परख : अपने हस्तिनापुरों में (प्रभा मुजुमदार)
अपने हस्तिनापुरों में (कविता-संग्रह)कवयित्री: प्रभा मुजुमदार प्रकाशक: बोधि प्रकाशन,जयपुरप्रथम संस्करण: 2014मूल्य: 100 रु., पृष्ठ संख्या: 148सत्ताऔरसमाजकोआईनादिखातीकविताएँ...
View Articleविष्णु खरे : किसके घर जाएगा सैलाबे बला
लोकतंत्र में व्यक्ति की गरिमा और आज़ादी के पक्ष में पुरस्कार वापसी का विस्तार साहित्य, कला, इतिहास, विज्ञान से होते हुए अब फ़िल्म-संसार तक है. किसी भी सभ्य समाज में इतनी सहिष्णुता तो होनी ही चाहिए कि वह...
View Articleसबद भेद : कवि विजय कुमार : अच्युतानंद मिश्र
कवि आलोचकविजय कुमार के तीन कविता संग्रह अदृश्य हो जाएँगी सुखी पत्तियां, चाहे जिस शक्ल से और रातपालीप्रकाशित हैं. आलोचना के क्षेत्र में भी उनका गम्भीर कार्य है. उनके कवि कर्म पर अच्युतानंद मिश्र का...
View Articleसबद भेद : सन् 1857 का विद्रोह: सुराज के लिए संघर्ष : मैनेजर पाण्डेय
भारत और इंग्लैण्ड के तथाकथित ‘साझे रिश्तें’ (जिसे अक्सर राजनेता ब्रिटेन के सरकारी दौरों पर दुहराते रहते हैं) बराबरी और परस्पर सम्मान के नहीं थे. और ये अगर ‘रिश्ते’ थे भी तो एक गुलाम देश और एक औपनिवेशिक...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : अपर्णा मनोज
पेंटिग : Paresh Maity: SUNLIGHTअपर्णा मनोज कविताएँ लिख रही हैं, कहानियाँ प्रकाशित हुई हैं और उनके अनुवादों ने भी ध्यान खींचा है. प्रस्तुत कविताओं का वितान वैश्विक है. दुनिया में जहाँ- जहाँ भी दर्द हैं...
View Articleसबद भेद : मुक्तिबोध : सिद्धान्त मोहन
गजानन माधव मुक्तिबोध जितने महत्वपूर्ण कवि हैं उतने ही बड़े आलोचक भी. अपने समय की यातना और आतंक को जैसा मुक्तिबोध ने पढ़ा है वैसा अब तक किसी लेखक ने नहीं. जटिल, विकट और अभाष्य यथार्थ की अभिव्यक्ति के लिए...
View Articleप्रेम के असम्भव गल्प में : आशुतोष दुबे
‘प्रेम के असम्भव गल्प में’ कवि आशुतोष दुबे का लिखा गद्य है, उनकी कविताओं की ही तरह भाषा के सौन्दर्य और लयात्मकता से भरपूर. भाषा में लिखने की शुरुआत प्रेम पर भी लिखने की शुरुआत है. न जाने ऐसा क्या है...
View Articleविष्णु खरे : सईद जाफ़री
सिनेमा और रंगमंच के बेहतरीन कलाकार सईद जाफ़री का पिछले १५ तारीख को देहांत हो गया. प्रेमचंद की कहानी पर आधारित सत्यजीत राय की फ़िल्म ’शतरंज के खिलाड़ी’ में उनके अभिनय के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता...
View Articleमंगलाचार : ज्योत्स्ना पाण्डेय
पेंटिग : Paresh Maity : MOONLIGHTज्योत्स्ना अर्से से कविताएँ लिख रही हैं. तमाम पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं. वैविध्य पूर्ण काव्य- संसार तो है ही शिल्प पर भी मेहनत दिखती है. ज्योत्स्ना पाण्डेय...
View Articleमनीषा कुलश्रेष्ठ : परम में उपस्थित वह अनुपस्थित
मनीषा कुलश्रेष्ठ के पाँच कहानी संग्रह (बौनी होती परछांई, कठपुतलियाँ, कुछ भी तो रूमानी नहीं, केयर ऑफ स्वात घाटी, गंधर्व – गाथा),तीन उपन्यास (शिगाफ़, शालभंजिका, पंचकन्या)और माया एँजलू की आत्मकथा ‘वाय...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : अविनाश मिश्र
पेंटिग : Robert Rauschenbergकविता लघुतम दूरी तय करके भाषा के संभव उच्चतम स्तर तक पहुचने की कोशिश करती है. कवि जोसेफ ब्रादस्की कविता को कब्र पर लिखे कुतबे की संतान इसीलिए कहते हैं. कविता में सूत्रता...
View Articleसबद भेद : विनोद कुमार शुक्ल का कवि-कर्म : रवीन्द्र के. दास
फोटो साभार; शाश्वत गोयलविनोद कुमार शुक्ल जितने बड़े उपन्यासकार हैं उतने ही बड़े कवि भी. विष्णु खरेठीक ही कहते हैं-‘उनकी कविता वह जलप्रपात है जिसमें सबकी आवाज़ों का कोरस समाया हुआ है’. इन आवाजों में एक...
View Articleपरख : राजनीतिक किराना स्टोर : अरविन्द कुमार
सामाजिक - राजनीतिक विसंगतियों पर प्रहार करते व्यंग्य द्वारिका प्रसाद अग्रवाल_________व्यंग्य करना आसान है, व्यंग्य लिखना नहीं. हंसी उड़ाना आसान है, लेकिन हंसी का पात्र बनना नहीं. खिल्ली उड़ाना, मज़ाक...
View Articleरेहाना जब्बारी की वसीयत : विनोद चंदोला
कोर्ट ट्रायल में रेहानाईरानी युवती रेहाना जब्बारी को 25 अक्तूबर 2014 को फांसी दी गई थी.वह 19 साल की थी जब उन्हें हत्या के अभियोग में गिरफ़्तार किया गया था पर वह अंत तक अपने इस दावे परक़ायम रहीं कि...
View Articleविष्णु खरे : अपनी सिने-दुनिया और ‘’असहिष्णुता’’
‘तंगनज़री’ एक खतरनाक बीमारी है, यह शको-सुब्हा से पैदा होती है, गलतफहमी से पलती बढ़ती है, मज़हबी खुराक पाते ही लाइलाज़ हो जाती है. इससे ‘सेंटिमेंट हर्ट’ टाइप की महामारी फैलने का भारी खतरा होता है.फिल्मी...
View Articleमंगलाचार : पल्लवी शर्मा
पल्लवी शर्मा एक प्रक्टिसिंग आर्टिस्ट हैं और कैलिफ़ोर्निया में विगत १८ वर्षों से रह रहीं हैं. उनकी कृतियां राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित हुई हैं और पसंद की गयी हैं.संत्रास, व्यर्थता...
View Articleसबद - भेद : नामवर सिंह की पुस्तक ‘कहानी नई कहानी’: राकेश बिहारी
पार्श्व में हजारीप्रसाद द्विवेदी : समालोचननामवर सिंह की आलोचना–पुस्तक ‘कहानी नयी कहानी’, हिंदी कहानी को समझने के लिए आधार-ग्रन्थ की तरह है. नामवर सिंह ने इसे एक दशक (१९५६-१९६५) की चिन्तन यात्रा की...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : राकेश रोहित
जब पूरा वातावरण कट्टरता, हिंसा और असहिष्णुता से भयाक्रांत हो और सत्ता के पहियों के नीचे मासूम, निर्दोष और खरे जन पिस रहे हों तब कविता क्या कर सकती है ? ऐसे थरथराते समय में अगर वह प्रेम को पाने, बचाने...
View Articleपरख : हर्ता कुँवर का वसीयतनामा
पूर्वोत्तर के आदिवासी जीवन पर हिंदी में मूल रूप से लेखन कम देखने को मिलता है. कथा साहित्य में तो इसकी कमी है ही. उदयभानु पाण्डेय का नवीनतम कहानी संग्रह ‘हर्ता कुँवर का वसीयतनामा’ की जमीन पूर्वोत्तर है....
View Articleरंग - राग : तमाशा : सारंग उपाध्याय
सिनेमा आधुनिक कला माध्यम है. इस माध्यम में तरह-तरह के प्रयोग होते रहे हैं. तकनीकी मदद से कल्पनाशीलता को मूर्त करने में ‘चल-चित्र’ दीगर कला माध्यमों से बहुत आगे निकल गया है. हिंदी फिल्मों को भी...
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