महाभारत: चरम का सौन्दर्य : सुदीप्त कविराज (अनुवाद: नरेश गोस्वामी)
By Giampaolo Tomassetti (an Italian painter)उत्तर औपनिवेशिकता और सबाल्टर्न अध्ययन से संबद्ध सुदीप्त कविराज दक्षिण एशियाई राजनीति और बौद्धिक इतिहास के विशेषज्ञ हैं, सम्प्रति कोलम्बिया विश्वविद्यालय के...
View Articleदिनकर : एक आत्मकथा जो लिखी नहीं गई : प्रवीण प्रणव
प्रवीण प्रणव माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्य कर रहें हैं और साहित्य में भी उनकी रुचि है. उनके दो कविता संग्रह और कुछ लेख आदि प्रकाशित हैं. रामधारी सिंह दिनकर ने...
View Articleरुस्तम : न तो मैं कुछ कह रहा था : प्रयाग शुक्ल
आवरण : तेजी ग्रोवरसूर्य प्रकाशन मन्दिर, बीकानेरसंस्करण : २०२०मूल्य : २०० रुपये रुस्तम की कविताएँ प्रयाग शुक्लरुस्तम की कविताएँ मुझे प्रिय हैं.उनसे कविता...
View Articleहरि मृदुल के दोहे
दोहा ‘हिंदी’ का जातीय छंद है, जिस छंद में कबीर और बिहारी आदि महाकवि लिख चुके हों उसमें कुछ नया कहना और नये ढंग से कहना बहुत चुनौतीपूर्ण है. निदा फ़ाज़ली ने कुछ दोहे इधर लिखे थे. कवि हरि मृदुल भी दोहों...
View Articleनिराला : इलाहाबाद के पथ पर दलित स्त्री : रजनी दिसोदिया
निरालाइलाहाबाद के पथ पर दलित स्त्री रजनी दिसोदिया वह तोड़ती पत्थरदेखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ परवह तोड़ती पत्थर कोई न छायादारपेड़, वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;श्याम...
View Articleसाधना : मुलाक़ात हो न हो : प्रवीण प्रणव
पुस्तक : ज़बाने यार मनतुर्कीलेखक : प्रबोध कुमार गोविलप्रकाशक : बोधि प्रकाशनपृष्ठ संख्या : 143मूल्य : 150 रुपये साधनमुलाक़ात हो न होप्रवीण प्रणव बोधि प्रकाशन, जयपुर से प्रकाशित प्रबोध कुमार गोविल की...
View Articleकृष्ण कल्पित : || गद्य की ग़ुरबत उर्फ़ छंदों को देश-निकाला ||
वैद्य को कविराज भी कहा जाता था. प्राचीन सभी विद्याएँ छंद की मदद से कंठस्थ हो लम्बे समय तक सुरक्षित रहीं,चाहे वह कौटिल्य का अर्थशास्त्र ही क्यों न हो. पर ये कविताएँ न थीं. छंद भर होने...
View Articleएक विदुषी पतिता की आत्मकथा (मानदा देवी) : विमल कुमार
(प्रकाशक : श्रुति बुक्स, गाजियाबाद) मानदा देवी द्वारा लिखित और १९२९ में बांग्ला भाषा में प्रकाशित ‘एक विदुषी पतिता की आत्मकथा’ संभवतः भारत में प्रकाशित किसी वेश्या की पहली आत्मकथा है. जिसका अनुवाद...
View Articleस्त्री-दर्पण : नवजागरण और स्त्री-पत्रकारिता : गरिमा श्रीवास्तव
(रामेश्वरी देवी नेहरू)‘स्त्री-दर्पण’ पत्रिका का प्रकाशन जून १९०९ में प्रयाग से शुरू था इसकी संपादिका रामेश्वरी देवी नेहरू और प्रबंधक कमला देवी नेहरू थीं. इसमें स्त्री मुद्दों पर सामाजिक राजनीतिक लेख...
View Articleनीलोत्पल : दृश्य में सिर्फ़ करुणा नहीं थी
(painting courtesy : Labani Jangi)कोरोना काल में अपने-अपने घरों को लौटते हुए करोड़ों लोगों का जन-समूह यातनाओं के रास्ते पर चलते हुए दिखा. यह विवशता,पलायन और यन्त्रणा का एक ऐसा शोक गीत है जो अब भी कानों...
View Articleनागार्जुन के साहित्य में स्त्री : रेखा पाण्डेय
आज जनकवि नागार्जुन की बाईसवीं पुण्यतिथि है. इस अवसर पर ‘जनकवि नागार्जुन स्मारक निधि’ द्वारा समारोह का आयोजन होता है और जनकवि नागार्जुन स्मारक निधि सम्मान की घोषणा होती है. नरेश सक्सेना,राजेश जोशी और...
View Articleरज़ा : जैसा मैंने देखा (५ ) : अखिलेश
प्रख्यात चित्रकार सैयद हैदर रज़ा पर आधारित श्रृंखला ‘रज़ा: जैसा मैंने देखा’ की इस कड़ी में अखिलेश ने उनके चित्रों की मूल विशेषता ‘दृश्य चित्रण’ को बताते हुए, फ़्रांस के चित्रकारों की राय रखी है. इसके साथ...
View Articleलुइज़ ग्लुक से बातचीत और उनकी कुछ कविताएँ: अनुवाद रीनू तलवाड़
अंग्रेजी भाषा में लिखने वाली अमेरिकी कवयित्री लुइज़ ग्लुक (जन्म : २२ अप्रैल १९४३) को उनकी कविताओं के लिए २०२० के नोबेल की घोषणा के बाद हिंदी में उनकी ख़ूब चर्चा रही. नोबेल पाने वाली वह सोलहवीं महिला...
View Articleकामायनी और राम की शक्तिपूजा की मिथकीय पुनर्रचना : विनोद तिवारी
‘मैन अगेंस्ट मिथ’ के लेखक बैरो डनहैम का मानना है कि दर्शन को मानव-मुक्ति का साधन होना चाहिए. सामाजिक अर्थों में मानव-मुक्ति के लिए वस्तुपरकता की जरूरत होती है. आध्यात्मिकता और अलौकिकता के रथ पर सवार...
View Articleयशोदा देवी: उपनिवेश और आयुर्वेदिक चिकित्सा: सौरव कुमार राय
उपनिवेश के विरुद्ध भारत का संघर्ष ‘नवजागरण’ की जब शक्ल ले रहा था तब उसकी एक लड़ाई चिकित्सा के क्षेत्र में भी लड़ी जा रही थी. इसे ‘आयुर्वेदिक राष्ट्रवाद’ भी कह सकते हैं. यह पुनरुत्थान अनेक रूपों में प्रकट...
View Articleसूर्योदय सूक्त : विनय कुमार
‘चमकते प्रकाश में घुल-मिल गईं उषाएं’ऋग्वेद (मण्डल:१,सूक्ति:९२.२, अनुवाद-गोविन्द चंद्र पाण्डेय) सूर्य और जल भारतीय संस्कृति के केंद्र में हैं. ऋग्वेद में सूर्योदय पर अद्भुत कविताएँ मिलती हैं. हिंदी में...
View Articleरज़ा : जैसा मैंने देखा (६ ) : अखिलेश
मूर्धन्य चित्रकार सैयद हैदर रज़ा पर अखिलेश द्वारा लिखे जा रहे ‘रज़ा : जैसा मैंने देखा’ का नवीनतम अंश प्रस्तुत है. अपनी पहली पत्नी से तलाक़ के बाद रज़ा ने फ़्रांसीसी चित्रकार जानीन से विवाह कर लिया. इस मेल...
View Articleस्याही की गमक (यादवेन्द्र) : गीता दूबे
स्त्री मुक्ति की कहानियाँ गीता दुबे स्त्री देश या विदेश के किसी भी हिस्से की क्यों ना हो उसकी सोच, उसकी समस्याएं...
View Articleनलिन विलोचन शर्मा : शिवमंगल सिद्धांतकर
नकेनवादी, प्रपद्यवादी कवि, आलोचक और चिंतक नलिन विलोचन शर्मा हिंदी में रहस्य की तरह हैं और उनके लेखन तथा व्यक्तित्व को लेकर रुचि अभी भी बनी हुई है जैसे मलयज के प्रति. ठीक मलयज की तरह उन्हें भी लिखने के...
View Articleलव - जेहाद : आनंद बहादुर
लव-जेहादआनंद बहादुर वह एक काली लड़की थी.उसका नाम काली लड़की ही है. एक बार लड़की काली हो जाये, फिर उसका उससे सार्थक नाम कोई दूसरा हो ही नहीं सकता. उसका भी स्वतः स्फूर्त नामकरण हो चुका था. इससे फिर कोई मतलब...
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