कथा- गाथा : पिता- राष्ट्रपिता : राकेश मिश्र
जिसके चिंतन और कर्म के केंद्र में सबसे अंतिम व्यक्ति है उसे क्रांतिकारी नहीं माना गया. जो यह कहता था कि अगर मेरा पुनर्जन्म हो तो किसी दलित के घर हो उसे दलित विरोधी समझा गया. जो आजीवन एक आदर्श ‘हिन्दू’...
View Articleकथा- गाथा : बहुरूपिया : राकेश बिहारी
कृति : Egon Schieleराकेश बिहारी आलोचक के साथ साथ हिंदी के समर्थ कथाकार भी हैं. उनके दो कहानी संग्रह- ‘वह सपने बेचता था’ तथा ‘गौरतलब कहानियाँ’ प्रकाशित हैं. प्रस्तुत कहानी साहित्य में उस आखेटक प्रवृत्ति...
View Articleसबद - भेद : दलित कविता : बजरंग बिहारी तिवारी
By The News Minuteआधुनिक दलित साहित्य की पहली दस्तक कविता के माध्यम से सुनी गयी, १९१४ में ‘सरस्वती’ में हीरा डोम की कविता ‘अछूत की शिकायत’ प्रकाशित हुई थी. तब से अबतक लगभग सौ वर्षो की यह यात्रा हमारे...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : पंखुरी सिन्हा
पंखुरीसिन्हा की कविताएँ__________________________पंखुरी सिन्हा18जून 1975'कोई भी दिन' , कहानी संग्रह, ज्ञानपीठ, 2006. 'क़िस्सा-ए-कोहिनूर', कहानी संग्रह, ज्ञानपीठ, 2008'प्रिजन टॉकीज़',अंग्रेज़ी में पहला...
View Articleकथा - गाथा : अगिन असनान : आशुतोष
(Suttee by James Atkinson, 1831)समकालीन हिंदी कथा-साहित्य पर आधारित स्तम्भ, ‘भूमंडलोत्तर कहानी’के अंतर्गत आशुतोष की कहानी – ‘अगिन असनान’ की विवेचना आप आज पढ़ेंगे. यह कहानी ‘सती’ के बहाने समाज के उस...
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी – १९ : अगिन असनान - आशुतोष : राकेश बिहारी
समकालीन हिंदी कथा-साहित्य पर आधारित स्तम्भ –‘भूमंडलोत्तर कहानी’ के अंतर्गत आशुतोष की कहानी – ‘अगिन असनान’ की विवेचना आप आज पढ़ेंगे. यह कहानी ‘सती’ के बहाने समाज के उस हिंसक सच से आपका परिचय कराती है...
View Articleपरख : वृद्धत्व की विवेचनाएं : अविनाश मिश्र
अविनाश मिश्र का यह लेख गोविन्द मिश्र के उपन्यास ‘शाम की झिलमिल’ तक अपने को सीमित नहीं रखता, साहित्य में उम्रदराज पीढ़ी और उनके लेखन में ढलती उम्र की इच्छाएं और विवशताएँ भी यहाँ दृश्य में हैं. यह...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : भारत भवन : मनीष पुष्कले
भोपाल में जब कोई पहली बार भारत भवन जाता है तब उसकी पहली प्रतिक्रिया यही होती है कि भारत में ऐसी जगहें हैं ?इस फरवरी में भारत भवन अपनी स्थापना के ३५ वर्षों का सफर पूरा कर रहा है. क्या यह भवन अब भी अपनी...
View Articleभाष्य : दूधनाथ सिंह की कविता : सदाशिव श्रोत्रिय
आलोचक–कथाकार दूधनाथ सिंह (1936-2018) को तो हम सब जानते हैं पर कवि दूधनाथ के विषय में अल्प चर्चा देखने को मिलती है. उनकी स्मृति में सदाशिव श्रोत्रिय ने अर्थगर्भित आलेख लिखा है. दूधनाथ सिंह की एक लम्बी...
View Articleसबद भेद : कात्यायनी : मीना बुद्धिराजा
वे हमें हमारे वजूद की याद दिलाते है.अहसास कराते हैं.एक वजूद वाली औरत कोप्यार करने का,उस पर क़ाबू पाने का मज़ा ही कुछ और है.(जादू नहीं कविता : कात्यायनी)देवी प्रसाद मिश्र की कविता पर मीना बुद्धिराजा के...
View Articleस्पिनोज़ा : नीतिशास्त्र - ४ - (अनुवाद : प्रत्यूष पुष्कर, प्रचण्ड प्रवीर)
महान दर्शनिक स्पिनोज़ा (24 November 1632 – 21 February 1677) की प्रसिद्ध कृति 'नीतिशास्त्र'(1677) के हिंदी अनुवाद का चुनौतीपूर्ण और गुरुतर कार्य दो प्रतिभाशाली लेखक - प्रत्यूष पुष्कर और प्रचण्ड प्रवीर...
View Articleअन्यत्र : किन्नौर और स्पीति में कुछ दिन : कल्पना त्रिपाठी पंत
(buddha at langza)किन्नौर और स्पीति का यह यात्रा-वृतांत जिजीविषा और जीवट की भी यात्रा है. दुर्गम जगहों को इसी जीवट ने मनुष्य की बस्तियों में बदल दिया है. कल्पना पंत ने बड़े सधे ढंग से इस यात्रा को...
View Articleपरख : प्रेम में डर (कविता संग्रह ): निवेदिता
निवेदिता का रंगमंच से जुडाव है. पत्रकारिता का लंबा अनुभव रहा है. महिला मुद्दों पर सक्रिय रहती हैं.निवेदिता का पहला कविता संग्रह –‘ज़ख़्म जितने थे’ २०१४ में प्रकाशित हुआ था. ‘प्रेम में डर’ इसी वर्ष वाणी...
View Articleसबद भेद : कविता क्या है : अच्युतानंद मिश्र
अच्युतानंद मिश्र कवि हैं और सैद्धांतिक आलोचना के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं. आधार प्रकाशन से उनकी किताब ‘बाज़ार के अरण्य में’इस वर्ष प्रकाशित हुई है. कविता क्या है ? यह जिज्ञासा पुरानी है. कवियों आलोचकों...
View Articleसबद - भेद : कृष्णा सोबती : ‘पहले दिल- ए-गुदाख्ता पैदा करे कोई’ : रवीन्द्र...
(कृष्णा सोबती के साथ क्रमश: असद जैदी, रवीन्द्र त्रिपाठी और मंगलेश डबराल )2017 के लिए साहित्य का प्रतिष्ठाप्राप्त सम्मान ‘ज्ञानपीठ’ हिंदी की महत्वपूर्ण लेखिका कृष्णा सोबती को कल प्रदान किया गया जिसे...
View Articleनव बसंत : राहुल राजेश
ऋतुओं का नायक बसंत साहित्य में भी अपने नायकत्व के साथ उपस्थित है. वह सुन्दर, सबल और शुभ है. वह पोषक है. वह प्रकृति में नव जीवन भरता है. वह साक्षात उर्वरता है. पृथ्वी पर यह वसंत है और मनुष्यों में यह...
View Articleसबद - भेद : साहित्य और पदमावत : रवि रंजन
महाकवि मालिक मुहम्मद जायसी का महाकाव्य ‘पदमावत’ इधर चर्चा में रहा है. इस (कु)चर्चा में ‘पदमावती’ रही है, जायसी की कृति के मन्तव्य, प्रासंगिकता और सौष्ठव की चर्चा नदारत थी.इस महान रचना को यह आधा-सामन्ती...
View Articleसबद - भेद : मित्रो मरजानी का मर्म: नंद भारद्वाज
कृष्णा सोबती के लेखन पर समालोचन पर आपने रवीन्द्र त्रिपाठी का आलेख पढ़ा - 'पहले दिल-ए-गुदाख़्ता पैदा करे कोई’. इसी क्रम में आज प्रस्तुत है नंद भारद्वाज का आलेख – ‘मरजानी मित्रो की मर्म-कथा’. नंद...
View Articleरंग- राग : पदमावत : सत्यदेव त्रिपाठी
मलिक मोहम्मद जायसी (१३९८-१४९४ ई.) की कृति पदमावत पर आलोचक रवि रंजन का आलेख– ‘साहित्य और पदमावत’ आपने समालोचन पर पढ़ा. अब फ़िल्म पदमावत पर प्रस्तुत है लेखक रंग-समीक्षक सत्यदेव त्रिपाठी का आलेख ‘पदमावत...
View Articleरंग- राग : छोटे शहर का बड़ा पर्दा : संजीव कुमार
अभिनेत्री श्री देवी के सम्मान में _______________________कला माध्यमों में सिनेमा को अपार लोकप्रियता मिली है, वह हमारे सार्वजनिक जीवन में हर जगह उपस्थित है. वह अब हमारी संस्कृति का अटूट हिस्सा है. कुछ...
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