फेसबुक (कहानी ) जयश्री रॉय
सोशल मीडिया आभासी है पर यथार्थ में वास्तविक हस्तक्षेप करता है. कहानी की गीतिका जीवन के तमाम कटु-तिक्त अनुभवों से होती हुई प्रौढ़ता की दहलीज पर फेसबुक पर एक अकांउट खोलती है. यह एक नया संसार तो है पर यह...
View Articleरंग- राग : मौलिकता का आग्रह : अखिलेश
प्रसिद्ध चित्रकार अखिलेश हिंदी के अनूठे लेखक हैं. कलाओं पर उनका विशद लेखन हैं. अभी इसी वर्ष राजकमल प्रकाशन से ‘देखना’ शीर्षक से लेखकों और कलाओं पर उनकी टिप्पणियों की किताब प्रकाशित हुई है. मौलिकता...
View Articleबोली हमरी पूरबी : रुद्र मुहम्मद शहीदुल्लाह : (अनुवाद : सुलोचना वर्मा और शिव...
हमारे आस –पास हमारी अपनी भाषाओँ में कितना कुछ लिखा जा रहा है, हिंदी को सबकी खोज खबर रखनी चाहिए. शिव किशोर तिवारी लगातार प्रमाणिक रूप से बांग्ला, असमिया आदि भाषाओँ से हिंदी में अनुवाद कार्य कर रहे हैं....
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : अनिल गंगल
G.R Iranna/ RED EARTHबीसवीं सदी के अंतिम दशक में जो कवि प्रमुखता से सामने आए उनमें अनिल गंगल का नाम महत्वपूर्ण है, उनके चार- कविता संग्रह प्रकाशित हैं. अनिल की कविताएँ पूरे वाक्यों की कविताएँ हैं....
View Articleसबद - भेद : भारतेंदु और भाषा की जड़ें : बटरोही
राजनीतिक युद्ध पहले विचारों के रणक्षेत्र में लड़े जाते हैं और यह लड़ाई भाषा से शुरू होती है. औपनिवेशिक भारत में खासकर आज के हिंदी भाषी क्षेत्रों में भाषा और शिक्षा को लेकर चेतना और प्रतिरोध की जो शुरुआत...
View Articleकथा- गाथा : मुस्कराती औरतें : मैत्रेयी पुष्पा
मानसिक, शारीरिक और अनुकूलित हिंसा के ये तीनों रूप आपको परिवार रूपी संस्था में स्त्री के प्रति एक साथ देखने को मिलते हैं. इसमें सबसे खतरनाक है हिंसा का अनुकूलित रूप जिसमें पीड़िता यह खुद स्वीकार करने लग...
View Articleकथा - गाथा : सरबजीत गरचा
सरबजीत गरचा हिंदी और अंग्रेजी में कविताएँ लिखते हैं. मराठी से हिंदी और अंग्रेजी में उनके किये अनुवाद सराहे गए हैं. यहाँ उनकी पांच कविताएँ प्रस्तुत हैं. इन कविताओं में सादगी है. इधर की हिंदी कविताओं में...
View Articleनिज घर : देह पर युद्ध : गरिमा श्रीवास्तव
पुरुष युद्ध पैदा करते हैं , यातना दी जाती है औरतों को. युद्धों और दंगों में रक्तरंजित स्त्रियों की विचलित करने वाले कहानियों से इतिहास भरा पड़ा है. घृणा, विस्तारवाद और प्रभुत्व की मजहबी और...
View Articleसबद - भेद : अपने साक्षात्कारों में नागार्जुन : श्रीधरम
‘जनता मुझसे पूछ रही है क्या बतलाऊँ,जनकवि हूँ मैं साफ़ कहूँगा क्यों हकलाऊँ.'हिंदी, मैथिली, संस्कृत, और बांग्ला में रचने वाले जन कवि नागार्जुन (३० जून १९११-५ नवंबर १९९८) की आज पुण्यतिथि है. रचनाकार अपने...
View Articleकथा-गाथा : कफन रिमिक्स : पंकज मित्र
कथा-सम्राट प्रेमचंद की कालजयी कहानी ‘कफन’ उनकी अंतिम कहानी भी है. यह मूल रूप में उर्दू में लिखी गयी थी. ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया’की पत्रिका ‘जामिया’के दिसम्बर, १९३५ के अंक में यह प्रकाशित हुई, इसका...
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी – १५ (कफन रिमिक्स - पंकज मित्र) : राकेश बिहारी)
कथा-सम्राट प्रेमचंद की कालजयी कहानी ‘कफन’ उनकी अंतिम कहानी भी है. यह मूल रूप में उर्दू में लिखी गयी थी. ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया’की पत्रिका ‘जामिया’के दिसम्बर, १९३५ के अंक में यह प्रकाशित हुई, इसका...
View Articleललद्यद : योगिता यादव
कश्मीर की चौदहवीं सदी की संत कवयित्री ललद्यद अर्थात लल्लेश्वरी के जीवन के विषय में तमाम तरह की किंवदन्तियाँ प्रचलित हैं. वेद राही ने ललद्यद नाम से उपन्यास लिखा है, जिसकी चर्चा कर रही हैं कथाकार योगिता...
View Articleस्पिनोजा : नीतिशास्त्र - २ - (अनुवाद : प्रत्यूष पुष्कर, प्रचण्ड प्रवीर)
Add captionमहान दार्शनिक स्पिनोज़ा (Baruch De Spinoza : २४ नवम्बर १६३२-२१ फ़रवरी १६७७) की प्रसिद्ध कृति ‘नीतिशास्त्र’ (Ethics : १६७७) के हिंदी अनुवाद का गुरुतर दायित्व दो युवा लेखकों प्रचंड प्रवीर और...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : अंकिता आनंद (३)
अंकिता आनंद की सक्रियता का दायरा विस्तृत है. नाटकों ने उनके अंदर के कवि को समुचित किया है. उनकी कविताओं में पाठ का सुख है, शब्दों के महत्व को समझती हैं, उन्हें व्यर्थ नहीं खर्च करतीं. कविताओ में भी...
View Articleमंगलाचार : अखिल ईश की कविताएँ
courtesy : tumblrचित्रकार-लेखक 'अखिलेश'और कथाकार–संपादक 'अखिलेश'से हम सब परिचित हैं. जब एक तीसरे 'अखिलेश'नें मुझे कविताएँ भेजी तो मैं संशयग्रस्त हो गया. कविताएँ पहली बार पढ़ रहा रहा था. कविताएँ मजबूत...
View Articleमति का धीर : कुँवर नारायण : प्रचण्ड प्रवीर
“कुछ इस तरह भी पढ़ी जा सकती है एक जीवन – दृष्टिकि उसमें विनम्र अभिलाषाएं होंबर्बर महत्वाकांक्षाएँ नहीं”बीसवीं सदी के हिंदी के अग्र-गण्य कवि कुँवर नारायण (19-सितम्बर-1927 : 15–नवम्बर–2017) की अनुपस्थिति...
View Articleअजेय की कुछ नई कविताएँ
अजेय की कविताओं की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है. वह जीवन की आपा-धापी और विकास की विकृतियों के बीच अंतिम आदमी के धूप- छाँव के कवि हैं. वह आदमी किसी दौड़ में शामिल नहीं है. वह झेंपता हुआ, हकलाता हुआ,...
View Articleसबद - भेद : साहित्य और राजसत्ता : बजरंग बिहारी तिवारी
आलोचना की २१ वीं सदी की जो पहचान हिंदी में निर्मित हुई है, उसमें शामिल युवा आलोचकों में बजरंग बिहारी तिवारी का नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आया है. भक्ति साहित्य के वह गंभीर अध्येता तो हैं हीं भारतीय...
View Articleकथा- गाथा : चोर - सिपाही : मो. आरिफ
युवा कथा आलोचक राकेश बिहारी के स्तम्भ ‘भूमंडलोत्तर कहानी विमर्श’ के अंतर्गत आपने 1.‘लापता नत्थू उर्फ दुनिया न माने’ (रवि बुले)2. ‘शिफ्ट+ कंट्रोल+आल्ट = डिलीट’ (आकांक्षा पारे)3....
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी – १६ ( चोर - सिपाही : मो. आरिफ ) : राकेश बिहारी)
युवा कथा आलोचक राकेश बिहारी के स्तम्भ ‘भूमंडलोत्तर कहानी विमर्श’ के अंतर्गत आपने 1.‘लापता नत्थू उर्फ दुनिया न माने’ (रवि बुले)2. ‘शिफ्ट+ कंट्रोल+आल्ट = डिलीट’ (आकांक्षा पारे)3....
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