परख : हलंत (हृषीकेश सुलभ): राकेश बिहारी
वरिष्ठ कथाकार और रंगकर्मी हृषीकेश सुलभ ने आज अपने सक्रिय जीवन के साठ वर्ष पूरे किये हैं. इसी वर्ष उनका नया कहानी संग्रह भी प्रकशित हुआ है. इस संग्रह की छह कहानियों में उनके अपने जीवन की ही तरह विविधता...
View Articleपरिप्रेक्ष्य : ऐब (A.I.B) : विष्णु खरे
ऐब (AIB) ने जिस तरह से गालियों और अश्लीलता की मार्केटिंग शुरू की है और उसे एक मूल्य में बदल दिया है, उससे उसके तात्कालिक असर तो दिखने शुरू हो गए हैं दूरगामी कुप्रभावों का भी अनुमान लगाया जा सकता है....
View Articleकथा - गाथा : चंदन पाण्डेय (२)
चन्दन पाण्डेय अपनी पीढ़ी के प्रतिनिधि कथाकार हैं. उनके तीन कहानी संग्रह ‘भूलना’, ‘इश्कफरेब’ और ‘जंक्शन’ प्रकाशित हैं.ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार, कृष्ण बलदेव वैद फेलोशिप, और शैलेश मटियानी कथा पुरस्कार से...
View Articleमंगलाचार : सुलोचना वर्मा
सुलोचना वर्मा की कुछ कवितायेँ उन दिनों नहीं उगे थे मेरे दूध के दांत उन दिनों फिर भी समझ लेती थी माँ मेरी हर एक मूक कविता जिसे सुनाती थी मैं लयबद्ध होकर हर बार जैसे पढ़ा जाता है सफ़ेद पन्ने...
View Articleकथा - गाथा : हरिओम (दास्तान-ए-शहादत)
हरिओम कथाकार के रूप में चर्चित हैं उनका एक कहानी संग्रह ‘अमरीका मेरी जान’ प्रकाशित है. प्रस्तुत कहानी में वह नक्सल-आदिवासी ज़िला मिर्ज़ापुर में तैनात सब इन्स्पेक्टर रनबहादुर की हत्या से रोचक ढंग से एक-एक...
View Articleजीवन जो कुछ प्रलापमय है : शिरीष कुमार मौर्य
शब्द रचनाकार के लिए सार्थक तभी होते हैं जब वह उनकी सतर्क सुधि लेता है. उन्हें उलटता – पुलटता है, बेज़ान और घिस गए शब्दों की जगह नए शब्द तलाशता और तराशता है. जीवन – कर्म से शब्दों की संगति बैठाता है....
View Articleपरिप्रेक्ष्य : तितास एक नदी का नाम
तितास एक्टि नदीर नाम’ बांग्ला भाषा के अद्वैत मल्लबर्मन का उपन्यास है. इस ऐतिहासिक महत्व के उपन्यास का हिन्दी अनुवाद- ‘तितास एक नदी का नाम’. मानव प्रकाशन, कोलकाता से प्रकाशित है. इसका अनुवाद किया है...
View Articleबात - बेबात : जोगीरे .. : आचार्य रामपलट दास
परम्परा और संस्कृति में बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जो समय को देखते हुए अपना स्वरूप बदलती है. इसे ही परम्परा की आधुनिकता कहते हैं. स्मृतिविहीन किसी भी संस्कृति की कल्पना भयावह है. होली में खुल कर और खिल...
View Articleश्रद्धांजलि : सांस्कृतिक आंदोलन के मजबूत योद्धा थे जितेन्द्र रघुवंशी : जसम
सलाम/ श्रद्धांजलि 'कुशल संगठन कर्ता और वाम सांस्कृतिक आंदोलन के योद्धा थे जितेंद्र रघुवंशी'जन संस्कृति मंचआगरा : 8मार्च 2015अभी लोगों के शरीर से होली का रंग छूट भी नहीं पाया था कि देश के तमाम...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : प्रदीप मिश्र
प्रदीप मिश्र (१९७०, गोरखपुर) वैज्ञानिक हैं. ‘अन्तरिक्ष नगर’ नाम से उनका एक विज्ञान- उपन्यास भी प्रकाशित है. बतौर कवि के रूप में भी पहचाने जाते हैं. ‘उम्मीद’ उनका दूसरा कविता संग्रह है जो साहित्य भंडार,...
View Articleमति का धीर : लोठार लुत्से : विष्णु खरे
लोठार लुत्से (Lothar Lutze) सिर्फ अनुवादक नही थे, वह भाषाओँ के बीच पुल थे, साहित्य संवाहक थे, संस्कृतियों के जीवंत प्रवाह थे. इस जर्मन भाषा के विद्वान का ८७ वर्ष की अवस्था में ५ मार्च २०१५ को निधन हो...
View Articleसबद - भेद : मीरा बाई : माधव हाड़ा
डॉ. माधव हाड़ा की आलोचना पुस्तक ‘पचरंग चोला पहर सखी री’जो भक्तिकाल की कवयित्री मीरा बाई के जीवन और समाज पर आधारित है, इस वर्ष वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुई है. मीरा के जीवन को तरह तरह से पढ़ा और गढ़ा गया...
View Articleसबद भेद : मीरा का वैवाहिक जीवन : माधव हाड़ा
भक्तिकाल की कवयित्री मीरा बाई का वैवाहिक जीवन साहित्य और इतिहास में बहुत ही विवादित है. सबसे अधिक जनश्रुतियाँ और मिथ उनके वैवाहिक जीवन को लेकर ही गढ़े गए हैं. वाणी प्रकाशन से प्रकाशित माधव हाड़ा की...
View Articleरंग - राग : एन.एच.-10 :सारंग उपाध्याय
निर्माता अनुष्का शर्मा की पहली फ़िल्म एनएच -१० चर्चा में है. इसमें खुद अनुष्का ने भी अभिनय किया है. इसके निर्देशक नवदीप सिंह हैं जिन्होंने जोखिम भरे प्रयोग इस फ़िल्म में किये हैं. आनर किलिंग पर अब तक की...
View Articleमंगलाचार : प्रतिमा तिवारी
प्रतिमा तिवारी की कवितायेँ प्रतिमा तिवारी (इलाहबाद (उत्तर-प्रदेश)की कवितायेँ ध्यान खींचती हैं. शिल्प पर उनकी अच्छी पकड़ है. कविताओं में विविधता है. एक खुदमुख्तार और खुद्दार स्त्री की अनेक मुद्राएँ...
View Articleकथा - गाथा : कायांतर
कहानी कायांतर जयश्री रॉयफूलमती को ललिता ने पहली बार सिया सुंदरी के दक्खिन घाट पर देखा था. गौने के बाद बिगेसर के पीछे-पीछे बजरे से उतरते हुये- पीली साड़ी, सुर्ख लहठी और बड़ी-सी टिकुली में...
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी (६) : कायांतर (जयश्री रॉय) : राकेश बिहारी
भूमंडलोत्तर कहानी की विवेचना क्रम में इस बार आलोचक राकेश बिहारी ने जयश्री रॉय की कहानियों में ‘कायान्तर’का चयन किया है और उसकी व्याख्या करते हुए उसमें भारतीय समाज के अंतर्विरोधों की पड़ताल की है. उत्तर...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : अविनाश मिश्र
पेंटिंग : Tyeb MehtaAND BEHIND ME DESOLATIONअविनाश मिश्र अपने पद्य और गद्य दोनों से लगातार ध्यान खींच रहे हैं. उनके लिखे की प्रतीक्षा रहती है. उनकी भाषा में बिलकुल समकालीन ताजगी है. भारतीय...
View Articleमेघ - दूत : ओसिप मन्देलश्ताम : अनिल जनविजय
बरीस पास्तेरनाक और अन्ना अख़्मातवा के समकालीन विद्रोही कवि ओसिप मन्देलश्ताम से हिंदी अल्प परिचित है. न केवल उनका लेखन बल्कि उनका जीवन भी सत्ता के लिए चुनौती बना रहा. मौत की सज़ा, यातना, निर्वासन, असफल...
View Articleबात - बेबात : साइंस के मास्साहब : अरविन्द कुमार
अरविन्द कुमार के व्यंग्य लेखन ने पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से ध्यान खींचा है. उनका पहला व्यंग्य संग्रह- ‘राजनीतिक किराना स्टोर’ शीघ्र प्रकाश्य है. अगर मैं भैंस, तो बाकी सब क्या अरविन्द...
View Article