रुस्तम : तब भी, इस बाहुल्य में
(Virginie Demont Breton - FISHERMAN'S WIFE AFTER BATHING CHILDREN , 1881)रुस्तम जीवन में भी मितभाषी हैं और यह समझते हैं कि जीवन आराम से जीने वाली चीज है जिससे कि आप दीगर आवाज़ों को भी सुन सकें जो शोर और...
View Articleकविता वीरेन : सदाशिव श्रोत्रिय
कविता पढ़ते हुए हाशिये पर हम उसका प्रभाव या कोई बात जो इस बीच अंकुरित हुई है लिखते चलते हैं. यह भी एक तरीका है संवाद का. वीरेन डंगवाल की सम्पूर्ण कविताओं के संग्रह ‘कविता वीरने’ पर ये टिप्पणीयाँ इसी तरह...
View Articleरूमी की ग़ज़लें : अनुवाद बलराम शुक्ल
(रूमी का मक़बरा,कोन्या, तुर्की)शायर-सूफी मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी (३० सितम्बर, १२०७) की रूबाईयां और ग़ज़लें विश्व की सभी भाषाओँ में अनूदित हुईं हैं, एक ही भाषा में कई-कई बार हुईं हैं. पर इन कविताओं...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : सुघोष मिश्र
(फोटो आभार : H. C. Bresson)हिंदी कविता की दुनिया युवतर कवियों से आबाद है. ये कवि अपनी समझ और निपुणता के साथ जब सामने आते हैं तो विस्मय होता है और आत्मिक ख़ुशी का कारण बनते हैं. एक नए कवि से जो आप...
View Articleकथा-गाथा : सफारी : दी जंगल यात्रा : नरेश गोस्वामी
प्राची अपनी सहेलियों शालिनी और सौम्या के साथ जंगल-यात्रा पर सपरिवार निकलती तो हैं. पर ये लोग कहाँ फंस जाते हैं? ताकत, पूंजी और मनोविज्ञान के इस खेल में क्या ये खुद आखेट नहीं बन जाते ?नरेश गोस्वामी की...
View Articleमंगलाचार : वसु गन्धर्व
कविताएँ दरअसल अंधरे में रौशन दीये हैं. अपनी मिट्टी से अंकुरित सौन्दर्य और विवेक की लौ. इसी संयमित प्रकाश में मनुष्यता लिखी गयी है. यह अलोक जहाँ-तहां आज भी बिखरा है, हाँ ‘लाईट’ की अश्लीलता और शोर में...
View Articleकविता : यक्षिणी ( कथान्तर ) : विनय कुमार
(फोटो द्वारा अरुण देव )विनय कुमार मनोचिकित्सक हैं और हिंदी के लेखक भी. 'एक मनोचिकित्सक की डायरी', मनोचिकित्सा संवाद, 'मॉल में कबूतर', ‘आम्रपाली और अन्य कविताएँ’ आदि पुस्तकें प्रकाशित हैं. यक्षिणी की...
View Articleपरख : कोरियाई कविता के हिंदी अनुवाद की समस्या : पंकज मोहन
दो भाषाओँ के बीच अनुवाद सांस्कृतिक प्रक्रिया है, मुझे लगता ही कि जैसे साहित्य से उस समाज का पता चलता है उसी प्रकार जिस भाषा में अनुवाद हो रहे हैं, उसकी गुणवत्ता से उस समाज की समृद्धि और सुरुचि का भी...
View Articleविजया सिंह की कविताएँ
“इधर किसी अत्यंत प्रतिभाशाली कवयित्री विजया सिंह की कुछ आश्चर्यजनक अनूठी कविताएँ आपने अपने मिलते-जुलते नाम विजया सिंह से छपा ली हैं. इस कृत्य की यूँ तो निंदा की जानी चाहिए थी किन्तु उसे ऐसी हाथ की...
View Articleदलित साहित्य - २०१८ : बजरंग बिहारी तिवारी
हिंदी का दलित साहित्य अब कलमी पौधा न होकर एक भरा पूरा वृक्ष है. सिर्फ आत्मकथाएं नहीं, उपन्यास, कहानी, कविता, अनुवाद आलोचना सभी क्षेत्रों में आत्मविश्वास और परिपक्वता दिखती है. आलोचक बजरंग बिहारी तिवारी...
View Articleअनूप सेठी की कविताएँ : चौबारे पर एकालाप संग्रह
लगभग पन्द्रह वर्षों के अन्तराल में अनूप सेठी (२० जून, १९५८) का दूसरा कविता संग्रह ‘चौबारे पर एकालाप’इस वर्ष भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित हुआ है. ‘जगत में मेला’ (२००२) उनका पहला संग्रह है. विजय कुमारने...
View Articleसेरेना विलियम्स : अख़बार का वह पहला आर्टिकल (अनुवाद - यादवेन्द्र)
१९८१ में जन्मी दुनिया की सबसे महान टेनिस खिलाड़ी सेरेना विलियम्स कोई लेखक नहीं हैं- खेल में उनकी अप्रतिम उपलब्धियों का कोई सानी नहीं है. १४ साल की उम्र से प्रोफेशनल टेनिस खेल रही सेरेना अपने रंग,मुखर...
View Articleअब मैं साँस ले रहा हूँ : असंगघोष की कविताएँ
साहित्य के इतिहास में किसी काल-खंड में किसी ख़ास प्रवृत्ति को लक्षित कर उसे समझने और उसकी पहचान को सुरक्षित रखने के लिए उसका नामकरण किया जाता है. हिंदी में दलित जीवन और दर्शन को केंद्र में रखकर जो...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : पूनम अरोड़ा
पूनम अरोड़ा कहानियाँ और कविताएँ लिखती हैं, नृत्य और संगीत में भी गति है. कविताओं की भाषा और उसके बर्ताव में ताज़गी और चमक है. बिम्बों की संगति पर और ध्यान अपेक्षित है.उनकी पांच कविताएँ आपके लिएपूनम...
View Articleरंग-राग : स्त्री का रहस्य : सिद्धेश्वर सिंह
कवि सिद्धेश्वर सिंह निर्देशक अमर कौशिककी फ़िल्म ‘स्त्री’देखने गए, वहाँ उन्हें स्त्रियों पर लिखी कविताएँ भी याद आईं. डरना-वरना तो क्या ? यह टिप्पणी उन्होंने जरुर भेज दी मुझे. आप भी पढिये इसे. प्रेम,भय...
View Articleमेघ-दूत : आर्थर रैम्बो की कविताएँ : अनुवाद मदन पाल सिंह
कुछ कवि अधूरे प्रेम की तरह होते हैं जहाँ बार–बार लौटने का मन करता है. फ्रेंच कवि (Jean Nicolas Arthur Rimbaud : 20 October 1854 – 10 November 1891)आर्थर रैम्बो इसी तरह के कवि हैं. मात्र ३७ वर्ष की...
View Articleचिकित्सा का जाल और वीरेन डंगवाल : सदाशिव श्रोत्रिय
आधुनिक चिकित्सा का तन्त्र कितना जानलेवा है इसे बड़ी कही जाने वाली बिमारियों से जूझते हुए रोगी और उनके परिजन समझते हैं, अब यह तन्त्र एक निर्मम व्यवसाय में बदल गया है. हिंदी के प्यारे कवि वीरेन डंगवाल...
View Articleकथा-गाथा : छिपकलियाँ : नरेश गोस्वामी
किस से पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा.’ नरेश गोस्वामी की कहानी ‘छिपकलियाँ’ पढ़ते हुए निदा फ़ाज़ली का यह शेर याद आता रहा. ‘देस वीराना’ की कोई न कोई कथा हर शहरी के पास...
View Articleसबद भेद: मुक्तिबोध का कथा-साहित्य : सूरज पालीवाल
मुक्तिबोध का साहित्य और उनका चिंतन उनके जीवन-संघर्ष और आत्म-संघर्ष का प्रतिफल है और साक्षी भी, उनके कथा-साहित्य में हम इसे खासतौर से पहचान सकते हैं. आलोचक सूरज पालीवाल ने मुक्तिबोध की कहानियों और...
View Articleसबद भेद : नरेश सक्सेना की कविताओं का मर्म : संतोष अर्श
(फोटो आभार : Krishna Samiddha)नरेश सक्सेना ने कहीं लिखा है कि ‘कविता ऐसी जो बुरे वक्त में काम आए.’ तमस से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर उसकी इसी अनवरत यात्रा ने उसे मनुष्यता का पर्याय बना रखा है....
View Article