मीडिया का मानचित्र: अरविंद दास
पत्रकार अरविंद दास हिंदी में मीडिया के सरोकारों को समझने और उसपर लिखने वाले लेखक हैं. ‘अनुज्ञा बुक्स’ से उनकी इसी विषय पर नयी पुस्तक आ रही है- ‘मीडिया का मानचित्र’.पूंजी, मीडिया और सत्ता का गठजोड़...
View Article‘लो सँभालो अपनी दुनिया हम चले’: पंकज चौधरी
स्मरण पत्र ‘लो सँभालो अपनी दुनिया हम चले’ पंकज चौधरी १.शंख घोषPicture by Pradip Duttaबांग्ला कवि शंख घोष का जन्म 06 फरवरी,1932 को बांग्लादेश के चांदपुर में...
View Articleमुझे किसी पर विश्वास नहीं रहा: कुमार अम्बुज
साहित्य अपने काल में धंस कर लिखा जाता है और अगर उसमें दम होगा तो वह अपने काल को पार करके कालजयी बनेगा. जैसा समय है उसमें अगर आपमें सत्ताओं और संस्थाओं को लेकर संशय नहीं है तो आप अपना विवेक और...
View Articleराधाकृष्ण: एक लाख सतानब्बे हजार आठ सौ अट्ठासी
‘यदि हिंदी के उत्कृष्ट कथा-शिल्पियों की संख्या काट-छाँटकर पाँच भी कर दी जाए, तो उनमें एक नाम राधाकृष्ण का होगा.’प्रेमचंदइस अकाल बेला में हिंदी के कथाकार राधाकृष्ण की याद उमड़ी है, हैजा महामारी में हो...
View Articleजम्प कट: अविनाश
जम्प कट अविनाश एकआधी-अधूरी उदास कमरे में फर्श पर बिछी हुई वह, अपने खाली पड़े स्मृति-फाँकों को अंतहीन मौन से भरने का...
View Articleलालबहादुर वर्मा: आखिरी पड़ाव और भविष्य में छलांग: विनोद शाही
लालबहादुर वर्माआखिरी पड़ाव और भविष्य में छलांगविनोद शाही यह काम उनके अलावा शायद और कोई नहीं कर सकता था. मैं पिछले दस बारह बरस से उनके पीछे पड़ा था. जब भी बात होती उन्हें याद दिलाता. मैं उन्हें याद...
View Articleसुन्दरलाल बहुगुणा: पर्यावरणवादी का परिवार: प्रज्ञा पाठक
गाँधीवादी और प्रसिद्ध पर्यावरणवादी सुन्दरलाल बहुगुणा जैसे लोग सदियों में तैयार होते हैं, उनपर किसी भी समाज और देश को गर्व होना चाहिए. इस कोरोना और उपचार की असहायता के बीच वो भी हमसे हमेशा-हमेशा के लिए...
View Articleआवाज़ को आवाज़ न थी (पारुल पुखराज): अनिरुद्ध उमट
प्रयोगधर्मी आख्यान- ‘नींद नहीं जाग नहीं’ के बाद कवि अनिरुद्ध उमट की क़िताब ‘वैदानुराग’ इधर प्रकाशित हुई है. उमट आत्मीय और संवेदनशील गद्य लिखते हैं. अनिरुद्ध उमट का कवयित्री पारुल पुखराज की डायरी ‘आवाज़...
View Articleबाकी बचे कुछ लोग (अनिल करमेले): कैलाश बनवासी
अनिल करमेले अपनी कल्पनाशील कविता पोस्टरों से आजकल दिन की शुरुआत करते हैं,कविता को उसके पाठकों तक पहुंचाने का यह भी सार्थक उद्यम है. उनका कविता-संग्रह ‘बाकी बचे कुछ लोग’ पिछले बरस सेतु प्रकाशन से आया...
View Articleदेवेंद्र सत्यार्थी: प्रकाश मनु का संस्मरण और कहानी कुंग पोश
स्वाधीनता-संघर्ष की चेतना ने अलक्षित क्षेत्रों में जाने की प्रेरणा बहुतों को दी थी,अनेक व्यक्तित्व साहित्य और समाज की तरफ नयी ऊर्जा और दृष्टि के साथ लौटे, देवेंद्र सत्यार्थी उन्हीं में से एक थे. उनका...
View Articleवंशी माहेश्वरी की कविताएँ
वंशी माहेश्वरी को विश्व कविता के अनुवाद की पत्रिका ‘तनाव’ के कारण हिंदी समाज जानता है, मध्य प्रदेश के कस्बे पिपरिया से वह इसका १९७२ से संपादन और प्रकाशन करते रहें हैं. रज़ा फाउंडेशन ने इसे संरक्षित और...
View Articleमसीह अलीनेजाद: ईरान मे स्त्री की स्वाधीनता का सवाल: प्रीति चौधरी
मसीह अलीनेजादईरान मे स्त्री की स्वाधीनता का सवाल प्रीति चौधरी कोविड के कहर से जुड़ी खबरों ने लगातार विचलित किए रखा,लोगों के लिए जो कर सकती थी उसे करने की सामर्थ्य भर कोशिश भी की पर वो नाकाफ़ी रहा....
View Articleभुलाने के लिए लिखना: सुभाष गाताडे
भुलाने के लिए लिखनासुभाष गाताडे ‘ऐसा नहीं है कि हम युवा वयस्कों के लिए यहां श्रद्धांजलि पेश कर रहे हैं, ... मैंने इतने सारे युवाओं का खून बहते देखा है कि मैं अब उसी में डूब रहा हूं और सांस नहीं ले पा...
View Articleमीरां: विमर्श के नए दौर में: रेणु व्यास
मीरां : विमर्श के नए दौर मेंरेणु व्यास सदियों तक भारत समेत एशियाई देशों पर औपनिवेशिक इतिहास-दृष्टि हावी रही. भारत में स्वाधीनता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय इतिहास दृष्टि विकसित हुई. आज़ादी के बाद भी...
View Articleविशाखा मुलमुले की कविताएँ
ये कविताएँ जल के आस-पास केंद्रित हैं, इनमें कविता का अपना पानी भी है. एक विषय पर टिक कर उसे तरह-तरह से देखना, उसे अलग-अलग रचने का यह सृजनात्मक उद्यम ध्यान खींचता है.कविताएँ प्रस्तुत हैंविशाखा मुलमुले...
View Articleमीरां: विमर्श के नए दौर में: रेणु व्यास
मीरां : विमर्श के नए दौर मेंरेणु व्यास सदियों तक भारत समेत एशियाई देशों पर औपनिवेशिक इतिहास-दृष्टि हावी रही. भारत में स्वाधीनता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय इतिहास दृष्टि विकसित हुई. आज़ादी के बाद भी...
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ये कविताएँ जल के आस-पास केंद्रित हैं, इनमें कविता का अपना पानी भी है. एक विषय पर टिक कर उसे तरह-तरह से देखना, उसे अलग-अलग रचने का यह सृजनात्मक उद्यम ध्यान खींचता है.कविताएँ प्रस्तुत हैंविशाखा मुलमुले...
View Articleमीरां: विमर्श के नए दौर में: रेणु व्यास
आलोचक-अध्येता माधव हाड़ा की चर्चित कृति ‘मीरां का जीवन और समाज’ का अंग्रेजी अनुवाद ‘Meera vs Meera’ शीर्षक से प्रदीप त्रिखा ने किया है जिसे वाणी ने प्रकाशित किया है. इसकी समीक्षा कर रहीं हैं रेणु व्यास....
View Articleजोहड़ और पचबीर बाबा: ज्ञान चंद बागड़ी
जोहड़ (पीथलाना,चूरू जिला), साभार: दिव्या खांडल ज्ञान चंद बागड़ी का उपन्यास ‘आखिरी गाँव’ वाणी ने अभी पिछले वर्ष ही प्रकाशित किया है,उनकी एक कहानी ‘बातन के ठाठ’ समालोचन छपी और पसंद की गयी थी. इधर वह अपने...
View Articleकाली बरसात: मसुजी इबुसे (अनुवाद: यादवेंद्र )
वरिष्ठ लेखक और अनुवादक यादवेन्द्र विश्व साहित्य से नायब पृष्ठों को अनूदित कर हिंदी के पाठकों के समक्ष सृजन और विचारों के नये आयाम प्रस्तुत करते रहते हैं. कोरोना ने भयानक नरसंहार किया जो उससे बच गये वो...
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