प्रमोद पाठक की कुछ नई कविताएँ
प्रमोद पाठक की कुछ नई कविताएँ आज जब हम संकट से घिरे हैंपेड़ पहाड़ों की मुस्कुराहट हैं नदियाँ समन्दर की प्रेमिकाएँ हम नदियों के रास्तों में आए पहाड़ो से छीन ली मुस्कानतितलियों ने बस फूलों को चुना वे...
View Articleलॉकडाउन के बाद : स्कन्द शुक्ल
डॉ. स्कन्द शुक्ल (MBBS, MD, DM : Rheumatologist, Immunologist) हिंदी के पाठकों के सुपरिचित लेखक हैं. रोगों की जटिलता, बचाव और निदान को सृजनात्मक भाषा में जिस तरह से वो प्रस्तुत करते हैं, वह अप्रतिम तो...
View Articleप्रमोद पाठक की कुछ नई कविताएँ
प्रमोद जयपुर में रहते हैं. वे बच्चों के लिए भी लिखते हैं. उनकी लिखी बच्चों की कहानियों की कुछ किताबें बच्चों के लिए काम करने वाली गैर लाभकारी संस्था 'रूम टू रीड'द्वारा प्रकाशित हो चुकी हैं. वे...
View Articleशायद कि याद भूलने वाले ने फिर किया : पंकज पराशर
शायद कि याद भूलने वाले ने फिर किया (चंद तवाइफ़ों की दास्तान-ए-ज़िंदगी)पंकज पराशरहालाँकि इस मज़मून में मैं बात तो सीधे ज़ोहराबाई आगरेवाली की ज़िंदगी से शुरू करना चाहता था, लेकिन शुरुआत चूँकि मैंने...
View Articleकहानीकार फणीश्वरनाथ रेणु : प्रेमकुमार मणि
कहानीकार फणीश्वरनाथ रेणु प्रेमकुमार मणि रेणु का कहानीकार रूप उनके उपन्यासकार रूप से महत्व में कुछ अधिक ही है. हिंदी कहानियों में प्रेमचंद के बाद ग्रामीण छवियाँ कम मिलने लगी थीं....
View Articleबटरोही : हम तीन थोकदार (तीन)
हम तीन थोकदार (तीन) पूर्व-कथा के रूप में लेखक की ओर से दो शब्द बटरोहीजिन्दगी का बूमरैंग देखना आकर्षक तो लगता है, मगर खिझाने और परेशान करने वाला ज्यादा होता है...पिछले तीन दिनों के तनाव के बाद जब मैं...
View Articleबीजो की यात्रा : सत्यदेव त्रिपाठी
मनुष्य भी जानवर है, पर विकसित होकर उसने सबसे बुरा व्यवहार जानवरों से ही किया, जो उपयोगी थे उन्हें पालतू बना लिया. कहते हैं कुत्ते मनुष्य के सबसे पुराने साथी है. हजारों साल के इस ‘साथ’ ने मनुष्यों में...
View Articleमार्खेज़ : सोई हुई सुंदरी और हवाई जहाज़ : सुशांत सुप्रिय
Sleeping Beauty and the Airplane’ गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज़ (6 March 1927: 17 April 2014) के 1992 में प्रकाशित कहानी संग्रह ‘Strange Pilgrims’ में संकलित है. प्रस्तुत हिंदी अनुवाद Edith Grossman के...
View Articleखिड़कियाँ, झरोखे और लड़कियाँ : रंजना अरगडे
रंजना अरगडे का कवि शमशेरबहादुर सिंह पर आलोचनात्मक कार्य महत्वपूर्ण माना जाता है. इधर वे सृजनात्मक लेखन की तरफ उन्मुख हुई हैं. ‘खिड़कियाँ, झरोखे और लड़कियाँ’ उनकी लम्बी कविता है जिसके केंद्र में स्त्री...
View Articleवांग पिंग की कविताएँ : अनुवाद लीलाधर मंडलोई
वरिष्ठ कवि लीलाधर मंडलोई इधर आप्रवासी कविताओं पर कार्य कर रहें हैं. उन्होंने विश्व के कई कवियों का हिंदी में अनुवाद किया है. चीन की अमेरिका में रहने वाली कवयित्री ‘वांग पिंग’ की ये कविताएँ लेखक अनुवादक...
View Articleलाल्टू की कविताएँ
कथ्य अपना शिल्प तलाश लेता है,जैसा समय है और जिन नुकीले संकटों से हम जूझ रहें हैं, उन्हें व्यक्त करने के लिए कविता-कथा की प्रदत्त शैली में बड़े तोड़-फोड़ की जरूरत हर जेन्यून लेखक महसूस करता है, और वह कोशिश...
View Articleहरि मृदुल की कविताएं
कविता सृजन के साथ स्मृतियों को सहेजती है वह शब्दों को संरक्षित भी करती है. शब्द जिनसे होकर हम संस्कृति तक पहुंचते हैं. कविता के लिए हल केवल हल नहीं है वह उस पूरी प्रक्रिया तक ले जाने का रास्ता है जिनसे...
View Articleपरमेश्वर फुंकवाल की कविताएँ
कोरोना समय में मजदूरों को यह जो जगह-जगह से खदेड़ा गया जिसे पलायन जैसे नरम शब्द से ढँक दिया गया है, मनुष्य इतिहास की बड़ी त्रासदी है. दुनिया वैसी ही है. २१ वीं सदी पर पुरानी सदियों का वैसा ही अमानवीय बोझ...
View Articleअनामिका अनु की कविताएँ
समालोचन में प्रकाशित इधर पांच कवियों में- लाल्टू पंजाब के हैं,हैदराबाद में रहते हैं. रंजना अरगडे मराठी हैं,गुजरात में वर्षों रहने के बाद अब भोपाल में रह रहीं हैं. हरि मृदुल उत्तराखंड के हैं, मुंबई में...
View Articleबटरोही : हम तीन थोकदार (चार )
वरिष्ठ कथाकार बटरोही के आख्यान ‘हम तीन थोकदार’ की यह चौथी किश्त थोकदारों के पुरखों की प्रचलित किम्वदंतियों, लोक-विश्वासों, इतिहास तथा गाथाओं में प्रवेश कर गयी है. बटरोही की कथा शैली की यह विशेषता ही है...
View Articleकथा-गाथा : सिद्ध पुरुष : प्रवीण कुमार
'छबीला रंगबाज़ का शहर'प्रवीण कुमार का चर्चित उपन्यास है. प्रस्तुत कहानी ‘सिद्ध-पुरुष’ का नायक अवकाश प्राप्त शिक्षक है जिसे कैमरों में दर्ज़ होने और समय में वापस लौटने का ख़ब्त सवार हो जाता है. हत्या का...
View Articleदेवनागरी जगत की दृश्य संस्कृति (सदन झा) : शुभनीत कौशिक
समीक्षा कृति से संवाद करती है, और उसके प्रति रुचि पैदा करती है, वह न तो पुस्तक-परिचय है न उसका प्रचार. संवाद के लिए विषय-वस्तु और पृष्ठभूमि से परिचय आवश्यक है और जहां जरूरत हो वहाँ असहमति की ज़िम्मेदारी...
View Articleरेणु की राजनीति : प्रेमकुमार मणि
यह फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म शताब्दी वर्ष है, रेणु के लेखन के विविध आयामों को समझने के प्रयास हो रहें हैं. उनकी राजनीतिक चेतना क्या थी, किस तरह से इसने अपना रूप लिया और फिर वह क्योंकर सक्रिय राजनीति से...
View Articleशहरयार और क़ाज़ी अब्दुल सत्तार : सूरज पालीवाल
उसने ये जाना कि गोया/ये भी मेरे दिल में था सूरज पालीवाल क़ाज़ी अब्दुल सत्तार और शहरयार दोनों अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के उर्दू विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष पद से सेवा निवृत हुये...
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