सहजि सहजि गुन रमैं : पवन करण
पेंटिग : Rekha Rodwittiya पवन करण २१ वीं सदी की हिंदी कविता के मुख्य स्वरों में हैं. ‘स्त्री मेरे भीतर’ संग्रह का कई भारतीय भाषओं में अनुवाद हुआ है और उनकी स्त्री विषयक कविताओं को लेकर बड़ी ज़ोरदार...
View Articleनिज घर : पिता : अखिलेश
(Painting : “Father” by Gwenn Seemel ) पिता पर लिखना हमेशा से मुश्किल होता है. बाप–बेटे के रिश्ते अहमं के भी होते हैं. पिता अक्सर पुत्रों के लिए पीछे हट जाते हैं. पिता के न रहने पर पुत्र यह पाता है...
View Articleकथा - गाथा : बिकनी में बॉबी : संजीव चंदन
संजीव चंदन जाति और जेंडर के मुद्दे पर लिखते हैं, ‘स्त्रीकाल’ पत्रिका का संपादन करते हैं, कथाकार हैं. यह उनकी नई कहानी है. आधुनिकता के मायने भी पीढ़ियों में बदल जाते हैं. कभी ब्रेक-अप दारुण हुआ करता है...
View Articleमंगलाचार : घनश्याम कुमार देवांश
आज आपके समक्ष प्रस्तुत है युवा कवि घनश्याम कुमार देवांश की कुछ कविताएँ. उन्हें उनकी कविता पाण्डुलिपि 'आकाश में देह' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ का वर्ष 2016 का नवलेखन पुरस्कार मिला है. घनश्याम कुमार...
View Articleमेघ - दूत : अनावृत उरोज : इतैलो कैलविनो
इटली के मशहूर कथाकार Italo Calvino (15 October 1923 – 19 September 1985)के अंतिम उपन्यास Mr. Palomar (1983, tr. William Weaver 1985) के एक अंश ‘the naked bosom’ का यह हिंदी अनुवाद इसके अंग्रेजी अनुवाद...
View Articleकथा - गाथा : राजा जी का बाजा ग़ुम : नीलाक्षी सिंह
२१ वीं सदी के हिंदी कथा-साहित्य में जिन युवा रचनाकारों की पहचान-प्रतिष्ठा बनी है उनमें नीलाक्षी सिंह का नाम प्रमुख है. चार कहानी संग्रह और एक उपन्यास प्रकाशित है.उनकी कहानियों की अपनी धूप-छाँव है, कथा...
View Articleअभिनव मुक्तिबोध : अरुण माहेश्वरी
अभिनवमुक्तिबोध : साहित्यकापुनर्संदर्भीकरण (recontextualisation)अरुणमाहेश्वरी(एक) सिर्फरामचंद्रशुक्ल, हजारीप्रसादद्विवेदी, रामविलासशर्मा, नामवरसिंह, अज्ञेय,...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : परमेश्वर फुंकवाल
(कृति - Mark-Jenkins)परमेश्वर फुंकवाल ने कविता की दुनिया में हालाँकि देर से प्रवेश किया पर अब उन्होंने पिछला सब पूरा कर लिया है. शिल्प और कथ्य दोनों स्तरों पर वह अब ‘समकालीन’ कवि हैं. उनकी कविताओं में...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : महाश्वेता देवी : गरिमा श्रीवास्तव
ऐसा लगता है कि हम नेहरुयुगीन उदारता और आधुनिकता के ख़ात्मे की ओर अग्रसर हैं. सच का कोई और भी पक्ष हो सकता है और उसे सुना जाना चाहिए यह गांधी की सबसे बड़ी मनुष्यता थी. आज सबसे अधिक प्रहार इसी पर हो रहा...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : आशीष बिहानी
(पेंटिग : सेवा : भूपेन खख्खर )"युवा कवि आशीष बिहानी की कविताएँ समकालीन हिंदी काव्य-परिदृश्य में नए-नवेले अहसासों से भरपूर होकर आती हैं.ये कविताएँ 'छटपटाते ब्रह्मांड'की'धूल-धूसरित पनीले स्वप्न'भरी...
View Articleआशुतोष दुबे की कविताएँ
आज विश्व रंगमंच दिवस है, यह प्रतिवर्ष २७ मार्च को मनाया जाता है, इस दिन एक अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संदेश भी दिया जाता है. १९६२ में पहला संदेश फ्रांस केज्यां कोक्तोने दिया था, वर्ष २००२ में यह अवसर भारत...
View Articleसबद भेद : दूसरी परंपरा की खोज : अमरेन्द्र कुमार शर्मा
वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह की १९८२ में प्रकाशित पुस्तक ‘दूसरी परंपरा की खोज’ आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के ‘चिंतन और सृजन में विद्यमान मौलिकता को रेखांकित’ करती है. आचार्य के व्यक्तित्व की ‘उन्मुक्तता’...
View Articleहरे प्रकाश उपाध्याय की कविताएँ
(पेंटिग - Haren Das : Joint Effort)हरे प्रकाश उपाध्याय को आज हम ‘मंतव्य’ के संपादक और ‘बखेड़ापुर’ के उपन्यासकार के तौर पर जानते हैं. पर वह मूलतः कवि हैं उनका पहला कविता संग्रह ‘खिलाड़ी दोस्त और अन्य...
View Articleपरख : ज़िंदगी लाइव (प्रियदर्शन)
प्रियदर्शन NDTV में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. हिंदी के लेखक और कवि हैं. कुछ महत्वपूर्ण कृतियों के अनुवाद भी उनके नाम है - आधी रात की संतानें (सलमान रुश्दी), बहुजन हिताय (अरुंधति रॉय), कत्लगाह...
View Articleहस्तक्षेप : तालिबानी राजनीति के प्रतिरोध की समस्याएं : अरुण माहेश्वरी
क्या आपको नहीं लगता भारतीय समाज गहरे संकट से गुजर रहा है ? एक मनोरोगी की तरह इधर वह व्यवहार कर रहा है. सहिष्णुता और उदारता जैसे मूल्य देखते – देखते अदृश्य हो गए हैं. हर दूसरा आदमी नफ़रत के नशे में झूमता...
View Articleलवली गोस्वामी की कविता : आलाप
लम्बी कविताआ ला पलवली गोस्वामीवांछित का अभाव सारांश है स्मृतियों की किताब का तमाम स्मृतियाँ “विदा”के एक अकेले शब्द की वसीयत हैंहँसती आँखों के सूनेपन में क़ैद हो गए वे यतीम दृश्य जो घट न सके मेरे...
View Articleमेघ - दूत : एक पीला फूल : जूलियो कोर्टाज़ार
प्रसिद्ध लातिन अमेरिकी कथाकार जूलियो कोर्टाज़ार Julio Cortázar (August 26, 1914– February 12, 1984) अपनी चकित करने वाली शैली और कथा के फैंटेसी रुझान के लिए जाने जाते हैं. जीवन के अँधेरे पक्ष और...
View Articleरंग - राग : प्रभाकर बर्वे : अखिलेश
(पेंटिग : प्रभाकर बर्वे)प्रभाकर बर्वे (1936- 1995)प्रसिद्ध प्रतीकवादी अमूर्त चित्रकार प्रभाकर बर्वे ने अपने चाचा मूर्ति शिल्पकार वी. पी. करमारकर और फिल्मों से जुड़े अपने पिता से बहुत कुछ सीखा. जे. जे....
View Articleसबद - भेद : अयोध्या प्रसाद खत्री : राजीव रंजन गिरि
आज यह अविश्वसनीय लग सकता है कि एक समय हिंदी को कविता के लिए उपयुक्त नहीं समझा जाता था. खड़ी बोली हिंदी के पितामह भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने खुद इसका समर्थन और नेतृत्व किया था. ज़ाहिर है किसी भी भाषा के लिए...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : आशीष नैथानी
(फोटोग्राफ : कमल जोशी)लगभग तीन वर्ष पूर्व आशीष नैथानी की कविताएँ समालोचन में प्रकाशित हुईं थीं. कविताएँ अब और परिपक्व हुई हैं उनका ‘लोकल’ अभी भी रचनात्मक बना हुआ है. पहाड़, बर्फ, बुराँस, काफलबार-बार...
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