कथा - गाथा : लूट : शहादत ख़ान
समालोचन पर ही प्रकाशित शहादत ख़ान की कहानी ‘क़ुर्बान’ ने पाठकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. भाषा और उसकी कसावट यह दोनों उनके पास हैं. कथा को विकसित करते हुए उसे सार्थक परिणिति तक ले जाने का हुनर वह सीख...
View Articleश्रद्धासुमन : कमल जोशी
यायावर, जीवट से भरे प्रसिद्ध फोटोग्राफर कमल जोशी की आत्महत्या की ख़बर पर यकीन नहीं हो रहा है.उनसे कई मुलाकातें हैं. पहाड़ के जीवन को केंद्र में रखकर लिए गए उनके छाया चित्रों का संसार अद्भुत है. चमकीले...
View Articleमैं कहता आँखिन देखी : सविता सिंह
हिंदी की महत्वपूर्ण कवयित्री सविता सिंह की रचनात्मकता में नारीवाद की भूमिका और इस विमर्श की वर्तमान अर्थवत्ता को लेकर रेखा सेठी ने यह संवाद किया है. संवाद की यह विशेषता होती है कि वह जटिल से जटिल...
View Articleमेघ - दूत : छिपा हुआ निशानची (लायम ओ'फ़्लैहर्टी)
‘छिपा हुआ निशानची’ मशहूर आयरिश लेखक ‘Liam O'Flaherty’ (28 August 1896–7 September 1984) की चर्चित कहानी ‘The Sniper’ का हिंदी अनुवाद है.युद्ध कथाओं में ‘The Sniper’का विशेष स्थान है. आयरलैंड के गृह...
View Articleमेघ -दूत : सॉनेट मंडल : तुषार धवल
युवा कवि सॉनेट मंडल कोलकाता के बाशिंदे हैं और इन्डियन इंग्लिश में कवितायें लिखते हैं. वे Enchanting Verses Literary Review (www.theenchantingverses.org) के मुख्य सम्पादक हैं. सॉनेट की ताज़ा किताब 'इंक...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : कश्मीर तीन साल पहले : यादवेन्द्र
जिन्हें हम आम समझ कहते हैं वे पूर्वग्रहों के गुच्छे ही तो होते हैं. धारणाएं बनती जाती हैं और फिर हम एक समझ विकसित कर लेते हैं. इन धारणाओं के निर्माण में कुछ प्रचारित घटनाएँ, बार–बार प्रस्तुत की जा रहीं...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : मणि मोहन
पेंटिग : Persian painter Parviz Kalantariकविताएँ अपने मन्तव्य तक की यात्रा में कम से कम जगह घेरती हैं. वे कुछ भी अन्यथा लेकर नहीं चलती और कुछ भी अतरिक्त नहीं करती हैं. वे भाषा की मितव्ययिता की चरम हैं....
View Articleसबद - भेद : इक शम्अ है दलील-ए-सहर : अच्युतानंद मिश्र
मुक्तिबोध फिर चर्चा में हैं. उनकी मृत्यु के बाद जो चर्चा चली थी उसमें उन्हें एक बड़े कवि के रूप में पहचाना गया. मुक्तिबोध जयशंकर प्रसाद के बाद दूसरे ऐसे बड़े कवि हैं जिनका गद्य भी मजबूत है. मुक्तिबोध के...
View Articleअनिरुद्ध उमट की नई कविताएँ
पेंटिग : SOMNATH HOREप्रेम और मृत्यु कविताओं के प्रिय पते हैं, ये यहाँ आती - जाती रहती हैं और अक्सर यहीं से पनपती भी हैं. जीवन इन्हीं के बीच पसरा है. एक जिन्दगी से लगाव का चरम है, एक अ – लगाव का...
View Articleमीमांसा : बारुक स्पिनोज़ा : प्रचण्ड प्रवीर
यहूदी मूल के महान डच दार्शनिक Baruch De Spinoza(२४ नवम्बर १६३२ - २१ फ़रवरी १६७७) अपने प्रसिद्ध क्रांतिकारी ग्रन्थ 'Ethics’ (१६७७)के कारण जाने जाते हैं. हिंदी में उनकी चर्चा कहीं-कहीं मिलती है, पर उनकी...
View Articleमोनिका कुमार की कविताएँ
“खुद को ज़िंदा रखने के लिए इतने रतजगों के बाद उसे प्रेम से अधिक नींद की ज़रूरत है.”२१ वीं सदी की हिंदी कविता का युवा चेहरा जिन कवियों से मिलकर बनता है इसमें मोनिका कुमार शामिल हैं. ख़ास बात यह है कि...
View Articleहस्तक्षेप : वैज्ञानिक शोध पत्रिकाएँ हिंदी में क्यों नहीं छपती हैं ? आशीष बिहानी
आशीष बिहानी हिंदी के कवि हैं और ‘कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र’ (CCMB), हैदराबाद में जीव विज्ञान में शोधार्थी हैं.ज़ाहिर है उन्हें हिंदी में वैज्ञानिक शोध पत्रिकाएँ की अनुपलब्धता का अहसास और दर्द...
View Articleअम्बर रंजना पांडे की कविताएँ
सदी (२१ वीं) की हिंदी कविता पर यह आरोप बार-बार दुहराया जाता रहा कि इनमें अधिकतर पिछली सदी के कवियों की नकल हैं और कि खुद इनमें दुहराव है और कि पता नहीं चलता - कौन किसकी कविता है. मतलब - कवियों ने अपने...
View Articleअन्यत्र : कस्बाई औरत की पहली विदेश यात्रा : प्रतिभा कटियार
यात्राएँ मंजिल पर पहुंच कर समाप्त नहीं हो जातीं. दरअसल रास्ते भी यात्राओं में शामिल हैं. और एक यात्रा खुद के अंदर भी चलती रहती है. ख़ासकर अगर कोई भारतीय ब्रिटेन जाए. उसकी विगत स्मृतियाँ भी साथ- साथ...
View Articleबोली हमरी पूरबी : शंख घोष की 10 कविताएँ
बांग्ला कविताओं की अपनी जमीन है, उस में आदिम मनुष्यता की बची हुई जो महक है. प्रेम की लरजती हुई जो लौ है वह अभी बुझी नहीं है. दिक्कत यह है कि इस महक और लौ को आप मूल में ही महसूस कर सकते हैं. पर अगर...
View Articleपरख : पुरुषार्थ, त्याग और स्वराज : मो. क. गाँधी
गांधी मनुष्यता के महात्मा थे.हिंसक वर्चस्व से प्रतिरोध का हिंसारहित असहयोग और अवज्ञा का उनका रास्ता मनुष्यता की उनकी अवधारणा की ही तरह उदात्त है.आज उनके चिन्तन और आख़िरी आदमी की उनकी चिंता पर संगठित...
View Articleनिज घर : मेरा घर कहॉं है ? पिको अय्यर
पिको अय्यर के नाम से ख्यात सिद्धार्थ पिको राघवन अय्यर खुद को विश्व नागरिक मानते हैं, हाँलाकि वे भारतीय मूल के ब्रिटेन में जा बसे अध्यापक माता पिता की संतान हैं.निबंध और यात्रा वृत्तांत लिखने के...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : अंकिता आनंद
युवा अंकिता आनंद की कविताओं के लिए Gigi Scariaकी कृति ‘Shadow of the Ancestors’ को प्रस्तुत करते हुए मैं एक बारगी ठिठक गया. क्या बढियां, अर्थगर्भित शीर्षक है और किस तरह वीराने में पेड़ के तने का एक...
View Articleमीमांसा : स्पिनोज़ा - दर्शन और अनुवाद : प्रत्यूष पुष्कर
कार्टून- डेविड लेविनयहूदी मूल के महान डच दार्शनिक स्पिनोज़ा (२४ नवम्बर १६३२ : २१ फ़रवरी १६७७) की कृतियों का हिन्दी में समुचित अनुवाद हो और सम्बन्धित दार्शनिक प्रत्ययों पर उचित चर्चा हो, समालोचन पर ही...
View Articleनिज घर : प्रतिभाशाली मित्र : प्रचण्ड प्रवीर
(Joan Miro की पेंटिग : Harlequin's Carnival)प्रचण्ड प्रवीर तरह-तरह से साहित्य और विचार को समृद्ध कर रहे हैं. उनका उपन्यास 'अल्पाहारी गृहत्यागी: आई आई टी से पहले', कहानी संग्रह ‘Bhootnath Meets...
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