हमारे समय में गांधी : सूरज पालीवाल
महात्मा गांधी की १५१ वीं जयंती पर उन्हें स्मरण करते हुए मैं सोच रहा था कि बापू आज जिंदा होते तो क्या कर रहे होते ? अपने आश्रम में क्या वे एकांत साधना कर रहे होते ? क्या वे कहीं किसानों और मजलूमों के...
View Articleरज़ा : जैसा मैंने देखा (३) : अखिलेश
सुप्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा (२२ फरवरी,१९२२–२३ जुलाई, २०१६)के चित्रों में बिंदु और वृत्त की उपस्थिति से सम्मोहक आकर्षण पैदा होता है. उनके चित्रों और रंग-संयोजन पर चर्चा कर रहें हैं, रज़ा पर आधारित...
View Articleदेवदासी : समाज और संस्कृति : गरिमा श्रीवास्तव
वाल्टर बेन्यामिन का यह कथन कि ‘सभ्यता का इतिहास बर्बरता का भी इतिहास है’ स्त्री के सन्दर्भ में सच के बहुत निकट है. मंदिर भक्ति और अध्यात्म के साथ-साथ ज्ञान और कला के केंद्र भी बने इसमें किसी को क्या...
View Articleउमा नेहरु और स्त्रियों के अधिकार (प्रज्ञा पाठक) : ललिता यादव
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में नेताओं का वकालत और लेखन से गहरा सम्बन्ध था, इनमें से बहुत तो पत्र-पत्रिकाओं के संपादक भी रहें हैं. स्त्रियाँ भी इसमें पीछे नहीं थीं. राजनेता, लेखिका और स्त्री अधिकारों की...
View Articleकास्ट आयरन की इमारत : अम्बर पाण्डेय
हिंदी कहानी में बहुत कुछ बदल रहा है. नई सदी की कथा-शैली की विशेषताओं में एक है ऐतिहासिक पात्रों की उपस्थिति. कथाकार संदर्भित काल-खंड की भाषा और व्यवहार को अनुसंधान और अंतर-दृष्टि से इस तरह कथा में मिला...
View Articleआख़िरी गाँव (ज्ञान चंद बागड़ी) : रामानंद राठी
ज्ञान चंद्र बागड़ी समाजशात्र और मानवशास्त्र के अध्ययन अध्यापन से जड़े हैं. उनका पहला उपन्यास आख़िरी गाँव का प्रकाशन वाणी ने किया है. इसकी चर्चा कर रहें हैं - रामानंद राठीआख़िरी गाँव की कथा रामानंद राठी...
View Articleवास्को डी गामा की साइकिल (प्रवीण कुमार): सत्यप्रकाश सिंह
चर्चित कथाकार प्रवीण कुमार का दूसरा कहानी संग्रह ‘वास्को डी गामा की साइकिल’ अभी-अभी ही राजपाल से प्रकाशित हुआ है. इसमें सात कहानियाँ शामिल हैं. इनमें से एक ‘सिद्ध पुरुष’आप समालोचन पर भी पढ़ चुके हैं. इस...
View Articleदयाशंकर शरण की कविताएँ
चित्र : steve mccurry हिंदी कविता में रिटायर्ड व्यक्ति की छवियां देखने को कम मिलती हैं. दयाशंकर शरण की इन कविताओं में इन्हें आप प्रमुखता से देख सकते हैं, पुराने मकान, बिछड़े मित्र और स्मृतियों से ये...
View Articleप्रोतिमा बेदी : उसने लास्य चुना और चुना प्रेम : रंजना मिश्र
प्रोतिमाबेदीउसने लास्य चुना और चुना प्रेम रंजना मिश्रकलाकार मानवता और सोच की परिधियों को हमेशा ही विस्तृत करते आए हैं. वे उस दुनिया के बाशिंदें हैं जो उनकी आत्मा में बसता है. उसी दुनिया को ज़मीन पर...
View Articleकथा - गाथा : मुण्डक : प्रचण्ड प्रवीर
“प्रचण्ड प्रवीर हिंदी कहानी के इतिहास में सबसे बीहड़ प्रतिभा है. यही देखना है कि वह कहाँ पहुँचकर पूरा ''वयस्क'' होता है. उसे पढ़ना आसान नहीं है. वह अपनी हर कहानी में अपने और अपने पाठकों के लिए ऊँची और...
View Articleप्रोतिमा बेदी : उसने लास्य चुना और चुना प्रेम: रंजना मिश्र
लेख ‘अमूर्तन का आलाप’ में रंजना मिश्र ने यह रेखांकित किया था कि प्रोतिमा बेदी के जीवन में पंडित जसराज अमूल्य और दुर्लभ धरोहर थे. ख़ुद प्रोतिमा नृत्य की दुनिया में अभूतपूर्व और अन्यतम हैं यह इस आलेख को...
View Articleरणेन्द्र से संतोष अर्श की बातचीत
रणेन्द्र द्वारा आदिवासी पृष्ठभूमि पर लिखे उपन्यासों- ‘ग्लोबल गाँव के देवता’ और ‘गायब होता देश’ ने वन और उसके वासियों की संस्कृति, संकट और संघर्ष को सबलता से प्रस्तुत करने के कारण ख्याति अर्जित की है....
View Articleअदम गोण्डवी : मुक्तिकामी चेतना का कवि : आनन्द पाण्डेय
‘भूख के अहसास को शेरो सुखन तक ले चलो.या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले चलो.’(अदम गोंडवी) वरिष्ठ और महत्वपूर्ण आलोचक मैनेजर पाण्डेय ने अदम गोंडवी की कविता पर लिखा है– “अदम गोंडवी की कविता आज की हिंदी...
View Articleमार्खेज़ : सुश्री फ़ोर्ब्स की सुखद गर्मियाँ : (अनुवाद : सुशांत सुप्रिय)
लगभग एक दशक से समालोचन पर आप विश्व के स्तरीय साहित्य का अनुवाद पढ़ते आ रहें हैं. कोशिश रहती है कि प्रामाणिक और बेहतर अनुवाद आपको मिले. संसार के महानतम कथाकारों में शामिल गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज़ के...
View Articleरज़ा : जैसा मैंने देखा (४) : अखिलेश
रज़ा : जैसा मैंने देखा (४) हुसैन की प्रेमिकाएँ, रंगबाज बेंद्रे और रज़ा को ख़त अखिलेश रज़ा के इन चित्रों से मध्य प्रदेश के कई युवा कलाकार...
View Articleजन्मशताब्दी वर्ष : चंद्रकिरण सौनरेक्सा
लेखिकाओं के जन्मशताब्दी वर्ष आयोजन को लेकर हिंदी समाज अनुदार दिखता है. कथाकार चन्द्रकिरण सोनरेक्सा का जन्म आज ही के दिन सौ वर्ष पूर्व हुआ था. उनके लेखन पर चर्चाएँ कम देखने में आती हैं. उम्मीद है इस...
View Articleमैनेजर पाण्डेय : दृष्टि और मीमांसा : राजाराम भादू
मैनेजर पाण्डेय : दृष्टि और मीमांसाराजाराम भादू आलोचक मैनेजर पाण्डेय की ‘दृष्टि’ (Vision) एक ऐसी दृष्टि है जो अपनी सूक्ष्म अन्तर्दृष्टि के बतौर कृति में गहरे उतर कर उसके निहितार्थों को उजागर करती है,...
View Articleमैं और मेरी कविताएँ (ग्यारह) : सविता सिंह
‘At the end of my sufferingthere was a door.’Louise Glückसमकालीन कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत आपने निम्न कवियों की कविताएं पढ़ीं और जाना कि वे कविताएं क्यों लिखते हैं....
View Articleमहाभारत: चरम का सौन्दर्य : सुदीप्त कविराज (अनुवाद: नरेश गोस्वामी)
महाभारत: चरम का सौन्दर्य: सुदीप्त कविराज(अनुवाद: नरेश गोस्वामी) महाभारत आधुनिक उपन्यास नहीं है- इसकी रचना और पाठ का तर्क आधुनिक कथाओं से एकदम अलग है. आधुनिक गल्प अपने सबसे सशक्त रूप में दुनिया की एक...
View Articleस्मृति : भीमसेन त्यागी : मोहन गुप्त
कथाकार भीमसेन त्यागी पर यह स्मृति आलेख मोहन गुप्त ने लिखा है. इस आलेख में साहित्य,प्रकाशन और संघर्ष का पूरा एक युग समाया हुआ है. भीमसेन त्यागी को समझने में इस आलेख की केन्द्रीय भूमिका रहेगी. कोई कैसे...
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