परख : हिंदी आलोचना की सैद्धांतिक (विनोद शाही) : अंकित नरवाल
हिंदी आलोचना की सैद्धांतिकी विनोद शाहीआधार प्रकाशन, पंचकूला (हरियाणा)मूल्य : 250 रुपएआचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘ड्राइंग मास्टर’ थे, बाद में साहित्य के आलोचक हुए, विनोद शाही पेंटर हैं और आलोचक भी. रामचंद्र...
View Articleसविता सिंह की ग्यारह कविताएं
'मेरा चेहरा किसी फूल-सा हो सकता थाखिली धूप में चमकता हुआ !’वरिष्ठ कवयित्री सविता सिंह की कविताएँ भारतीय स्त्री की कविताएँ हैं, उनमें नारीवादी वैचारिकी का ठोस आधार है. उनका मानना है कि ‘स्त्री में अगर...
View Articleएक रात का फ़ासला : सुभाष पंत
वरिष्ठ कथाकार सुभाष पंत के लिखे जा रहे उपन्यास- ‘एक रात का फ़ासला’ का एक अंश यहाँ प्रस्तुत है.ससुराल की पंचायत सुभाष पंतशरीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ और तीन घंटे बैलगाड़ी की यात्रा से...
View Articleचंद्रकांता की कविताएँ
युवा चंद्रकांता की कविताएँ हैरत में डालती हैं, बहुत जल्दी ही उन्होंने शिल्पगत प्रौढ़ता और विविधता हासिल कर ली है. वे हिंदी कविता का नया चेहरा हैं. कविताएँ वाक्यों की हैं और उनमें डिटेल्स हैं. विष्णु खरे...
View Articleराही मासूम रज़ा और टोपी शुक्ला : ज़ुबैर आलम
राही मासूम रज़ा का उपन्यास ‘आधा-गाँव’ हिंदी के श्रेष्ठ उपन्यासों में से एक है. उनका उपन्यास ‘टोपी शुक्ला’ भी चर्चित रहा है. शोध छात्र ज़ुबैर आलम इस उपन्यास की चर्चा कर रहें हैं. “राही मासूम रज़ा और टोपी...
View Articleकथा- गाथा : साठ साल बाद बैल की वापसी : बटरोही
साहित्य और सत्य के बीच कल्पना है, साहित्य को सार्वभौम बनाती हुई. कल्पना से यथार्थ और यथार्थ से जादुई होती कथा की दुनिया जटिल समय को अंकित करती चल रही है. कथा में वर्तमान, इतिहास, पौराणिक-जातीय आख्यान,...
View Articleवाम बनाम दक्षिण की साहित्य परम्परा : विमल कुमार
हिंदी साहित्यकारों और सेवियों को राजनीतिक आधार पर बांट कर क्या हम समग्र साहित्य को क्षति पहुंचा रहें हैं ? स्वतंत्रता दिवस पर वरिष्ठ कवि पत्रकार विमल कुमार की यह टिप्पणीवाम बनाम दक्षिण की साहित्य...
View Articleकथा- गाथा : ४७१४ नहीं बल्कि ४७११ : अम्बर पाण्डेय
अम्बर पाण्डेय के कवि से हम सब परिचित हैं. अब कथाकार अम्बर पाण्डेय अपनी कहानी– ‘४७१४ नहीं बल्कि ४७११’ के साथ प्रस्तुत हैं. पिछले अंकों में बटरोही की कहानी के सन्दर्भ में यह बात उठी थी कि कहानियाँ निरी...
View Articleभीष्म : आशीष बिहानी की लम्बी कविता
भीष्म आशीष बिहानीपूर्वार्द्ध१.किसी पेड़ के कोटर में झांकोगेतो उसकी कालिख घिरी आँखों से ज़्यादाजीवन वहाँ मिल जाएगाउसके कानों ने दुनिया को सुननाबंद कर...
View Articleपरख : पानी को सब याद था (अनामिका) : मीना बुद्धिराजा
पानी को सब याद था : अनामिकाप्रकाशक- राजकमल प्रकाशन, नई दिल्लीप्रथम संस्करण- 2019मूल्य- रू- 150वरिष्ठ कवयित्री अनामिका का नया कविता संग्रह ‘पानी को सब याद था’ इसी वर्ष राजकमल प्रकाशन से छप कर आया है. अब...
View Articleनिज घर : चंद्रकांत देवताले : एक सम्पूर्ण कवि : प्रफुल्ल शिलेदार
(विष्णु खरे, चन्द्रकांत देवताले और प्रफुल्ल शिलेदार)प्रफुल्ल शिलेदार मराठी के कवि और अनुवादक हैं. हिंदी से मराठी तथा मराठी से हिंदी में अनुवाद का उनका विस्तृत कार्य है. चंद्रकांत देवताले पर उनका यह...
View Articleविनय कुमार : अमरीका सीरीज़ की कुछ कविताएँ
जिन्हें हम विकसित सभ्यताएं कहते हैं, वहाँ चमक, दमक. तेज़ी और तुर्शी के बावजूद बहुत कुछ फीका, उदास, थका और अँधेरा है. इसे न कोई देखना चाहता है न दीखाना. आज अमरीका धरती की सबसे काम्य जगह है पर किसके लिए ?...
View Articleकेदारनाथ सिंह : क़ब्रिस्तान की पंचायत में सरपंच : संतोष अर्श
कवि केदारनाथ सिंह का गद्य ललित और रोचक है, उसमें जगह-जगह कविता दिख जाती है. ‘क़ब्रिस्तान में पंचायत’ में उनके आस-पास के लोग हैं, परिवेश है, बुद्ध हैं, कुशीनगर पर एक टुकड़ा है, चीना बाबा आते हैं जिस पर...
View Articleलमही का हमारा कथा समय -१ : निशांत
स्त्री कथाकारों पर असाधारण अंकनिशांतहिंदी कथा साहित्य चाँद,तारों,सितारों,ग्रहों,उपग्रहों से भरा पड़ा है. यह एक विशाल दुनिया है जहाँ हर किसी के पास अपनी कहानियाँ है....
View Articleनिज घर : मेरे बडके बाबू – सबके पुजारी बाबा : सत्यदेव त्रिपाठी
उत्तर भारतीय ग्रामीण समाज को समझने के लिए राजनीतिक और सामजिक अध्ययन की कुछ कोशिशें हुईं हैं. साहित्य की आत्मकथा, जीवनी, संस्मरण आदि विधाएं इस सन्दर्भ में उपयोगी हैं. रंग-आलोचक सत्यदेव त्रिपाठी इधर...
View Articleएक दिन का समंदर : हरजीत : प्रेम साहिल
‘जिस से होकर ज़माने गुज़रे होंबंद ऐसी गली नहीं करते.’शायर हरजीत सिंह की यादें अधूरे प्रेम की तरह टीसती रहती है. उनके असमय निधन ने हिंदी ग़ज़ल की दुनिया को वीरान कर दिया. तेजी ग्रोवर हरजीत सिंह के...
View Articleमेघ-दूत :मार्केस : मैं सिर्फ़ एक फ़ोन करने आई थी (अनुवाद-विजय शर्मा)
मार्केस की कहानियों का जादुई यथार्थ यथार्थ को उसकी सम्पूर्ण निर्ममता और विडम्बना के साथ प्रस्तुत करता है. चीजें जिस तरह से जटिल और क्रूर होती गयी हैं उन्हें व्यक्त करने का यह एक साहित्यिक तरीका था जिसे...
View Articleकथा- गाथा : जाने भी दो पारो : प्रचण्ड प्रवीर
उपन्यास ‘अल्पाहारी गृहत्यागी: आई आई टी से पहले’, तथा कहानी संग्रह ‘जाना नहीं दिल से दूर’ से चर्चित अध्येता, लेखक, अनुवादक प्रचण्ड प्रवीर की इधर की प्रकाशित कहानियों ने शिल्प और कथ्य को लेकर बीहड़...
View Articleन तो मैं कुछ कह रहा था : रुस्तम सिंह की कविताएँ.
आधुनिक हिंदी कविता में प्रकृति, पर्यावरण और मनुष्यइतर जीवन आते रहे हैं, पूरी कविता के रूप में भी. रुस्तम सिंह के के यहाँ ये संग्रह की शक्ल में आयें हैं. लगभग सभी कविताएँ अपने केंद्र में प्रकृति को धारण...
View Articleकथा-गाथा : प्रलय में नाव : तरुण भटनागर
प्रलय में नावतरुण भटनागर वह न तो नूह था और न ही मनु, पर वह नाव बना रहा था.प्रलय होने में अभी देर थी. यह ठीक-ठीक पता न था कि किस दिन प्रलय आयेगी. पर दुनिया का खत्म होना तय था. ईश्वर का आदेश था कि वह नाव...
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