मीमांसा : हर्बर्ट मार्क्युज़ :अच्युतानंद मिश्र
जर्मन-अमेरिकी दार्शनिक, समाजशास्त्री और राजनीतिक चिंतक हर्बर्ट मार्क्युज़ (Herbert Marcuse, July 19, 1898 – July 29, 1979)फ्रैंकफर्ट स्कूल के सिद्धांतकार माने जाते हैं.मार्क्सवाद से उनका लम्बा सार्थक...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : संतोष अर्श
(गूगल से साभार)संतोष अर्श की कविताओं की तेवर तुर्शी अलग से दिखती है, वे समकालीनता के विद्रूप पर हमलावर हैं, जातिगत विडम्बनाओं पर मुखर हैं. कविता का ढब भी बदलता चलता है जगह –जगह. उन्हीं के शब्दों में...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : 'क'से कविता का एक साल
कविता पाठ का ख़ास आयोजन ‘क’ से कविता उतराखंड में अपनी स्थापना की पहली वर्षगाँठ मना रहा है. इस अवसर पर २३ अप्रैल को देहरादून में विशेष समारोह का आयोजन किया जा रहा है.इस सफर पर प्रतिभा कटियार की टिप्पणी ....
View Articleकथा - गाथा : सुराख़ : प्रज्ञा पाण्डेय
(ASHISH AVIKUNTHAK : ENDNOTE (ANTARAL)एक ट्रेन में एक लड़की से एक अफसर मिलता है उनमें बातें होती हैं और बातों में आकार लेती है यह कहानी. कहानी मार्मिक है. पठनीय है. प्रेम, अलगाव और आत्मनिर्भरता से होकर...
View Articleसविता सिंह के लिए (कविता) : विपिन चौधरी
समकालीन कवियों पर कविताएँ लिखने की रवायत है. शमशेर, नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल त्रिलोचन आदि ने एक दूसरे पर खूब कविताएँ लिखी हैं. सुधीर सक्सेना का एक कविता संग्रह इधर आया था – ‘किताबें दीवार नहीं...
View Articleरंग- राग : पाँचवां अंतर्राष्ट्रीय डाक्यूमेंट्री फेस्टीवल : भास्कर उप्रेती
नैनीताल के समीप नौकुचियाताल में ‘लेक साइड डाक्यूमेंट्री फेस्टीवल’ (एल.डी.एफ.) का आयोजन पिछले कुछ वर्षों से हो रहा है. इस साल 14 से 17 अप्रैल तक आयोजित पाँचवे अंतर्राष्ट्रीय डाक्यूमेंट्री फेस्टीवल में...
View Articleस्वप्निल श्रीवास्तव : सात कविताएँ
(पेंटिग : Anjolie Ela Menon : After the Party : 2017)आज मजदूर दिवस है. हिंदी का साहित्यकार अब भी कलम का मजदूर ही है. वे और भाषाएँ होंगी जिनके लेखक कलम से जी लेते होगे. संसार की कथित सबसे बड़ी भाषा में...
View Articleमेघ - दूत : जिगरी यार : लुइगी पिरांदेलो
(पेंटिग : 3 closefriends : NGUYEN THI CHAU GIANG (Vietnam)इटली के नाटककार, उपन्यासकार, कवि, कथाकार तथा १९३४ के साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित Luigi Pirandello (28 June 1867 – 10 December 1936)...
View Articleमंगलाचार : सोनिया गौड़ (कविताएँ)
(The Music Of Love. This picture was taken in Tenganan Village, Bali (2010). Tenganan is the most famous Bali Aga (original Balinese)village and is located close to CandiDasa in East Bali. A man was...
View Articleसिद्धेश्वर सिंह की कविताएँ
उतराखंड के खटीमा में सिद्धेश्वर सिंह ने कविता की रौशनी बरकरार रखी है. दो संग्रह प्रकाशित हैं, वे विदेशी कविताओं का हिन्दी में लगातार अनुवाद कर रहे हैं. उनकी कविताएँ सुगढ़ हैं और बहुस्तरीय भी. इधर की...
View Articleअन्यत्र : संघ चिठ्ठा : अखिलेश
मशहूर चित्रकार और लेखक अखिलेश १९९७ में भारत महोत्सव के दरमियान मास्को गए थे. ये संस्मरण उसी दौर के दर्द ओ गम बयाँ करते है.महान से महान विचार और आन्दोलन भी जब अपनी आलोचना सुनना बंद कर देते हैं तब भटक...
View Articleपरख : धुँधले अतीत की आहटें
गोपाल माथुर के उपन्यास 'धुँधले अतीत की आहटें'की समीक्षा विमलेश शर्मा की कलम से .अनाम खामोशियों, स्थगित जीवन और निर्वासित मन का राग विमलेश शर्मा अतीत कितना भी धुँधला क्यों ना हो उसकी आहटें अनजानी धमक...
View Articleपरख : आशा बलवती है राजन् : हिमांशु पंड्या
नन्द चतुर्वेदी के अंतिम कविता संग्रह – ‘आशा बलवती है राजन्’ पर हिमांशु पांड्या की यह समीक्षा मन से लिखी गयी है, एक तरह से यह कवि से संवाद है. कवि के अनेक व्यक्तिगत प्रसंग इसे और भी विश्वसनीय बनाते...
View Articleअन्यत्र : संघ चिट्ठा (अंतिम) : अखिलेश
प्रसिद्ध चित्रकार और लेखक अखिलेश सोवियत संघ में १९९६ में भारत कला महोत्सव के आयोजन में शामिल हुए थे. ये संस्मरण उसी दौर के हैं. इसका पहला भाग आप पढ़ चुके हैं. शेष और अंतिम हिस्सा यहाँ दिया जा रहा है....
View Articleपरख : अपना ही देश (मदन कश्यप)
'बन्नी दाई बन्नी दाई मुझे बचाओ मुझे बचाओ मेरी आंखों पर बंधी पट्टी खोलो मेरे अंतस पर जड़ा ताला तोड़ोमेरा पूरा वज़ूद दब रहा है बज्र किवाड़ सेमुझे बचाओ बन्नी दाई ?' अपने ही देश में बेगाने...
View Articleकथा- गाथा : चंद्रेश कुमार छतलानी की लघुकथाएं
(पेंटिग : जनगढ़ सिंह श्याम )चंद्रेश कुमार छतलानी सॉफ्टवेयर डेवलेपर हैं और लघु कथाएं लिखते हैं. उनकी पांच लघुकथाएं आपके लिए.चंद्रेश कुमार छतलानी : लघु कथाएं मौसेरे भाईएक राजनैतिक दल की...
View Articleरंग - राग : जनगढ़ : अखिलेश
आदिवासी कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम निगाता (जापान) शहर के एक छोटे से गाँव में जहाँ वह हासेगावा के साथ रहते थे, एक दिन कमरे में मृत पाए गए. उनके पास उनके बने - अधबने चित्रों के साथ एक्यूट डिप्रेशन की तमाम...
View Articleकथा - गाथा : क़ुर्बान : शहादत ख़ान
यह कहानी बस इतनी है कि क़ुरबानी के लिए बच्चे की तरह पोसे गए बकरे से घर भर को लगाव हो जाता है. जिस अम्मी ने उसे पाला वह बाद में एक माँ की तरह टूट कर बिलखती हैं. विवशता और लगाव के बीच जैसे-जैसे यह कहानी...
View Articleकथा - गाथा : अ स्टिच इन टाइम : सुभाष पंत
पूंजी के वैश्वीकरण ने किस तरह पारम्परिक पेशे और उससे जुड़े समूहों को बर्बाद किया है, इसे समझना हो तो वरिष्ठ कथाकार सुभाष पंत की यह कहानी ‘अ स्टिच इन टाइम’ जरुर पढ़ना चाहिए. ऐसे समूहों की कथा आपको किसी...
View Articleरंग राग : बाहुबली : रवीन्द्र त्रिपाठी
जिन्होंने बाहुबली देख रखी थी उनमें से बहुत बाहुबली- २ देख कर निराश हुए पर जिस निर्मित और नियंत्रित उन्माद में इसे प्रस्तुत किया गया उसने आर्थिक रूप से इसे सफल फ़िल्म सिद्ध कर दिया है. क्या यह समय भव्य...
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