सैराट - संवाद : (५) : दर्शक क्यों ‘सैराट’ हुए होंगे?
मराठी फ़िल्म ‘सैराट’ पर संवाद के अंतर्गत आपने कल मराठी के शीर्षस्थ कथाकार, नाटककार तथा नाट्य समीक्षक जयंत पवारका मराठी में लिखा आलेख ‘प्रेक्षक का ''सैराट''झाले असावेत?’ देखा/ पढ़ा. इसका हिंदी में अनुवाद...
View Articleसबद भेद : हिंदी कविता के डेढ़ दशक : ओम निश्चल
ओम निश्चल ने पिछले डेढ़ दशक में प्रकाशित कविता-संग्रहों में से अपनी पसंद के संग्रहों के आधार पर डेढ़ दशक की कविताओं का एक लेखा-जोखा तैयार किया है. इसमें समकालीन सृजनरत पीढ़ियों का समावेश है. संग्रहों के...
View Articleसैराट - संवाद (६) : क्या इस हत्या में आप भी शामिल हैं ?
सैराट अब एक फ़िल्म भर नहीं है. इसे सिर्फ सिनेमा के तत्वों से नहीं समझा जा सकता. इसकी ‘सफलता’ की जड़ें दरअसल सदियों पुराने भारतीय समाज के विभाजन में हैं, ‘पार्थक्य’ का यह सिनेमाई संस्करण गहराई से उस...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : कात्यायनी
(पेंटिग : Bernardo Siciliano : PANIC ATTACK II)कात्यायनी की कविताएँ प्रतिबद्ध और साहसिक हैं, इसलिए असरदार हैं कि उनमें समझौते नहीं हैं न रियायत बरती गयी है. वह वरिष्ठ ही नहीं विरल भी हैं. इधर की उनकी...
View Articleपरख : रेत-रेत लहू (जाबिर हुसेन)
रेत-रेत लहू (कविता-संग्रह) जाबिर हुसेनप्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, 1-बी, नेताजी सुभाष मार्ग, नई दिल्ली-110002रेत-रेत लहू (जाबिर हुसेन) रेत पर घटित होते हमारे समय की कविताएँ शहंशाह आलमयह समय...
View Articleविष्णु खरे : क्यों दिखाऊँ मैं प्रधानमंत्री को अपनी फ़िल्म ?
कैन लोचकी फिल्म "आइ,डेनिअल ब्लेक" को इस वर्ष के कान फिल्म महोत्सव का सर्वोच्च पुरस्कार ‘’पाल्म द्’ओर’’दिया गया है. उन्होंने साफ कहा है कि वह नहीं चाहते कि उनकी फ़िल्म उनके प्रधानमन्त्री जेम्स कैमेरॉन...
View Articleपरख : मल्यों की डार : गीता गैरोला
‘तभी तो इतनी मुश्किल परिस्थितियों में भी जिंदा रह पाती हैं पहाड़ी औरतें, पेड़ पौधों की हरियाली, फूलों का रंग, और बास सब औरतों के गाये गीतों से ही बनते हैं.’लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता गीता गैरोला की...
View Articleसैराट - संवाद (७) : कवि नागराज मंजुले और फ़िल्म
मराठी फ़िल्म ‘सैराट’ की चर्चा हिंदी में समालोचन से आगे बढती हुई टीवी के प्राइम शो तक पहुंच चुकी है. कुछ दिन पहले एनडीटीवी में मशहूर पत्रकार रवीश कुमारने समालोचन में प्रकाशित चार लेखों के हिस्सों से...
View Articleसैराट - संवाद : (८) : सैराट की जमीन : सारंग उपाध्याय
अंतरजातीय विवाह भारतीय समाज का वह लिटमस पेपर है जिससे आप जातिवाद के ज़हर का पता लगा सकते हैं. यह अकारण नहीं है कि ऐसे विवाह बमुश्किल पांच प्रतिशत भी नहीं हैं, जबकि विश्व के अधिकांश हिस्सों में शादियाँ...
View Articleनिज घर : मृत्यु के बाद कहानी मुझे रचेगी : प्रियंवद
‘रचना समय’ का कहानी विशेषांक (दो भागों में) अभी प्रकाशित हुआ है. संपादक हरि भटनागर और इस विशेषांक के अतिथि संपादक राकेश बिहारीका श्रम और सुरुचि दिखती है. कथाकारों, आलोचकों, संपादकों के साथ पाठकों के...
View Articleपरख : अथ-साहित्य : पाठ और प्रसंग (राजीव रंजन गिरि)
अथ-साहित्य : पाठ और प्रसंगराजीव रंजन गिरिप्रकाशक : अनुज्ञा बुक्स, 1/10206वेस्ट गोरख पार्कशाहदरा, दिल्ली – 110032मूल्य : 750/- रुपये पृष्ठ 391साहित्य के आयाम...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : कुसुमाग्रज राष्ट्रीय पुरस्कार
फ़ोटो क्रेडिट : रूलान्ड फ़ोसेन,अम्स्तर्दम जब विष्णु खरेको इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘कुसुमाग्रज राष्ट्रीय पुरस्कार’दिया गया तब मराठी के महत्वपूर्ण कवि प्रफुल्ल शिलेदारने गम्भीरता से पुरस्कृत कवि के...
View Articleमति का धीर : मुद्राराक्षस
हिंदी के मौलिक चिंतक, कथाकार, नाटककार, आलोचक और समय- संस्कृति के अप्रतिम व्याख्याकार मुद्राराक्षस अपने आप में एक संस्था थे. वर्चस्व की संस्कृति, विचार और समाज के समानांतर उनकी आवाज़ का एक प्रश्नाकुल...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : विशाल श्रीवास्तव
‘पीली रोशनी से भरा काग़ज़’विशाल श्रीवास्तव का पहला कविता संग्रह है जिसे साहित्य अकादेमी ने ‘नवोदय योजना के अंतर्गत ’प्रकाशित किया है. विशाल की कविताएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रशंसित होती रही हैं. कविताओं...
View Articleविष्णु खरे : उड़ता पंजाब
फ़िल्म ‘उड़ता पंजाब’ सत्ता-सेंसर से आज़ाद होकर लोक-वृत्त में है. नशा, कला, नियंत्रण, अस्मिता, न्याय, प्रचारऔर व्यवसायकी सीढियों से चढ़ता हुआ यह सफलता के कौन से आसमान पर पहुचेगा? और कितना ‘सार्थक’ है ? यह...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : योग का धर्म : संजय जोठे
योग का अर्थ है ‘जुड़ना’, इसे ‘संतुलन’भी कहा गया है. ज़ाहिर है ये दोनों चीजें सेहत के लिए जरूरी हैं. आज ‘स्वास्थ्य’, बाज़ार के लिए भारी मुनाफे (कई बार तो लूट) का माध्यम बना हुआ है. विज्ञान/बाज़ार के पास...
View Articleसैराट – संवाद (९) : सिनेमा, सामाजिक चिंताएं और बुद्धिजीवी : संदीप सिंह
समालोचन में मराठी फ़िल्म सैराट पर ज़ारी बहस और धारदार होती जा रही है. संदीप सिंह ने फ़िल्म, उसके प्रभाव और उसकी सामाजिक सार्थकता पर बात की है, पूर्व के प्रकाशित आलेखों पर भी उनकी तीक्ष्ण दृष्टि है. किसी...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : मुसाफ़िर बैठा (२)
पेंटिग : rachel crossकविताओं की जटिलता को समझने से बचने का सुविधाजनक तरीका है उन्हें वर्गीकृत कर लेना. जैसे ही आप कुछ कविताओं को ‘स्त्री –चेतना’ या ‘दलित – चेतना’ या ‘जनवादी’ वगैरह डिब्बों में बंद करते...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : नवनीत पाण्डेय
नवनीत पाण्डेय (December 26, 1962) का ‘सच के आस-पास’ शीर्षक से कविता संग्रह प्रकाशित है.‘1084वें री मा’नाम से महाश्वेता देवी के चर्चित बांग्ला उपन्यास का राजस्थानी में उन्होंने अनुवाद किया है. इसके साथ...
View Articleसबद भेद : कविता की भाषा : सुशील कुमार
Olaf Brzeski ( Dream - Spontaneous combustion) courtesy of the Czarna Gallerअज्ञेय का मानना था कि “काव्य के जो भी गुण बताए जाते या बताए जा सकते हैं, अंततोगत्वा भाषा के ही गुण है.” हिंदी कविता विमर्श...
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