परख : परस्पर: भाषा - साहित्य - आंदोलन (राजीव रंजन गिरि)
भाषायी विमर्श का प्रामाणिक दस्तावेज़ (परस्पर: भाषा - साहित्य - आंदोलन)हिन्दी पट्टी की ‘भाषाएँ’ किस तरह से ‘बोली’ में और खड़ी ‘बोली’ कैसे ‘भाषा’ में व्यवहृत हो गयी, संविधान सभा में राजभाषा को लेकर...
View Articleडोरिस कारेवा (Doris Kareva) की बीस कविताएँ : अनुवाद तेजी ग्रोवर
डोरिस कारेवा (Doris Kareva)की बीस कविताएँ तेजी ग्रोवरमैं बुढ़ापे क़ा पूर्वाभ्यास कर रही हूँ, अकेलेपन,गरीबी, बहिष्कृत किये जाने का,मुफ़लिसी, और न होने का पूर्वाभ्यास.मैं अन्धेपन का...
View Articleसुषमा नैथानी की कविताएँ
सुषमा नैथानी की कविताएँ जहाँ शिल्प में सुगढ़ हैं वहीँ कथ्य में विविध और नयी. इन कविताओ में आवास से लेकर प्रवास तक की लम्बी दूरी फैली हुई है, इनमें स्मृतियाँ, पीड़ा और अकेलापन है, जिद्द और जिजीविषा है....
View Articleडोरिस कारेवा (Doris Kareva) की बीस कविताएँ : अनुवाद तेजी ग्रोवर
photo Courtesy Kaido Venom डोरिस कारेवा (Doris Kareva) इस्टोनिया के सबसे महत्वपूर्ण कवियों में हैं. उनका जन्म 1958 में ताल्लिन्न में हुआ था. अब तक उनके 15 कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं. इसके...
View Articleपरख : आलोचना के परिसर : मीना बुद्धिराजा
आलोचना के परिसरलेखक- गोपेश्वर सिंहप्रकाशक- वाणी प्रकाशन, नयी दिल्लीप्रथम संस्करण-2019मूल्य- रू. 695आलोचना की नयी संस्कृति का पाठमीना बुद्धिराजा साहित्य के अतिरिक्त ज्ञान और कला की सभी विधाएँ और क्षेत्र...
View Articleसांड की आँख : संदीप नाईक
सांड की आँखउजली सुबह तेरे ख़ातिर आएगी संदीप नाईक भारतीय फिल्म उद्योग में शायद ही किसी दौर में इतनी विलक्षण फिल्में बनी होंगी जो भीड़ में अपना ध्यान इसलिये खिंचती है कि उनका...
View Articleकुलदीप कुमार की कविताएं
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप कुमार (4 मार्च 1955, नगीना) अंग्रेजी अखबारों में इतिहास, साहित्य, शास्त्रीय संगीत और पेंटिंग पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. उनके भीतर कवि भी है जिसे अब जाकर एक संग्रह प्राप्त हुआ...
View Articleतुम बाक़ी जानवरों के खिलौने क्यों नहीं बनाते : इवॉन्नक वेरा : अनुवाद - नरेश...
इवॉन्न वेरा (Yvonne Vera) अफ्रीका के कुछ महत्वपूर्ण कथाकारों मे से एक मानी जाती हैं. उनका पहला संग्रह ‘Why Don't You Carve Other Animals’, 1992में प्रकाशित हुआ था.इस शीर्षक कहानी का अंग्रेजी से हिंदी...
View Articleअविनाश मिश्र की कुछ नई कविताएँ
अविनाश मिश्र की कुछ नई कविताएँ पाठकवे आज जान पाते हैंकल किए जा चुके की निरर्थकतावैसे ही जैसे जानेंगे कलआज की निरर्थकता.जीवन सतत निरर्थकताओं को जानने का पर्याय है.वे हमेशा चिंतापथ पर चलते...
View Articleमंगलाचार : अनामिका अनु की कविताएँ
अनामिका अनु पेशे से वैज्ञानिक हैं, त्रिवेन्द्रम में रहती हैं और कविताएँ लिखती हैं. कविता को मनुष्यता की पुकार कहा गया है, जिस चोट को आप गद्य में नहीं अभिव्यक्त कर सकते उसे कविता न केवल मुखर करती है,...
View Articleअविनाश मिश्र की कुछ नई कविताएँ
अविनाश मिश्र जीवन की यातना के कवि हैं, कभी कामू ने कहा था कि आधुनिक मनुष्य सीसिफ़स की तरह शापग्रस्त है. रूटीन की यातना का उम्र क़ैद मुज़रिम. इसकी सज़ा निरर्थक जीवन जीते हुए आप पूरी करते रहते हैं. ये...
View Articleअम्बर में अबाबील (उदय प्रकाश) : संतोष अर्श
अबाबील अम्बर से पुकार रहा है(उदय प्रकाश का नया कविता संग्रह ‘अम्बर में अबाबील’)संतोष अर्श “Roots may be hidden in the groundBut their flowers flower in the open air for all to see. It must be...
View Articleजश्न ए दोस्ती की कविताएँ
‘फ़रियाद की कोई लय नहीं है नाला पाबंद-ए-नय नहीं है.’ (ग़ालिब)साहित्य कला है, वह आवाज़, पुकार और मशाल है. वह दोस्ती है और दोस्ती का जश्न भी. कुछ स्त्रियाँ मिलती हैं और इस एहसास को कि तमाम अंतर के बाद हैं...
View Articleअम्बर में अबाबील (उदय प्रकाश) : संतोष अर्श
अबाबील अम्बर से पुकार रहा है(उदय प्रकाश का नया कविता संग्रह ‘अम्बर में अबाबील’)संतोष अर्श “Roots may be hidden in the groundBut their flowers flower in the open air for all to see.It must be...
View Articleजश्न ए दोस्ती की कविताएँ
‘फ़रियाद की कोई लय नहीं है नाला पाबंद-ए-नय नहीं है.’ (ग़ालिब)साहित्य कला है, वह आवाज़, पुकार और मशाल है. वह दोस्ती है और दोस्ती का जश्न भी. कुछ स्त्रियाँ मिलती हैं और इस एहसास को कि तमाम अंतर के बाद हैं...
View Articleअम्बर में अबाबील (उदय प्रकाश) : संतोष अर्श
अबाबील अम्बर से पुकार रहा है(उदय प्रकाश का नया कविता संग्रह ‘अम्बर में अबाबील’)संतोष अर्श “Roots may be hidden in the groundBut their flowers flower in the open air for all to see.It must be...
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‘फ़रियाद की कोई लय नहीं है नाला पाबंद-ए-नय नहीं है.’ (ग़ालिब)साहित्य कला है, वह आवाज़, पुकार और मशाल है. वह दोस्ती है और दोस्ती का जश्न भी. कुछ स्त्रियाँ मिलती हैं और इस एहसास को कि तमाम अंतर के बाद हैं...
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अबाबील अम्बर से पुकार रहा है (उदय प्रकाश का नया कविता संग्रह ‘अम्बर में अबाबील’)संतोष अर्श “Roots may be hidden in the groundBut their flowers flower in the open air for all to see.It must be...
View Articleजश्न ए दोस्ती की कविताएँ
‘फ़रियाद की कोई लय नहीं है नाला पाबंद-ए-नय नहीं है.’ (ग़ालिब)साहित्य कला है, वह आवाज़, पुकार और मशाल है. वह दोस्ती है और दोस्ती का जश्न भी. कुछ स्त्रियाँ मिलती हैं और इस एहसास को कि तमाम अंतर के बाद हैं...
View Articleअम्बर में अबाबील (उदय प्रकाश) : संतोष अर्श
कथाकार कवि उदय प्रकाश का नया कविता संग्रह ‘अम्बर में अबाबील’ अभी-अभी वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. इस संग्रह की बहुत दिनों से प्रतीक्षा थी. और युवा आलोचक संतोष अर्श की बात मानें तो इस संग्रह मे कवि...
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