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Channel: समालोचन
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पहली चीज : उम्बर्तो एको (अनुवाद - जितेन्द्र भाटिया)

आई.आई.टी से केमिकल इंजीनियरिंग में पीएच.डी जितेन्द्र भाटिया (जन्म : १९४६) के विदेशी भाषाओं के अनुवाद ‘सोचो साथ क्या जाएगा’ स्तम्भ के अंतर्गत बरसों बरस कथादेश में प्रकाशित होकर अपार लोकप्रिय हुए. विश्व...

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बातन के ठाठ : ज्ञान चंद बागड़ी

‘कथाकार ज्ञानचंद बागड़ी की कहानी 'बातन के ठाठ'एक पिछड़े समाज में स्त्री की नियति और संघर्ष की अद्भुत दास्तान है. राजस्थान के एक पिछड़े समुदाय में किस तरह एक अनपढ़ स्त्री अपने पति की मृत्यु के बाद सामाजिक...

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पुरुषार्थवती देवी एवं रामेश्वरी देवी गोयल: सुजीत कुमार सिंह

पुरुषार्थवती देवी एवं रामेश्वरी देवी गोयलआज रो-रोकर सुनाऊँगी, व्यथा की मैं कहानी                 सुजीत कुमार सिंह बीते दस साल में तमाम साहित्यकारों के शताब्दी वर्ष धूमधाम से मनाये गए. लेखक संगठनों ने...

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श्रीविलास सिंह की कविताएँ

श्रीविलास सिंह की कुछ कविताएँ _______________________________________१.  कविता की समझकविता की समझबहुत धीरे-धीरे आयीपर यह बहुत जल्दी आ गया समझ मेंकि कविता नहीं है सिर्फशब्दों का जोड़ भर,गणित की तरह किदो...

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अखिलेश का रंग-रहस्य तथा कविताएँ : राकेश श्रीमाल

प्रसिद्ध चित्रकार अखिलेश (जन्म : २८ अगस्त, १९५६) हिंदी के समर्थ लेखक और अनुवादक भी हैं. मक़बूल फ़िदा हुसैन की जीवनी, मार्क शगाल की आत्मकथा का अनुवाद, तथा ‘अचम्भे का रोना’,‘दरसपोथी’,‘शीर्षक नहीं’ और...

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रवीन्द्र के. दास की कविताएँ

Sculpturebyjesús Curiá.रवीन्द्र के. दास का पहला कविता संग्रह, ‘मुखौटा जो चेहरे से चिपक गया है’ २०१५ में प्रकाशित हुआ था. उनके चार कविता संग्रह तथा संस्कृत के ‘मेघदूतम्’ का ‘सुनो मेघ तुम’ शीर्षक से...

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ईरान में किताबों पर सेंसरशिप : यादवेन्द्र

ईरान में किताबों पर सेंसरशिप                        यादवेन्द्रक्या बुलबुल ने गाने की इजाजत कभी माँगी है?                                                          1979 की क्रांति ईरान के सांस्कृतिक...

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हम तीन थोकदार (नौ) : बटरोही

हिंदी के वरिष्ठ कथाकार बटरोही के ‘हम तीन थोकदार’ की नौवीं क़िस्त प्रसिद्ध लेखिका शिवानी और उनके कथा-संसार के इर्दगिर्द है. हिंदी साहित्य को बड़े पाठक वर्ग से जोड़ने में शिवानी (१९२३-२००३) का अहम योगदान...

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भाष्य : शमशेर की “टूटी हुई, बिखरी हुई” : सदाशिव श्रोत्रिय

By Matteo Baroni‘हो चुकी जब ख़त्‍म अपनी जिंदगी की दास्ताँउनकी फ़रमाइश हुई है, इसको दोबारा कहें.’(शमशेर)प्रेम की तीव्रता, सघनता और गहन एन्द्रियता के मार्क्सवादी कवि शमशेर बहादुर सिंह की महत्वपूर्ण कविता...

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मार्क्स की मूँछ से बाल झड़ रहे हैं : संतोष अर्श

युवा आलोचक संतोष अर्श  के कुछ आलेख और नरेश सक्सेना, उदय प्रकाश, निर्मला पुतुल आदि से बातचीत आपने यहीं समालोचन पर पढ़ी है. जल्दी ही कथाकार रणेंद्र से संतोष अर्श का संवाद आप पढ़ेंगे. संतोष अर्श  कविताएँ भी...

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शिवदयाल की कविताएँ

कथाकार, उपन्यासकार, निबंधकार  शिवदयाल कविताएँ भी लिखते हैं. उनकी कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं.  अलग शिल्प और आस्वाद की ये कविताएँ प्रभावित करती हैं.शिवदयाल की कविताएँ...

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पुरस्कार वापसी के पांच साल : आशुतोष भारद्वाज

पाँच साल पहले आज ही के दिन एमएम कलाबुर्गी की हत्या के विरोध में उदय प्रकाश ने साहित्य अकादेमी पुरस्कार लौटाया था और तब यह एक आंदोलन में बदल गया. लेखकीय ज़िम्मेदारी और गरिमा के ऐसे उदाहरण विश्व में बहुत...

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रज़ा : जैसा मैंने देखा (१) : अखिलेश

समालोचन प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा (२२ फरवरी,१९२२–२३ जुलाई, २०१६) पर आधारित श्रृंखला ‘रज़ा : जैसा मैंने देखा’ शुरू कर रहा है. चित्रकार और लेखक अखिलेश का यह  स्तम्भ रज़ा के साथ-साथ भारतीय आधुनिक...

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बाड़मेर तुम साथ चले आये हो : प्रतिभा कटियार

प्रतिभा कटियार संवेदनशील कवयित्री हैं और यात्राओं की शौक़ीन. अभी हाल ही में उनकी क़िताब ‘मारीना : रूस की महान कवयित्री मारीना त्स्वेतायेवा का युग और जीवन’ प्रकाशित हुई है. समालोचन पर ही उनका एक...

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उस्ताद के क़िस्से मेरे हिस्से (पांच) : विवेक टेंबे

जगदीश स्वामीनाथनउस्ताद के क़िस्से मेरे हिस्से (पांच)               विवेक टेंबेललित कला का समर कैम्प       दूसरे दिन गढी स्टूडियो में मेला सा लगा हुआ था. सबसे ज्यादा भीड़ ग्राफिक स्टूडियो में ही थी. कुछ...

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कैरोलिना मारिया दे जीसस : कचरे में जीवन : (अनुवाद सुरेश सलिल)

illustration: Juliana Barbosaकचरा बीनने वाली अश्वेत कैरोलिना मारिया दे जीसस की डायरी १९६० में प्रकाशित हुई थी और आज विश्व साहित्य में उसकी अपनी ख़ास जगह है. हो सकता है अब ब्राजील में कोई कूड़ा बीनने वाली...

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उस्ताद अब्दुल करीम खाँ और किराना घराना : पंकज पराशर

(उस्ताद अब्दुल करीम खाँ)उस्ताद अब्दुल करीम खाँ और किराना घराना        पंकज पराशरसंगीत की मशहूर कंपनी 'हिज़ मास्टर्स वॉयस'के इन तीन शब्दों के साथ ग्रामोफोन में मुँह लगाए एक कुत्ते को संगीत सुनते हुए...

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कथा - गाथा : मुण्डक : प्रचण्ड प्रवीर

“प्रचण्ड प्रवीर हिंदी कहानी के इतिहास में सबसे बीहड़ प्रतिभा है. यही देखना है कि वह कहाँ पहुँचकर पूरा ''वयस्क'' होता है. उसे पढ़ना आसान नहीं है. वह अपनी हर कहानी में अपने और अपने पाठकों के लिए ऊँची और...

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राष्ट्र, हिंदी और बहुभाषिकता : रमाशंकर सिंह

किसी भी सम्प्रभु राष्ट्र की अपनी राष्ट्र भाषा होती है/होनी चाहिए. यह पश्चिम में विकसित राष्ट्र-राज्य की मूल अवधारणाओं में से एक थी. हिंदी (हिन्दुस्तानी) अपने को अपनी व्यापकता के कारण इसके लिए उपयुक्त...

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राजेन्द्र राजन की दस कविताएँ

कवि के लिए कितना कुछ है देखने के लिए, कहने के लिए. कभी-कभी वह एक भीगते चित्र से कविता तराश लेता है. प्रशस्ति-गायकों के बीच महाराज की असलियत भी उससे छुपी नहीं है. वह अपने अंदर की बड़बड़ाहट को सुनता है....

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