विष्णु खरे : हिन्दी सिनेमा का पहला ‘रेआलपोलिटीक’-वर्ष
विष्णु खरे का हिंदी और विश्व फिल्मों से नाता 5 दशकों से भी अधिक पुराना है. वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में लिखते रहे हैं. उनका मानना है कि हिंदी सिनेमा का 2015 का वर्ष सबसे जुदा है. उन्हीं के...
View Articleबात - बेबात : स्मार्ट सिटी : संजय जोठे
संजय जोठे युवा समाजशास्त्री हैं. धीर-गम्भीर विषयों पर उतनी ही गंभीरता से लिखते हैं. पर उनके अंदर एक व्यंग्यकार भी है, इसका पता मुझे भी नहीं था. प्रस्तावित भारतीय स्मार्ट शहरों पर उनका यह चुभता हुआ...
View Articleसबद भेद : पंकज सिंह : ओम निश्चल
पंकज सिंह पत्रकार, प्रतिबद्ध एक्टिविस्ट और हिंदी के कवि थे, उनके तीन कविता संग्रह ''आहटें आसपास''''जैसे पवन पानी''और ''नही''प्रकाशित हैं. उनके असमय अवसान ने हिंदी जगत को और असहाय किया है. उनको उनकी...
View Articleमंगलाचार : पूनम शुक्ला
पूनम शुक्ला का एक कविता संग्रह, ‘सूरज के बीज’प्रकाशित है. हिंदी की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कविताएँ प्रकाशित हैं, हो रही हैं. आज उनकी कुछ कविताएँ समालोचन में भी पढ़िए और अपनी राय दीजिये. पूनम शुक्ला...
View Articleपरख : उम्मीद (कविता संग्रह) : प्रदीप मिश्र
उम्मीद (कविता संग्रह)साहित्य भंडार , इलाहबाद.प्रथम संस्करण 2015 अंगूठा भर हैं नन्हे मियाँ देवेन्द्र आर्यएक कहावत है- ’उम्मीद से’,पेट से होने (गर्भवती) होने के अर्थ में. थोड़ा सा...
View Articleरीझि कर एक कहा प्रसंग : विष्णु खरे
‘रीझि कर एक कहा प्रसंग’ ‘एडिटर च्याव्स’ किस्म का कालम है. आज यहाँ विष्णु खरे (9 फरवरी, 1940) की एक कविता प्रस्तुत है – A B A N D O N E D. विष्णु खरे कई तरह की सक्रियताओं के साथ हिंदी में उपस्थित हैं....
View Articleकथा - गाथा : नताशा करेगी विवाह भी : ललिता यादव
ललिता यादव की कहानी ‘नताशा करेगी विवाह भी’ पश्चिमी उत्तर–प्रदेश की पृष्ठभूमि में विकसित प्रेमकथा है जो प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुलिस महकमे को आधार बनाकर लिखी गयी है. इसमें समानांतर कई कथाएं चलती हैं....
View Articleमंगलाचार : विशाखा राजुरकर
बसंत है और इजहारे मोहब्बत का चलन भी. जश्ने–बसंत और बसंत-उत्सव नाम से इसे मनाने की लम्बी परम्परा भी है. आइये प्रेम की धीमी आग में सुलगती युवा कवयित्री विशाखा राजुरकर की इन कविताओं को पढ़ें. विशाखा...
View Articleविष्णु खरे : निदा फ़ाज़ली
हिंदी सिनेमा का उर्दू शायरी से गहरा, लम्बा, मानीखेज़ रिश्ता रहा है. मरहूम निदा फ़ाज़ली इस सिलसिले की अहम कड़ी थे. शायरी में उनके फकीराना अंदाज़ से हम सब वाकिफ हैं पर उनकी शख्शियत भी कम दिलचस्प न थी. उनकी,...
View Articleमीमांसा : विलगाव, आधुनिक विज्ञान और मध्यवर्ग : अच्युतानंद मिश्र
Ward, 1970-71 : George TookerAlienation(अलगाव,विलगाव, अपरिचय, अजनबीपन आदि) का सिद्धांत न केवल समाज विज्ञान में बल्कि सहित्य में भी महत्वपूर्ण माना जाता है. सामाजिक प्राणी से एक अकेले असहाय इकाई में...
View Articleसबद भेद : शहंशाह आलम का काव्य - संसार : सुशील कुमार
बीसवीं शताब्दी के आखिरी दशकों से अपनी काव्य-यात्रा शुरू करने वाले कवियों पर सम्यक आलोचना का आभाव है. कविशहंशाह आलम के पांच कविता संग्रह प्रकाशित हैं. उन्हें पहचाना जाता है पर उनमें अलहदा क्या है इसकी...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : लवली गोस्वामी
लवली गोस्वामीलवली गोस्वामीदर्शन और मनोविज्ञान की अध्येता हैं. सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हैं. भरतीय मिथकों पर उनकी पुस्तक ‘प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता’प्रकाशित है. कविताएँ लिखती हैं. उनकी...
View Articleमति का धीर : प्रेमशंकर रघुवंशी
कवि और गीतकार प्रेमशंकर रघुवंशी (8 जनवरी 1936-21 फरवरी 2016) की स्मृतियों और उनकी कविताओं से बुना गया यह शोक-आलेख व्यक्ति और साहित्यकार के रूप में प्रेमशंकर रघुवंशी को प्रत्यक्ष करता है. आकार लेती...
View Articleअनूप सेठी : चौबारे पर एकालाप (लम्बी कविता)
पेंटिग : Imran Hossain Pipluलंबी कविताचौबारे पर ए का ला पअनूप सेठी मैं इस मचान पर खड़ा हूं चीरें फाड़ें तो लकड़ी का फट्टा ठस्स नट इतराए तो सीढ़ी मैं बेलाग हो चाहता हूं नीचे उतरना ज़मीन पर खड़े...
View Articleविष्णु खरे : एक ‘भाई’ मुजरिम एक ‘भाई’ मुल्ज़िम
अभिनेता संजय दत्त मार्च 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में 42 महीने कैद की सजा काट कर रिहा हुए हैं. (अंध/छद्म) राष्ट्रवाद के इस उन्मादी दौर में इस रिहाई को आप कैसे देखते हैं ? अगर...
View Articleमेघ - दूत : अम्बर्तो इको
This is Not the End of the Book’ डिजिटल संचार के इस दौर में किताबों के भूत, भविष्य और वतर्मान पर ‘अम्बर्तो इको’, ज्यांक्लाउदेकैरिएयर’तथा‘ज्यांफिलिपडेटोनाक’ के बीच का संवाद है. इसके एक अंश का अनुवाद...
View Articleपरख : कुछ तो बाकी है (कहानी संग्रह)
समीक्षा एक अकेली औरत की दुनिया सूरज प्रकाशरजनी मोरवाल का सामयिक प्रकाशन से छपा पहला कहानी संग्रह ‘कुछ तो बाकी है’मेरे सामने है. सभी कहानियां पढ़ लेने के बाद मेरे मन में जो पहला...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : प्रमोद पाठक
पेंटिग : Roman Maresप्रमोद पाठक को कुछ दिन पहले आपने समालोचन में पढ़ा, उन्हें भरपूर सराहना भी मिली, उनकी कविताओं में कथ्य की ताज़गी और प्रवाह को रेखांकित किया गया था. आज उनकी कुछ नयी कविताएँ आपके लिए....
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : महेश वर्मा
कला कृति : Rana Begumमहेश वर्मा की कविताएँ __________________________________याद दिलाना मुझे कब बोलना है मुझसे अधिक तुम याद रखना अंतरालों को याद रखना कहाँ मेरी चुप...
View Articleमेघ - दूत : जोसे डिसूज़ा सारामागो
José de Sousa Saramago (16 November 1922 – 18 June 2010) पुर्तगाली लेखक हैं. साहित्य के लिए उन्हें 1998का नोबेल सम्मान प्राप्त है. उनकी कृतियों के लगभग सभी भाषाओँ में अनुवाद हुए हैं. धार्मिक भावनाओं...
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