किसान आंदोलन: सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आयाम : लाल बहादुर...
किसी भी आंदोलन के क्रांतिकारी होने के लिए जरूरी है कि वह आमूल परिवर्तन उपस्थित करे, सामाजिक,आर्थिक,राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलाव लाये. दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का यह आंदोलन अनवरत है और अब अखिल भी....
View Articleमोहम्मद रफ़ी की संघर्ष-गाथा: रोहित कौशिक
मोहम्मद रफ़ी पर यह शानदार क़िताब अंग्रेजी में राजू कोरती और धीरेंद्र जैन ने लिखी है जिसे प्रामाणिक जीवनी कहा जा सकता है इसमें शोध के साथ उनके ७००० गाये गीतों को भी ध्यान में रखा गया है, जिसे सुंदर ढंग से...
View Articleअब्बास कैरोस्तमी: सिनेमा का कवि: यादवेंद्र
अब्बास कैरोस्तमी को ईरान का आधुनिक सूफी कहा गया जिसके रंग उनकी फिल्मों में बिखरें हैं, पाबंदियों के बीच आज़ाद.लेखक-अनुवादक यादवेंद्र ने उनके व्यक्तित्व के कुछ आयाम यहाँ प्रस्तुत किये हैं और उनकी फ़िल्म...
View ArticleBetrayed By Hope :पत्रों में माइकल मधुसूदन दत्त: रेखा सेठी
Betrayed By Hopeपत्रों में माइकल मधुसूदन दत्तसाहस और अवसाद का घनीभूत द्वन्द्व रेखा सेठी वर्ष 2020 की महामारी और निराशा के...
View Articleजितेंद्र कुमार: खुद अपना एक दिलचस्प अपयश: अशोक अग्रवाल
जितेन्द्र कुमार (1936-2006) ने कहानियां लिखीं,कविताएँ लिखीं और एक लेखक का जीवन जिया. वे जब थे तब उन्हें विस्मय से देखा जाता था, आज उन्हें पढ़ते हुए अचरज होता है- कैसे लेखक धीरे-धीरे नेपथ्य में चले जाते...
View Articleक्या हो बच्चे का धर्म ? सुभाष गाताडे
बच्चे का जन्म लेना जैविक क्रिया है लेकिन उसका धार्मिक बनना सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें उसका कोई दखल नहीं होता है. अक्सर माँ-पिता के धर्म ही बच्चे के धर्म हो जाते हैं. पर अगर माता पिता दोनों अलग धर्मों...
View Articleविशाखा मुलमुले की कविताएँ
ये कविताएँ जल के आस-पास केंद्रित हैं, इनमें कविता का अपना पानी भी है. एक विषय पर टिक कर उसे तरह-तरह से देखना, उसे अलग-अलग रचने का यह सृजनात्मक उद्यम ध्यान खींचता है.कविताएँ प्रस्तुत हैंविशाखा मुलमुले...
View Articleदयाशंकर शरण की कविताएं
दयाशंकर शरण वरिष्ठ पीढ़ी के रचनाकार हैं,इधर उन्होंने नयी पीढ़ी से गज़ब का रचनात्मक संवाद स्थापित किया है,शायद ही कोई लेखक हो जिसको वह पढ़ते न हों और अर्थगर्भित टिप्पणियाँ न करते हों.दयाशंकर शरण कविताएँ...
View Articleमैं और मेरी कविताएँ (चौदह): विनोद पदरज
मैं और मेरी कविताएँविनोद पदरज पहली कवितानुमा रचना जो स्मृति में है वह यशपाल की एक कहानी का पद्यानुवाद जैसा कुछ था,एक बचकानी हरकत,तब उम्र थी यही कोई बारह वर्ष. पढ़ने की ललक आठ नौ साल की उम्र से लगी....
View Articleकाँगड़ा चित्रकला: प्रेम की उदात्त कला: शंपा शाह
शिल्पकार शम्पा शाह का लोक और आदिवासी कलाओं पर आधारित लेखन भी महत्वपूर्ण हैं. काँगड़ा चित्र-शैली की विशेषताओं पर यह लेख बारीकी से उसकी विशेषताओं को उद्घाटित करता है.प्रस्तुत है.काँगड़ा चित्रकलाप्रेम की...
View Articleकविता का बदलता बोध: अच्युतानंद मिश्र
कवि-आलोचक अच्युतानंद मिश्र वैचारिक आलोचनात्मक आलेख लिखते रहें हैं,पश्चिमी विचारकों पर उनकी पूरी श्रृंखला है जो समालोचन पर भी है और जो अब ‘बाज़ार के अरण्य में’ (उत्तर-मार्क्सवादी चिंतन पर केंद्रित)...
View Articleपरती परिकथा की पहेली: प्रेमकुमार मणि
फणीश्वरनाथ रेणु (४ मार्च,१९२१-११अप्रैल १९७७) के जन्म-शताब्दी वर्ष में पत्रिकाओं ने उनपर केंद्रित अंक प्रकाशित किये,स्वतंत्र रूप से लगभग हर संभव साहित्य-स्पेस में उनपर लिखा और बोला गया. और यह अभी भी...
View Articleरमेश ऋतंभर की कविताएं
रमेश ऋतंभरकी कविताएँ जीवन के सुख-दुःख की कविताएँ हैं. आसपास जो चल रहा है,उससे वह कविता उठाते हैं. उनकी कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं. रमेश ऋतंभर की कविताएं 1.मृत्यु-दौड़(दारोगा की नौकरी की दौड़ में...
View Articleमोहन कुमार डहेरिया की कविताएँ
कविता में जो जीवन देखते हैं और उसे बदलने का सपना रखते हैं,मोहन कुमार डहेरिया उसी परम्परा के कवि हैं. मोहन की कविताएँ सामाजिक विडम्बनाओं की शिनाख्त करती हैं और जहाँ जरूरी है वहां चोट भी, उनमें विचलित...
View Articleनरसीजी रो माहेरा और उसका साँवरा सेठ: माधव हाड़ा
मोड़ो आयो रे गिरधारी(‘नरसीजी रो माहेरा’ और उसका साँवरा सेठ )माधव हाड़ा राजस्थान-गुजरात में प्रचलित ‘नरसीजी रो माहेरो’ का साँवरा सेठ लोक द्वारा अपने सपनों कामनाओं और ज़रूरतों के अनुसार गढ़ा गया भगवान...
View Articleरघुवीर स्मृति: अर्पण कुमार
मैथ्यू अर्नाल्ड ने कहा था, ‘कविता, जीवन की आलोचना है.’ कहा जा सकता है कि रघुवीर सहाय ने जीवन भर अपनी कविताओं में यही किया. जीवन की विभिन्न विसंगतियों को वे बड़े व्यंजक रूप में और कारुणिक प्रभाव के साथ...
View Articleनया रास्ता (हरे प्रकाश उपाध्याय): राकेश मिश्र
‘खिलाड़ी दोस्त तथा अन्य कविताएँ’ के बारह साल बाद हरे प्रकाश उपाध्याय का यह दूसरा कविता-संग्रह- ‘नया रास्ता’ रश्मि प्रकाशन से छप कर आया है. इसकी चर्चा कर रहें हैं कवि राकेश मिश्र. नया...
View Articleअल्बेयर कामू का उपन्यास और लुईस पुएंजो का सिनेमा ‘द प्लेग’: अमरेन्द्र कुमार...
महामारी की काया में युद्ध की छायाअल्बेयर कामू का उपन्यास और लुईस पुएंजो का सिनेमा ‘द प्लेग’ अमरेन्द्र कुमार शर्मा (‘ क्या अप्रैल इस धरती से विदा लेने का महीना है ?’ –2020 के अप्रैल महीने से कोरोना...
View Articleइज़ाबेल अलेंदे: न्यायाधीश की पत्नी: सुशांत सुप्रिय
इज़ाबेल अलेंदेन्यायाधीश की पत्नी अनुवाद: सुशांत सुप्रिय निकोलस विडल यह बात...
View Article‘लो सँभालो अपनी दुनिया हम चले’: पंकज चौधरी
स्मरण पत्र ‘लो सँभालो अपनी दुनिया हम चले’ पंकज चौधरी १.शंख घोष बांग्ला कवि शंख घोष का जन्म 06 फरवरी,1932 को बांग्लादेश के चांदपुर में हुआ और मृत्यु 20 अप्रैल...
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