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Channel: समालोचन
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परख : नरेन्द्र पुण्डरीक : लोकचेतना और इतिहासबोध : सुशील कुमार

समकालीन महत्वपूर्ण कवि नरेन्द्र पुण्डरीक के चार कविता संग्रह – ‘नगें पाँव का रास्ता’ (१९९२), ‘सातों आकाशों की लाडली’ (२०००), ‘इन्हें देखने दो इतनी ही दुनिया’ (२०१४) तथा ‘इस पृथ्वी की विराटता में’...

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कथा - गाथा : संझा : किरण सिंह

कथाकार किरण सिंह की  कहानी ‘संझा’दो लिंगों में विभक्त समाज में उभय लिंग (ट्रांसजेंडर) की त्रासद उपस्थिति की विडम्बनात्मक कथा है.  इसे ‘रमाकांत स्मृति पुरस्कार’और प्रथम‘हंस कथा सम्मान’ से सम्मानित किया...

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भूमंडलोत्तर कहानी – १८ ( संझा : किरण सिंह ) : राकेश बिहारी

(Cavan Ó Raghallaigh is a father, a spouse, a political activist and a transgender man)कथाकार किरण सिंह की  कहानी  ‘संझा’दो लिंगों में विभक्त समाज में उभय लिंग (ट्रांसजेंडर) की त्रासद उपस्थिति की...

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भाष्य : विष्णु खरे : सदाशिव श्रोत्रिय

(आभार : मनीष गुप्ता)समालोचन का  ‘भाष्य’  कृतियों  की व्याख्या, पुनर्व्याख्या, पुर्नमूल्यांकन आदि का  स्तम्भ है. हिंदी कविता को समझने के लिए उसकी जटिलता, शब्द लाघव, अर्थछबियाँ, बहु स्तरीयता, वैचारिकी...

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परिप्रेक्ष्य : गांधी वाद रहे न रहे : राजीव रंजन गिरि

भारत में रहने वाला यह विविध और विशाल मानव समुदाय अपने आप को तभी एक रख सकता है जब वह अपने आंतरिक मसले धैर्य से कह-सुन सके और शांति से उसका न्यायोचित निपटारा हो. तमाम अस्मिताओं और अंतर्विरोधों वाले इस...

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परख : लेखक का सिनेमा (कुँवर नारायण) : आशुतोष भारद्वाज

‘बढ़ती हुई व्यावसायिकता और स्पर्धा से जो अभी भी बचे हुए हैं उनको समर्पित’-          कुँवर नारायणकुँवर नारायण हिंदी के जितने बड़े कवि हैं उतने ही बड़े वह फिल्मों के आलोचक होंगे, यह मान लेना ज्यादती होगी....

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मैं कहता आँखिन देखी : रामदेव धुरंधर

प्रवासी लेखन (Diaspora literature) आज विश्व में चर्चा और चिंतन का विषय बना हुआ है. हिंदी प्रवासी लेखकों में मारीशस के वरिष्ठ कथाकार रामदेव धुरंधरका अहम मुकाम है. प्रवासी किसानों मजदूरों के जीवट और...

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सहजि सहजि गुन रमैं : अंचित

 कालजयी रचनाकार काल को इसीलिए जीत लेते हैं कि उनसे हमेशा अंकुर फूटते रहते हैं, उनमें यह संभावना रहती है. देश–काल से परे भी उनके सभ्यागत निहितार्थ होते हैं. कोलम्बिया के उपन्यासकार गैबरिएल गार्सिया...

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सबद भेद : ‘गोदान’ से ‘मोहन दास’ तक : संतोष अर्श

प्रेमचंद के ‘गोदान’ और उदय प्रकाश के ‘मोहन दास’ के बीच समय का बड़ा फासला है पर इन कृतियों के पात्रों के जीवन स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. तमाम तरह  के सामाजिक, धार्मिक, शासकीय प्रपंचों में ये अब...

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परख : महिषासुर - मिथक व परम्परा : कँवल भारती

  वर्तमान के संघर्ष का युद्ध- क्षेत्र अतीत होता है. औपनिवेशिक शासकों ने भारतीय मिथकों को अपने हितों के सहयोगी इतिहास के रूप में सृजित किया. प्रतिक्रिया में मिथकों को समझने और व्यवस्थित करने की एक और...

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उपन्यास - अंश : कफ़स : तरुण भटनागर

(फोटो के लिए Tajnoor Khan  का आभार)कथाकार तरुण भटनागर के शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास ‘कफ़स’में एक चरित्र है - अदीब. जब वह पैदा हुआ तब उसके शरीर में औरत और आदमी दोनों के जननांग थे. उसके पिता उसे लडका बनाना...

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परख : महिषासुर - मिथक व परम्परा : कँवल भारती

  वर्तमान के संघर्ष का युद्ध- क्षेत्र अतीत होता है. औपनिवेशिक शासकों ने भारतीय मिथकों को अपने हितों के सहयोगी इतिहास के रूप में सृजित किया. प्रतिक्रिया में मिथकों को समझने और व्यवस्थित करने की एक और...

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अम्बर रंजना पाण्डेय की कविताएँ

Vita, orrenda cosa che mi piaco tanto-Aldo Palazzeschi 1.ट्रैफ़िक कोलाहल भी शब्द है क्योंकि इसमें अनेक अर्थों की अनुगूँज है ऐल्यूमिनीयम के रंगवाले धुँए से भरी. रात चकाचौंध है. असंख्य इंजनों के शोर में...

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मसीह अलीनेजाद से बातचीत : वर्षा सिंह

मसीह अलीनेजादअब किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं. औरतों की आज़ादी और खुदमुख्तारी के लिए उनका संघर्ष ईरान से निकलकर पूरी दुनिया में फैल चुका है. मसीह अलीनेजाद से बात की है लेखिका और पत्रकार वर्षा सिंह ने....

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सहजि सहजि गुन रमैं : शैलेन्द्र दुबे

कृति : Gigi-scariaकवि चित्रकार शैलेन्द्र दुबे का एक संग्रह ‘हमने ख़ुशी के कुछ दिन तय किये’ २०१५ में प्रकाशित हुआ था. शैलेन्द्र की कविताएँ अपनी भंगिमा में मुखर नहीं है पर अपने अर्थात में वे गहरी हैं....

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नेपाली कविताएँ : अनुवाद : चन्द्र गुरुंग

(फोटो - चन्द्र गुरुंग) चन्द्र गुरुंग नेपाली भाषा के युवा कवि हैं. वह समकालीन नेपाली कविताओं का हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद भी करते हैं. उनके किए अनुवाद समालोचन में पहले भी प्रकाशित होते रहे हैं....

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मीमांसा : काव्य से मुक्ति : कौशल तिवारी

by georgemckimकविता क्या है, किसलिए है ? आदि की जिज्ञाषाएं प्राचीनतम है. हर भाषा के काव्यशास्त्र में इनपर कुछ न कुछ सोच – विचार आपको मिलेगा. संस्कृत काव्यशास्त्र में आनंद, सीख, यश आदि कविता के प्रयोजन...

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कथा - गाथा : अगिन असनान : आशुतोष

(Suttee by James Atkinson, 1831)समकालीन हिंदी कथा-साहित्य पर आधारित स्तम्भ, ‘भूमंडलोत्तर कहानी’के अंतर्गत आशुतोष की कहानी – ‘अगिन असनान’ की विवेचना आप आज पढ़ेंगे.  यह कहानी ‘सती’ के बहाने समाज के उस...

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भूमंडलोत्तर कहानी – १९ (अगिन असनान - आशुतोष) : राकेश बिहारी

समकालीन हिंदी कथा-साहित्य पर आधारित स्तम्भ –‘भूमंडलोत्तर कहानी’के अंतर्गत आशुतोष की कहानी – ‘अगिन असनान’ की विवेचना आप आज पढ़ेंगे.  यह कहानी ‘सती’ के बहाने समाज के उस हिंसक सच से आपका परिचय कराती है...

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मंगलाचार : शुभम अग्रवाल

(Naiza Khan : On the Front Line)‘ याचनाएं जिनका व्यर्थ होनानिश्चित था.’पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर २७ वर्षीय शुभम अग्रवाल अपने पहले कविता संग्रह की तैयारी में हैं.शीर्षकविहीन इन कविताओं में मृत्यु,...

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