विष्णु खरे : ‘मुजरिम’ और ‘बेदाग़’ में बँटे करोड़ों
अभिनेता सलमान खान ‘हिट एंड रन’ कांड में रिहा हो ही गए. सवाल फिर भी कैद में है कि आखिरकार गाड़ी चला कौन रहा था ?. रसूखदार लोग पैसे और पहुंच के बल पर बरी हो जाते हैं. क्या न्याय व्यक्ति और व्यक्ति में...
View Articleकथा - गाथा : नीलम कुलश्रेष्ठ
रत्नागिरी की सुहानी शिन्दे का तकिया कलाम है – ‘पकड़करचलोतो’. एक साथ हाथ पकड़कर चलने से ही संघर्ष में सफलता मिलती है यह उसे उसके पिता ने समझा दिया था. मुंबई की अपनी खास हिंदी में कथाकार नीलमकुलश्रेष्ठने...
View Articleनिज घर : वीरेन डंगवाल : पंकज चतुर्वेदी
फोटो साभार : अशोक पांडेकवि वीरेन डंगवाल ने ‘स्याही ताल’ कविता संग्रह देते हुए लिखा- ‘चलो, कूद पड़ें अरुण देव ! शुभकामनाओं के साथ यह गुस्ताखी.’ बरेली जैसे शहर में भी कवियों के पीने – पिलाने की कोई...
View Articleमेघ दूत : अन्तोन चेख़फ़ (Enemies) : सुशांत सुप्रिय
कथाकार, नाटककार अन्तोन चेख़फ़ (29/जनवरी/1860-15/जुलाई/1904) पेशे से चिकित्सक थे. उन्हें विश्व के महानतम कथाकारों में गिना जाता है. ए ड्रीरी स्टोरी, द वाइफ (उपन्यास). अन्ना ऑन नेक, ए बैड बिजनेस, ए बलंडर,...
View Articleकथा-गाथा : अगली तारीख : राकेश बिहारी
न्याय पवित्र शब्द है, उससे भी मानवीय है न्याय पाने की इच्छा. न्याय पाने की प्रक्रिया से ही कहते हैं ‘राजतन्त्र’ और फिर ‘धर्मतंत्र’ का विकास हुआ. यह भी एक कडवी सच्चाई है कि आज न्याय की प्रक्रिया इतनी...
View Articleसबद भेद : कविता की दुनिया - २०१५ : ओम निश्चल
हिंदी कविता की दुनिया अथाह है, शायद ही ऐसा कोई शहर-नगर हों जहाँ कवि न रहते हों, कविता न लिखी सुनी जाती हो. औसत के असीम में कविताओं के शिखर जहाँ-तहां हैं. वरिष्ठ, कनिष्ठ, गरिष्ठ, सभी तरह के कवि हैं और...
View Articleविष्णु खरे : सिने-आलोचना का (भारतीय-हिन्दू?) रस-सिद्धांत
नाटक से सम्बन्धित पहला व्यवस्थित कार्य भरतमुनि का नाट्यशास्त्र है. यह उसके अन्वेषण, प्रयोगात्मक परीक्षण, प्रस्तुतीकरण और उसकी संवेदना का पहला प्रामाणिक अध्ययन है. ऐतिहासिक संदर्भो में नाटक के उद्भव की...
View Articleमंगलाचार : प्रमोद पाठक
Wooden Human Figures : Peter Demetzआज आपका परिचय कवि प्रमोद पाठकसे कराते हैं, वे बच्चों के लिए भी लिखते हैं. उनकी लिखी बच्चों की कहानियों की कुछ किताबें बच्चों के लिए काम करने वाली गैर लाभकारी...
View Articleपरख : दलदल (सुशांत सुप्रिय) : सुषमा मुनीन्द्र
सुशांत सुप्रिय के अनुवादों ने हिंदी जगत में ध्यान खींचा है. वे कवि और कथाकार भी हैं. उनका तीसरा कथा –संग्रह अंतिका प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. उनकी इस कृति की समीक्षा सुषमा मुनीन्द्र ने की है.दलदल...
View Articleनिज घर : सूखे ताल मोरनी पिंहके : अखिलेश
24 जुलाई1997 को सुल्तानपुर में कवि मानबहादुर सिंह की नृशंस हत्या ने सबको विचलित कर दिया था. गांवों – कस्बों और सुदूर अंचलों में साहित्यकार अदृश्य रहते हुए कई स्तरों पर संघर्ष करते हैं. उनका लिखा भी...
View Articleसूखे ताल मोरनी पिंहके : अखिलेश - २
कवि मान बहादुर सिंहपर समालोचन में ही प्रकाशित अखिलेशके संस्मरण पर विष्णु खरे ने कुछ सवाल उठायें हैं. अपना पक्ष रखते हुए अखिलेश और फिर विष्णु खरे.विष्णु खरे :_________________जबसे मानबहादुर जी की...
View Articleमंगलाचार : नवीन नीर
पेंटिग : Bernardo Siciliano (HOME)नीवन नीर चंडीगढ़ में रहते हैं. कविता लिखते हैं, सुनाते हैं. साहित्यिक आयोजनों की मेजबानी में वर्षों से सक्रिय हैं. कई संकलन प्रकाशित हुए हैं. नवीनतम बोधि प्रकाशन से...
View Articleनिज घर : सत्यदेव दुबे : सत्यदेव त्रिपाठी
सत्यदेव दुबे किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं. श्याम बेनेगल के ‘भारत एक खोज’ में चाणक्य की उनकी भूमिका को आज भी याद किया जाता है. इसके साथ ही वह एक बड़े रंगकर्मी थे, उनका जीवन बहुवर्णी और बीहड़ था. सत्यदेव...
View Articleविष्णु खरे : पवन मल्होत्रा बेनक़ाब
पवन मल्होत्रा को आप चेहरे से पहचानते होंगे, संभव है उनका नाम न जानते हों. हम फिल्मों के नाम पर केवल ‘मुख्य–धारा’ के नायक, नायिकाओं की चर्चा देखते सुनते रहते हैं. कला की दुनिया में ऐसे तमाम लोग हैं जो...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : आशुतोष दुबे (३)
‘विदा लेना बाक़ी रहे’आशुतोष दुबे का चौथा कविता संग्रह है जो इस वर्ष प्रकाशित हुआ है.उनकी कुछ कविताओं के अनुवाद भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी और जर्मन में भी हुए हैं.उनकी इस सृजनात्मक यात्रा में जहाँ...
View Articleहस्तक्षेप : एकलव्यों की शहादत और रोहित वेमुला
हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के ‘सायंस टेक्नोलॉजी एंड सोसायटी स्टडीज'के पीएच.डी. छात्र रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी ने समाज, छात्र-राजनीति और शिक्षा-तन्त्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विश्वविध्यालयों की स्थापना...
View Articleनिज घर : कृष्णा सोबती : एक सोहबत : गरिमा श्रीवास्तव
‘डार से बिछुड़ी’, ‘मित्रो मरजानी’, ‘यारों के यार : तिन पहाड़’, ‘सूरजमुखी अंधेरे के’, ‘सोबती एक सोहबत’, ‘जिंदगीनामा’, ‘ऐ लड़की’, ‘समय सरगम’, ‘जैनी मेहरबान सिंह’, ‘बादलों के घेरे’, ‘हम हशमत’ आदि की...
View Articleहस्तक्षेप : दर - बदर मनुष्यता : ओम निश्चल
शायर शकेब जलाली उत्तर-प्रदेश के बदायूं के रहने वाले थे, विभाजन में पाकिस्तान चले गए जहाँ १९६४ में उन्होंने आत्महत्या कर ली. उनका एक शेर है – काँटों की बाड़ फांद गया था मगर शकेबरस्ता न मिल सका मुझे...
View Articleकथा - गाथा : दर्दजा : जयश्री रॉय
वाणी प्रकाशन से इस वर्ष चर्चित कथाकार जयश्री रॉय का उपन्यास दर्दजा प्रकाशित हुआ है. इस उपन्यास का एक अंश और साथ में अभयकुमार दुबे (सीएसडीएस)) की टिप्पणी ख़ास आपके लिए. “जयश्री रॉय की कृति ‘दर्दजा’...
View Articleकालजयी : कफ़न : रोहिणी अग्रवाल
कफ़न प्रेमचन्द की आखिरी कहानी है. यह मूल रूप में उर्दू में लिखी गयी थी. ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया’ की पत्रिका ‘जामिया’के दिसम्बर, १९३५ के अंक में यह प्रकाशित हुई, इसका हिंदी रूप चाँद के अप्रैल, १९३६...
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