माया संस्कृति की कविताएँ : यादवेन्द्र
हुम्बरतो अकाबलग्वाटेमाला के प्रमुख कवि हैं जो करीब दस लाख लोगों द्वारा बोली जाने माया मूल की किचे भाषा में लिखते हैं. उनकी कविताओं के अनुवाद अंग्रेजी, फ्रेंच ,जर्मन, इटालियन, स्पैनिश सहित विश्व की कई...
View Articleहिंदी दिवस : आखिर हम कैसी हिंदी चाहते हैं? राहुल राजेश
हिंदी भाषा को लेकर बार-बार दुहराए जाने वाली एक मांग यह भी है कि वह सहज सरल हो. यह ठीक है कि उसे जानबूझकर अबूझ न बनाया जाए. अनावश्यक रूप से उसमें संस्कृत न भर दी जाए, पर जटिल से जटिलतर होते समाज और...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : रुस्तम
कृति : Gigi Scariaकविता में कवि जब खुद की ओर मुडता है तब वह अस्तित्वगत प्रश्नों की तरफ भी जाता है. आख़िरकार इस विश्व में वह क्यों कर है और है तो इस तरह क्यों है ? जैसी विराट व्याकुलताएं उसे सृजनात्मक...
View Articleसबद भेद : देवी प्रसाद मिश्र : मीना बुद्धिराजा
हमने कांग्रेस-जनसंघ-संसोपा-भाजपा-सपा-बसपा-अवामी लीग-लोकदल-राजद-हिंदू महासभा-जमायते इस्लामीवगैरह वगैरह के लोंदों से जो बनायावह भारतीय मनुष्य का फौरी पुतला हैमुझे भूरी-काली मिट्टी का एक और मनुष्य...
View Articleमेघ - दूत : उपवास करने वाला कलाकार : फ़्रैंज़ काफ़्का
१९२२ में प्रकाशित फ़्रैंज़ काफ़्का की कहानी "A Hunger Artist"(German: "Ein Hungerkünstler")काफ़्का की कुछ बेहतरीन कहानियों में से है जिसमें उनका अपना काफ्काई करिश्मा मुखर होकर सामने आया है. इस कहानी...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : प्रत्यूष पुष्कर
Pablo Picasso, Guitar (1913).संगीत से कविता का पुराना नाता है. संगीत ने कविता को स्थायित्व प्रदान किया है. जिन कविताओं को संगीत ने अपना सुर दिया वे अमर हो गयीं, जिन्हें हम ‘पारम्परिक’ कहते हैं दरअसल वे...
View Articleपरख : उपसंहार (काशीनाथ सिंह) : विमलेश शर्मा
उत्तर महाभारत की कृष्ण कथा को आधार बनाकर वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह का उपन्यास ‘उपसंहार’ कृष्ण के मिथकीय अभिप्रायों की नवीन व्याख्याओं के कारण आज भी बहस में है. विमलेश शर्मा ने विस्तार से यहाँ इसकी...
View Articleकथा - गाथा : इमरान भाई : शहादत ख़ान
(कृति : stuart Amos) समाज में हो रहे अच्छे बुरे बदलावों को कला और साहित्य सबसे पहले देखते और दिखाते हैं. खासकर कहानियां जब सन्दर्भ में किसी घटना को रखती हैं तब उस पर ध्यान जाता ही नहीं टिकता भी है....
View Articleमैं कहता आँखिन देखी : निर्मला पुतुल
निर्मला पुतुल से संतोष अर्श के इस संवाद में लेखन प्रक्रिया, वैचारिक संरचना और स्त्री की सामाजिकता (जेंडर) के कई स्तरों की चर्चा है.एक आदिवासी स्त्री के तथाकथित मुख्य धारा से मुठभेड़ के अनुभव हैं.तमाम...
View Articleकथा - गाथा : मन्नत टेलर्स : प्रज्ञा
प्रज्ञासाहित्य का मूल कार्य यह है कि वह तमाम अच्छे–बुरे बदलावों के बीच और उनके तीक्ष्ण–तिक्त प्रभावों के मध्य आम आदमी के पास आता-जाता रहता है. उन्हें देखता, परखता, महसूस करता और लिखता रहता है. उनके...
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी (१४) : मन्नत टेलर्स ( प्रज्ञा) : राकेश बिहारी
राकेश बिहारीसाहित्य का मूल कार्य यह है कि वह तमाम अच्छे–बुरे बदलावों के बीच और उनके तीक्ष्ण–तिक्त प्रभावों के मध्य आम आदमी के पास आता-जाता रहता है. उन्हें देखता, परखता, महसूस करता और लिखता रहता है....
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : तेजी ग्रोवर
(कृति : vipul prajapati)तेजी की कविताओं पर फौरी तौर पर कुछ कहना उस अनुभव को तबाह कर देना है जो इन कविताओं को पढ़ते हुए आप पर तारी होता हैं. इयुजेनियो मोंताले (१८९६-१९८१, इटली) ने ठीक ही कहा है – “महान...
View Articleमीमांसा : फ्रिट्ज लैंग का सिनेमा : प्रचण्ड प्रवीर
सिनेमा और नाट्य शास्त्र के अन्त:सम्बन्धों पर युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर शोध और गम्भीर विवेचना का कार्य कर रहे हैं. इस विषय पर उनकी एक किताब भी प्रकाशित है- ‘अभिनव सिनेमा : रस सिद्धांत के आलोक में विश्व...
View Articleसबद - भेद : प्रेमचंद : अरुण माहेश्वरी
प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८०–८ अक्टूबर १९३६) गुलाम भारत में पैदा हुए और गुलाम भारत में है मर गए पर उनका लेखन आज़ाद था. हर तरह की आज़ादी के लिए उन्होंने संघर्ष किया. परतंत्र भारत में प्रेमचंद ने साम्प्रदायिकता...
View Articleबाज़ार और टेलर मास्टर : नवनीत नीरव
प्रज्ञा की कहानी ‘मन्नत टेलर्स’को केंद्र में रखकर कथा - आलोचक राकेश बिहारी की विवेचना ‘बाज़ार की जरूरत और उसके साइड इफ़ेक्ट्स’ पर नवनीत नीरव की यह टिप्पणी. बाज़ार और टेलर मास्टर...
View Articleमैं कहता आँखिन देखी : प्रो राधावल्लभ त्रिपाठी
संस्कृत भाषा का नाम लेते ही हमारे सामने एक शास्त्रीय पर पुरातनपंथी भाषा आ खड़ी होती है जिससे अब केवल धार्मिक अनुष्ठान भर सम्पन्न होते हैं. हम भूल चुके हैं कि इसमें चार्वाक और अश्वघोष (वज्र-सूची) जैसे...
View Article@ 75 : अमिताभ बच्चन : सुशील कृष्ण गोरे
हिंदी सिनेमा के सदी के नायक अमिताभ बच्चन (जन्म-११ अक्टूबर, १९४२)आज ७५ साल के हो गए हैं. उनके चाहने वालों की संख्यां में कोई कमी नहीं आई है. उनका तिलिस्म अभी बरकरार है. उनपर कई भाषाओँ में अनगिनत किताबें...
View Articleकाज़ुओ इशिगुरो : एक अभिनव किस्सागो : श्रीकांत दुबे
2017 के नोबल पुरस्कार से सम्मानित 62 वर्षीय ब्रिटिश लेखक काज़ुओ इशिगुरो (Kazuo-Ishiguro)के 'द रिमेन्स ऑफ़ द डे'और 'नेवर लेट मी गो'पर आधारित दो फिल्में भी बनी हैं. उनकी कृतियों का 40 से अधिक भाषाओं में...
View Articleप्रेमशंकर शुक्ल : राग अनुराग
मानव सभ्यता ने जीवन को सुगम बनाने के लिए भाषाओं का निर्माण किया. भाषा ने कविता लिखी. प्रेम, मृत्यु, भय, सूर्य, नदी, पहाड़, प्रकृति, ईश्वर ये सब कविता में आकर संस्कृति बन गए. मनुष्य अभी भी कविताएँ लिख...
View Articleस्पिनोजा : नीतिशास्त्र - १ - (अनुवाद : प्रत्यूष पुष्कर, प्रचण्ड प्रवीर)
महान दार्शनिक स्पिनोजा (Baruch De Spinoza : २४ नवम्बर १६३२-२१ फ़रवरी १६७७) की विश्वप्रसिद्ध कृति ‘नीतिशास्त्र’ (Ethics : १६७७) का हिंदी में समुचित अनुवाद उपलब्ध नहीं है. यह मात्र एक तथ्य नहीं है. यह...
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