परख : इन हाथों के बिना (नरेन्द्र पुण्डरीक) वाज़दा ख़ान
वरिष्ठ कवि नरेन्द्र पुण्डरीक का यह पाचवां संग्रह है जिसे बोधि प्रकाशन ने सुरुचि से छापा है. इसकी समीक्षा कवियत्री और चित्रकार वाज़दा ख़ान की कलम से .इन हाथों के बिना वाज़दा...
View Articleउदय प्रकाश से संतोष अर्श की बातचीत : अंतिम क़िस्त
समालोचन पर हमारे समय के महत्वपूर्ण लेखक उदय प्रकाश से युवा आलोचक और कवि संतोष अर्श की लम्बी बातचीत की यह तीसरी और अतिम क़िस्त है. पूरी बातचीत बहुत ही दिलचस्प है और लेखक के मनोजगत की यात्रा करती है, इस...
View Articleपरख : जलावतन (लीलाधर मंडलोई) : मीना बुद्धिराजा
वरिष्ठ कवि लीलाधर मंडलोई इधर पेटिंग और फोटोग्राफी में भी सक्रिय हैं. लेखन, अनुवाद संपादन का बहु अनुभव है. जलावतन उनका नया कविता संग्रह है जो विस्थापन को केंद्र में रखकर रचा गया है. मीना बुद्धिराजा...
View Articleमेघ - दूत : अप्रैल की एक ख़ुशगवार सुबह सौ प्रतिशत सम्पूर्ण लड़की को देखने पर...
हारुकी मुराकामी के 1980 से 1991 के बीच लिखी कहानियों के संग्रह ‘The Elephant Vanishes’में "On Seeing the 100% Perfect Girl One Beautiful April Morning"शीर्षक से यह कहानी संकलित है. हिंदी में इसका...
View Articleसबद - भेद : महादेवी वर्मा और आलोचना का मर्दवादी जाल : श्रीधरम
हिंदी साहित्य में मीरा के पश्चात लम्बे अंतराल के बाद एक स्त्री अपनी प्रखर चेतना के साथ उपस्थित होती है, उस लेखिका का नाम है महादेवी वर्मा (२६ मार्च १९०७—११ सितंबर १९८७) आज हिंदी की इस कालजयी कवयित्री...
View Articleसबद - भेद : हिंदी कविता और तिब्बत : बंदना झा
"मैं थक गया हूँथक गया हूँ सड़क किनारे स्वेटर बेचता हुआचालीस सालों से बैठे-बैठे — धूल और थूक के बीच इन्तज़ार करता"हिंदी कविता और तिब्बत : बंदना झा 1980 के दशक में ‘तिब्बत’नामक कविता को भारत...
View Articleमेघ-दूत : चु चछिंग - पिताजी की पार्श्व-छवि : पंकज मोहन
पिता-पुत्र के रिश्तों पर, उनके बीच के प्रेम और अहम् पर हर भाषा में लिखा गया है. पिता, पुत्र में अपना बेहतर होता हुआ देखना चाहता है, वह अपने पीछे एक बेहतर पिता छोड़ जाना चाहता है. पुत्र जब पिता बन जाता...
View Articleसबद - भेद : हिंदी कविता और तिब्बत : बंदना झा
"मैं थक गया हूँथक गया हूँ सड़क किनारे स्वेटर बेचता हुआचालीस सालों से बैठे-बैठे — धूल और थूक के बीच इन्तज़ार करता"हिंदी कविता में तिब्बत के बहाने बंदना झा ने निर्वासन की पीड़ा और संत्रास को...
View Articleरमणिका गुप्ता : एक युद्धरत औरत का जाना : विपिन चौधरी
रमणिका गुप्ता ने बहुत लिखा है, वह ट्रेड यूनियन की नेता थीं, विधायक भी रहीं. आदिवासियों के लिए उनके सरोकार बहुत मुखर थे. ‘युद्धरत आम आदमी’ का वह संपादन करती थीं. उनकी आत्मकथा ‘हादसे’ और ‘आपहुदरी’ में...
View Articleकृष्णा सोबती : कुछ खत, एक पिक्चर पोस्टकार्ड : आशुतोष भारद्वाज
कृष्णा सोबती पर आशुतोष भारद्वाज का यह ‘स्मरण’ कृष्णा जी के जीवन के ऐसे पहलू को सामने लाता है जिसपर वह खुद मौन रहना पसंद करती थीं. हालाँकि यहाँ भी वह बहुत मुखर नहीं हैं. किसी भी मेजर राइटर का जीवन जिन...
View Articleमैं और मेरी कविताएँ (६) : संजय कुंदन
“Memory revises me.” Li-Young Lee समकालीन महत्वपूर्ण कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत ‘आशुतोष दुबे’, ‘अनिरुद्ध उमट’, ‘रुस्तम’, ‘कृष्ण कल्पित’ और ‘अम्बर पाण्डेय’ को आपने पढ़ा....
View Articleग़ालिब की दिल्ली : सच्चिदानंद सिंह
मिर्ज़ा असदुल्लाह खां ग़ालिब (27 दिसम्बर1797-15फरवरी 1869) पर अगर बातें हों तो वे भी उनकी शायरी की ही तरह दिलकश और दिलफरेब हो जाती हैं. असल चीज है विडम्बना जो उनकी शायरी के मूल में हैं. नासिर काज़मी ने...
View Articleमंगलाचार : अमिताभ चौधरी
"बहुत कोमल हैटूटे हुए पत्ते की ऐंठ. औरबहुत करुण ---ऐंठ के टूटने की कर्कश-ध्वनि."अमिताभ चौधरी राजस्थान के जिला चुरु के थिरपाली गाँव में रहते हैं, उम्मीद के साथ ये कविताएँ आपके लिए. अमिताभ चौधरी की...
View Articleसबद - भेद : जयप्रकाश मानस की कविता : सदाशिव श्रोत्रिय
लोगबाग तकनीक तो आधुनिकतम चाहते हैं, पर कविता उन्हें पुरानी चाहिए. किसी भी जीवित समाज में यह संभव नहीं है . साहित्य अपने रूप में भी बदलाव करता है. आज की हिंदी कविता के पाठक थोड़े जरुर हैं पर यही कविता...
View Articleरेणु, पटना और पत्र : निवेदिता
कल महान कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु की पूण्यतिथि थी, उन्हें याद कर रहीं हैं निवेदिता. रेणु, पटना और पत्र ____________________________निवेदिताआँखें खुली तो खिड़की के बाहर...
View Articleपरख : बारिशगर : प्रत्यक्षा
बारिशगर : प्रत्यक्षाप्रकाशक- आधार प्रकाशन, पंचकुला (हरियाणा)प्रथम संस्करण-2019मूल्य-180 रुपयेप्रत्यक्षा का नया उपन्यास ‘बारिशगर’ चर्चा में है. प्रत्यक्षा कविता और पेंटिग में भी गति रखती हैं. उनका...
View Articleकोई चीज़ लाओ जिसको कोई न जानता हो : महेश वर्मा से मोनिका कुमार का संवाद
महेश वर्मा और मोनिका कुमार दोनों समकालीन महत्वपूर्ण कवि हैं. महेश वर्मा की कविताओं पर मोनिका कुमार ने यह जो संवाद संभव किया है वह इसलिए भी रेखांकित करने योग्य है कि अपने समकक्ष से समक्ष होने का यह...
View Articleऔरत की दुनिया (नासिर शर्मा ) : शिप्रा किरण
हिंदी की वरिष्ठ और महत्वपूर्ण लेखिका नासिरा शर्मा का लेखन विपुल और विविध है. आधुनिक पर्शियन साहित्य तथा समकालीन ईरानी समाज, संस्कृति और राजनीति विषयक मामलों पर उनका विशेष कार्य है. हिन्दी, उर्दू,...
View Articleकलकत्ता - कुछ कविताएँ : अंचित
समालोचन पर आप अंचित को पढ़ चुके हैं, कोलकाता पर केन्द्रित इन सात कविताओं के साथ वह फिर आपके समक्ष हैं. इन कविताओं में शहर तो है ही अपने अतीत और वर्तमान में एक साथ अपनी ही छाया में हिलता हुआ, एक नर्म...
View Articleजन्म से ही जीवित है पृथ्वी (प्रेमशंकर शुक्ल) : राहुल राजेश
'तितली फूल को उसकी टहनी में न पाकरबिरह में हैजूड़े में वह फूल भी है अनमना बहुतरह-रह कर आ रही है उसे अपनी प्रिया की गहरी याद’प्रेमशंकर शुक्ल मुख्यत: प्रेम के शुक्ल पक्ष के कवि हैं. उनकी कविता की जमीन...
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