तुलसी राम : मुर्दहिया अमर है : मोनिका कुमार
मुर्दहिया और मणिकर्णिकाके लेखक, प्रसिद्ध बौद्ध–विचारक और अंतर-राष्ट्रीय सम्बन्धों के विशेषज्ञ तुलसीराम की आज पुण्यतिथि है. आज ही के दिन लम्बी बीमारी से लड़ते हुए २०१५ में वे हमसे विदा हो गए थे. अपने...
View Articleमैं और मेरी कविताएँ (४) : कृष्ण कल्पित
“Poetry is a political act because it involves telling the truth.”June Jordanसमकालीन महत्वपूर्ण कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत आपने ‘आशुतोष दुबे’, ‘अनिरुद्ध उमट’और ‘रुस्तम’ को...
View Articleनामवर के होने ने होने के बीच
भारतीय भाषाओँ में हिंदी आलोचना प्रभावशाली और विद्वतापूर्ण नामवर सिंह की वजह से है. आलोचना को अपने समय के साहित्य-सिद्धांत, विचारधारा और अद्यतन सामजिक विमर्श से जोड़कर उन्होंने उसे विस्मयकारी ढंग से...
View Articleरितुरैण : नामवर, केदार, दूधनाथ : शिरीष कुमार मौर्य
कवि–आलोचक शिरीष कुमार मौर्य इधर बहुत दिनों से दृश्य से अनुपस्थित थे. जैसा समय है उसमें कई बार यही विकल्प बचता है. नामवर सिंह के महाप्रस्थान ने उन्हें विचलित किया है. अपने तीन प्रिय लेखकों पर उन्होंने...
View Articleअर्चना वर्मा की स्मृति और उनकी कविताएँ : कर्ण सिंह चौहान
लेखिका अर्चना वर्मा लम्बे अरसे तक हिंदी की दो महत्वपूर्ण पत्रिकाओं– ‘हंस’ और ‘कथादेश’ से जुड़ी रहीं, न जाने कितने नवोदित लेखकों को उन्होंने पहचाना, सवारा और उन्हें ससम्मान प्रकाशित किया. वह एक कवयित्री...
View Articleजीवनानंद दास : अनुवाद का अपराध : शिव किशोर तिवारी
'सभी कवि नहीं होते कोई-कोई ही कवि होता है’ऐसा मानने वाले जीवनानंद दास (१७ फरवरी, १८९९-२२ अक्टूबर,१९५४) साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत (१९५५) पहले बांग्ला कवि हैं. ‘जीवनानंद दास : श्रेष्ठ कविताएँ’नाम...
View Articleपरिदृश्य : जबलपुर का नाट्योत्सव : सत्यदेव त्रिपाठी
साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में बहुत से प्रतिबद्ध लोग और समूह वर्षो से सतत क्रियाशील हैं. जोड़, जुगत और जुगाड़ से ‘येन केन प्रकारेण’ सबकुछ हासिल कर लेने की होड़ से दूर सच्चे कार्यकर्ता की तरह अपने...
View Articleउदय प्रकाश से संतोष अर्श की बातचीत : दूसरी क़िस्त
किसी भी लेखक की कृतियों में उसके तलघर में जमा तमाम जरूरी कबाड़ की बड़ी भूमिका होती है, जिसे वह जीवन भर यहाँ-वहाँ से एकत्र करता रहता है. उससे संवाद दरअसल उसके तलघर की यात्रा है.उदय प्रकाश से संतोष अर्श...
View Articleपरख : चौंसठ सूत्र, सोलह अभिमान (अविनाश मिश्र) : प्रभात कुमार
अविनाश मिश्र का दूसरा कविता संग्रह 'चौंसठ सूत्र, सोलह अभिमान'इसी वर्ष वसंत में राजकमल प्रकाशन से खूब सज धज के साथ प्रकाशित हुआ है. प्रभात कुमार इसे देख-परख रहें हैं.चौंसठ सूत्र, सोलह अभिमानरति का नया...
View Articleबेगम अख़्तर : शान्ती हीरानन्द से यतीन्द्र मिश्र का संवाद
अख़्तरीबाई फ़ैज़ाबादी (१९१४- १९७४) की ज़िन्दगी और गायकी पर आधारित यतीन्द्र मिश्र की किताब ‘अख़्तरी: सोज़ और साज़ का अफ़साना’ इसी साल वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुई है. आलेख, संस्मरण, संवाद, टिप्पणियाँ और मोहक...
View Articleपरख : साहस और डर के बीच : मीना बुद्धिराजा
डायरी में अगर सच्चाई है तो उसका साहित्य से इतर भी महत्व है. एक तरह से अपने समय को देखती परखती एक अंतर्यात्रा.नरेंद्र मोहन की डायरी को परख रहीं मीना बुद्धिराजा.साहस और डर के बीचसमय और समाज की...
View Articleमैं और मेरी कविताएँ (५) : अम्बर पाण्डेय
Poetry is everywhere; it just needs editing. James Tateसमकालीन महत्वपूर्ण कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत ‘आशुतोष दुबे’, ‘अनिरुद्ध उमट’, ‘रुस्तम’और कृष्ण कल्पित को आपने पढ़ लिया...
View Articleकथा-गाथा : क़ातिल की बीबी : तरुण भटनागर
‘गुलमेहंदी की झाड़ियाँ’, ‘भूगोल के दरवाजे पर’, ‘जंगल में दर्पण’ (कहानी संग्रह), लौटती नहीं जो हंसी (उपन्यास) आदि के लेखक तरुण भटनागर आदिवासी पृष्ठभूमि पर लिखी कहानियों के लिए जाने जाते हैं. उन्हें...
View Articleसबद भेद : दस्तंबू : सच्चिदानंद सिंह
रखियो 'ग़ालिब'मुझे इस तल्ख़-नवाई में मुआफ़ l आज कुछ दर्द मिरे दिल में सिवा होता है llमहाकवि ग़ालिब का ‘दस्तंबू’ जिसे १८५७ के महाविद्रोह की डायरी कहा जाता है, अदब के लिहाज़ से मानीखेज़ तो है ही ढहते हुए...
View Articleपरख : स्त्री शतक (पवन करण: साधना अग्रवाल
स्त्री शतकपवन करणभारतीय ज्ञानपीठ18, इन्स्टीट्यूशनल एरिया, लोदी रोडनयी दिल्ली—110003मूल्य—370संस्करण— 2018स्त्रियों की महागाथा साधना अग्रवालनारी पर अधिकार स्थापित करना ही पुरुष के...
View Articleउपन्यास के भारत की स्त्री (चार) : आशुतोष भारद्वाज
चार उपन्यास के भारत की स्त्रीस्त्री का एकांत: अपूर्णता का विधान*आशुतोष भारद्वाजउपन्यास के भारत की स्त्री (चार) : आशुतोष भारद्वाजचार उपन्यास के भारत की स्त्रीस्त्री का एकांत: अपूर्णता का विधान*आशुतोष...
View Articleउपन्यास के भारत की स्त्री (दो) : आशुतोष भारद्वाज
(by AnnemZaidi)उपन्यासों के उदय को राष्ट्र-राज्यों की निर्मिति से जोड़ कर देखा जाता है. ‘वंदे मातरम्’ उपन्यास की ही देन है. आशुतोष भारद्वाज भारत के प्रारम्भिक उपन्यासों में स्त्री और राष्ट्रवाद के...
View Articleउपन्यास के भारत की स्त्री (चार) : आशुतोष भारद्वाज
(Amrita Shergil : Self-portrait)‘उपन्यास के भारत की स्त्री’के अंतर्गत अब प्रस्तुत है समापन क़िस्त ‘स्त्री का एकांत: अपूर्णता का विधान’. इससे पहले आपने पढ़ा है -(एक) ‘आरंभिका : हसरतें और हिचकियाँ’, (दो)...
View Articleपरख : पोस्ट बॉक्स नं- 203 – नाला सोपारा ( चित्रा मुद्गल ): सत्यदेव त्रिपाठी
‘पोस्ट बॉक्स नं. 203 नाला सोपारा’ को वर्ष २०१८ के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. चित्रा मुद्गल ने मुंबई के उपनगर नाला सोपारा के एक किन्नर (जिन्हें अब एलजीबीटी समुदाय- lesbian,...
View Articleकथा- गाथा : निष्कासन : नरेश गोस्वामी
(पेंटिग : SALMAN TOOR )एक सच्ची कहानी किस तरह एक राजनीतिक मंतव्य भी है इसे इस कहानी को पढ़ते हुए आप महसूस कर सकते हैं. नरेश गोस्वामी डॉक्टर की सलाह पर सुबह की सैर के लिए पार्क जाना शुरू करते हैं और तनाव...
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