिति में अधिक मुखर होती हैं.कितने बिम्ब, कितनी छवियाँ, कितने चित्र, कितने आलाप, कितना संगीत...
View Articleउस्ताद के क़िस्से मेरे हिस्से (चार) : विवेक टेंबे
प्रसिद्ध चित्रकार जगदीश स्वामीनाथन के शिष्य विवेक टेंबे के संस्मरण के इस हिस्से में आप अम्बादास से उनकी मुलाक़ात का रोचक प्रसंग पढ़ेंगे.जगदीश स्वामीनाथनउस्ताद के क़िस्से मेरे हिस्से (चार)...
View Articleपहल का कहानी विशेषांक : सूरज पालीवाल
हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता में ज्ञानरंजन द्वारा संपादित ‘पहल’ का योगदान शानदार है, वह कई दशकों से साहित्य और विचार की महत्वपूर्ण पत्रिका बनी हुई है. इस विकट समय में भी इसका कहानियों पर केंद्रित...
View Articleमैं और मेरी कविताएँ (९) : अनुराधा सिंह
“To be a poet is a condition, not a profession.” Robert Gravesसमकालीन महत्वपूर्ण कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत आपने निम्न कवियों की कविताएं पढ़ीं और जाना कि वे कविताएं क्यों...
View Articleराजा, जंगल और काला चाँद (तरुण भटनागर) : उमेश गोंहजे
कथाकार तरुण भटनागर का उपन्यास, ‘राजा,जंगल,और काला चाँद’ आधार प्रकाशन से २०१९ में प्रकाशित हुआ था, जो ४१ अध्यायों में विभक्त है. इनके नाम दिलचस्प और मानीख़ेज़ हैं जैसे- राजा जो मरना नहीं चाहता था,चौराहे...
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