समलैंगिकता, सेक्सुअलिटी और सिनेमा: आशीष कुमार
'खामोशी से मुकम्मल होती इबारतों की सुर्ख-स्याह तस्वीरें'(सेल्यूलाइड पर खामोशी, गुमनामियत और दर्द के लकीरों की पहचान और शिनाख्त की सरहदें)आशीष कुमार कहते हैं, ख्वाहिशों के काफ़िले इंसान की ज़मीर से...
View Articleसूर्यास्त सूक्त: विनय कुमार
Painting by Wendy-Puerto विनय कुमार की सूर्योदय श्रृंखला की कुछ कविताएँ आपने समालोचन पर नवम्बर २०२० में पढ़ी थीं, आज सूर्यास्त श्रृंखला की कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं. कवि और कलाकार ही हैं जो उगते सूरज...
View Articleछायाकार अशोक माहेश्वरी: एक अलक्षित यात्रा का खण्डित वृत्तांत: अशोक अग्रवाल
वरिष्ठ कथाकार अशोक अग्रवाल इधर संस्मरण लिख रहें हैं और क्या खूब लिख रहें हैं. कुछ दिन पहले ही कथाकार-कवि जितेन्द्र कुमार पर इनका लिखा संस्मरण आपने पढ़ा था.छायाकार अशोक माहेश्वरी को ज्यादा लोग संभव है...
View Articleअज्ञेय: ओ नि:संग ममेतर: सदाशिव श्रोत्रिय
भाष्यअज्ञेय : ओ नि:संग ममेतरसदाशिव श्रोत्रिय यह किंचित आश्चर्यजनक है कि अज्ञेय की इस कविता की चर्चा उनके साहित्य के प्रसंग में बहुत कम हुई जबकि मैं इसे उनकी एक सशक्त और अनूठी कृति के रूप में देखता...
View Articleहरीश त्रिवेदी: कविता
विश्व के अग्रिम पंक्ति के आलोचक-अध्येता प्रो. हरीश त्रिवेदी का कविता लिखना और समालोचन में उसका प्रकाशित होना विश्व-साहित्य की घटना है, ठीक उसी तरह जैसे अगर Terry Eagletonकहें कि उन्होंने कविता लिखी है...
View Articleरामचन्द्र गाँधी: वह आवाज़ और कुछ पेंसिलें: आशुतोष भारद्वाज
प्रसिद्ध दार्शनिक और महात्मा गाँधी के पौत्र रामचंद्र गांधी (9 जून, 1937-13 जून, 2007) ने ऑक्सफ़ोर्ड से पीटर स्ट्रॉसन के निर्देशन में दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी,देश विदेश के कई...
View Articleरघुवीर स्मृति: अर्पण कुमार
मैथ्यू अर्नाल्ड ने कहा था, ‘कविता, जीवन की आलोचना है.’ कहा जा सकता है कि रघुवीर सहाय ने जीवन भर अपनी कविताओं में यही किया. जीवन की विभिन्न विसंगतियों को वे बड़े व्यंजक रूप में और कारुणिक प्रभाव के साथ...
View Articleनागरी प्रचारिणी सभा: उमस के बीच इंद्रधनुष: विनोद तिवारी
साहित्य की दुनिया में संस्थाओं का बहुत महत्व होता है. हिंदी भाषा और उसके साहित्य में ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ की केन्द्रीय भूमिका रही है. इसके निर्माण और देय की गौरव गाथा आप जानते हैं, कुछ ज़िक्र इस आलेख...
View Articleटी. एस. एलियट की तीन कविताएं: अनूप सेठी
‘इस तरह खत्म होती है दुनियाधमाके से नहीं रिरियाहट से.’ नोबेल पुरस्कार प्राप्त- कवि,आलोचक,नाटककार और संपादक टी एस एलियट (1888–1965) ने विश्व साहित्य को गहरे प्रभावित किया है,हिंदी में अज्ञेय उनसे...
View Articleरामविलास शर्मा: धर्म,राष्ट्र और फासीवाद: रविभूषण
राज्य और धर्म का पुराना गठजोड़ रहा है,दोनों एक दूसरे के काम आते थे. कुल मिलाकर यह गठजोड़ जनता के हितों की रक्षा, और तार्किक चेतना के प्रसार में बाधक था. धर्म के लिए और तो कभी इसके नाम पर अंतहीन बर्बर...
View Articleअनल पाखी: नामवर सिंह की जीवनी(अंकित नरवाल): केवल कुमार
२०२० में अंकित नरवाल (जन्म: ६ अगस्त १९९०) को ‘यू आर अनन्तमूर्ति: प्रतिरोध का विकल्प’ पुस्तक के लिए साहित्य अकादेमी का युवा पुरस्कार मिला था,इस वर्ष आधार प्रकाशन से ‘अनल पाखी: नामवर सिंह की जीवनी’...
View Articleमहेश आलोक की कविताएँ
उम्र पकने के साथ-साथ प्रेम भी परिपक्व होता चलता है, वह देह से कम देखभाल में ज्यादा प्रकट होता है. वृद्ध जोड़ो की प्रेम कविताएं हिंदी में इतनी कम लिखी गयीं हैं कि एक संग्रह बनाना चाहें तो मुश्किल...
View Articleगौतम कुमार सागर की कुछ मुकरियाँ
मुकरी काव्य की पुरानी विद्या है,अमीर खुसरों ने इन्हीं मुकरियों से हिंदी का रास्ता तैयार किया था, जो खड़ी बोली हिंदी की प्रकृति के निकट थीं,आज भी उन्हें पढ़ा समझा जा सकता है. उस रास्ते के झाड़ झंखाड़ जब...
View Articleकबीर: 'पीव क्यूं बौरी मिलहि उधारा': सदानन्द शाही
सदानन्द शाही का इधर रैदास बानी का काव्यान्त्रण ‘मेरे राम का रंग मजीठ है’ प्रकाशित हुआ है. गोरख,कबीर,रैदास उनके रूचि के विषय हैं.कबीर को सम्बोधित उन्होंने कविताएँ भी लिखीं हैं और उनके पदों को...
View Articleऋत्विक घटक की कहानियाँ : चंद्रकिरण राठी और श्रद्धा श्रीवास्तव
अनुवादक की ओर से सन् 1970 की सर्दियों में हम बिहार के सांसद श्री भोला प्रसाद के फ़्लैट नंबर 166 साउथ एवेन्यू में रह रहे थे. वह फ़्लैट हमें मेरे पति गिरधर राठी के ‘जनयुग’ साप्ताहिक में काम करने की वजह...
View Articleबीहू आनंद की कविताएँ
बीहू आनंद अभी सोलह साल की हैं,दसवीं में पढ़ती हैं,कविताएँ लिखती हैं,चित्र बनाती हैं,नाटकों में भाग लेती हैं. जीवन से भरी हुई हैं. पर कुछ ऐसा भी है जिसे नहीं होना था- स्वास्थ्य की एक ऐसी जटिलता में वह...
View Articleदरविश की ग़ज़ल
कवयित्री बाबुषा ने दरविश की ग़ज़लों की तरफ ध्यान खींचा तो महसूस हुआ कि कुछ बात तो है इस शायर में. ग़ज़लें और शेर इतने लोकप्रिय हैं कि इसकी कीमत इस विधा को भी चुकानी पड़ी है. आप पांच ठीक-ठाक ग़ज़लें लिखकर...
View Articleआख्यान-प्रतिआख्यान (3): सहेला रे (मृणाल पाण्डे): राकेश बिहारी
कथाकार-आलोचक राकेश बिहारी की इस सदी की कहानियों की विवेचना की श्रृंखला ‘भूमंडलोत्तर कहानी’ समालोचन पर छपी और यह क़िताब के रूप में आधार प्रकाशन से प्रकाशित हुई है. इधर वह २१वीं सदी के उपन्यासों पर...
View Articleतनुज सोलंकी: कहानी लिखने की कला: (अनुवाद: भारतभूषण तिवारी)
भारतीय अंग्रेजी कथा-साहित्य में तनुज सोलंकी युवा प्रतिभा हैं, उन्हें उनकी कहानियों के लिए साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मिल चुका है.यह कहानी आकार में छोटी है पर असर इसका गहरा है, सिस्टम में फंसे व्यक्ति...
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