के. मंजरी श्रीवास्तव की कविताएँ
के. मंजरी श्रीवास्तव की ये पाँचों कविताएँ सीधे-सीधे रंगमंच से जुड़ी हैं, रंग-प्रस्तुतियों के सम्मोहक अनुभव से अंकुरित ये पाँचों कविताएँ उनका विस्तार करती हैं. कलाओं के आपसी जुड़ाव का यह सुंदर संयोजन है...
View Articleसत्यपाल सहगल की कविताएँ
‘'उदासी हरा पत्ता हैसदाबहार हरा पत्ताहमारे सपनों के खेत में.’ पंजाब की मिट्टी का असर वहां की उगी कविताओं में भी है चाहे उसकी भाषा कोई भी हो. सत्यपाल सहगल की कविताएँ पढ़ते हुए यह अहसास बना...
View Articleरज़ा : जैसा मैंने देखा (८) : अखिलेश
रज़ा : जैसा मैंने देखा (८) कब किसने प्रिय, तेरा रहस्य पहचाना अखिलेश गैलरी लारा विंची से रज़ा का अनुबंध चल ही रहा था और सभी गैलरियों की तरह वह भी रज़ा के चित्रों पर अपनी...
View Articleगोरख पाण्डेय : शिवमंगल सिद्धांतकर
गोरख पाण्डेय के लेखन की शुरुआत १९६९ के किसान आंदोलन में उनके जुड़ाव से हुई और वे भोजपुरी में गीत लिखने लगे बाद में वे जन संस्कृति मंच के संस्थापक सदस्य और प्रथम महासचिव बने. उनकी कविताओं का संग्रह...
View Articleसंजीव : मुझे पहचानों : अमरदीप कुमार
वरिष्ठ कथाकार संजीव का उपन्यास ‘मुझे पहचानों’ तद्भव (नवम्वर-२०१९) में प्रकाशित हुआ था और तभी से इसकी चर्चा शुरू हो गयी थी. कथा की नयी जमीन और भाषा की तुर्शी के कारण अपनी पठनीयता में भी यह ख़ूब है और...
View Articleआग से गुज़रती हवाएँ : उषा राय
लंबी कविताआग से गुज़रती हवाएँउषा राय ये नदी अबूझ और हठीली मेरे लिएपर है ये आम नदियों की ही तरह पथरीली लिपि में लिखी,जिनमें शिलालेख सी हैं बड़ी-बड़ी शिलाएँ जो कभी जल से भीगी नहीं. इन्हीं घाटों पर...
View Articleरेत - समाधि (गीतांजलि श्री) : प्रयाग शुक्ल
गीतांजलि श्री के चार उपन्यास- 'माई', 'हमारा शहर उस बरस', 'तिरोहित', 'खाली जगह'और चार कहानी-संग्रह- 'अनुगूँज', 'वैराग्य', 'प्रतिनिधि कहानियाँ', 'यहाँ हाथी रहते थे'तथा अंग्रेज़ी में एक शोध ग्रन्थ और कुछ...
View Articleपैंसठवें पायदान पर धीरेन्द्र अस्थाना: राकेश श्रीमाल
धीरेन्द्र अस्थाना (जन्म : 25दिसम्बर, 1956, मेरठ) ‘लोग हाशिए पर’, ‘आदमीखोर’, ‘मुहिम’, ‘विचित्र देश की प्रेमकथा’, ‘जो मारे जाएंगे’, ‘उस रात की गन्ध’, ‘खुल जा सिमसिम’, ‘नींद के बाहर’ जैसे कहानी संग्रहों...
View Articleशम्सुर्रहमान फ़ारुक़ी: वक़्त के चेहरे को आईना-ए-हुस्न में देखना: विनोद तिवारी
लेखक,आलोचक,शोधकर्ता और संपादक शम्सुर्रहमान फ़ारुक़ी (३० सितम्बर,१९३५ - २५ दिसम्बर २०२०) उर्दू और अंग्रेजी में लिखते थे. उनकी महत्वपूर्ण कृतियों के अनुवाद हिंदी में भी हुए हैं. २०१० में पेंगुइन बुक्स से...
View Articleदिवंगत पत्नी के लिए : राहुल द्विवेदी
दिवंगत पत्नी के लिए राहुल द्विवेदी की कविताएँ रास्ताइतना लंबा रास्ताजो जन्म जन्मांतर तक जाता हो,पाप पुण्य के हिसाब-किताबके साथ-तय ही नही कर सकता मैंने तो...
View Article21वीं सदी की हिंदी कहानी का स्वरूप: विनोद शाही
नई सदी में समय के हिसाब से तो अभी दो दशक ही गुज़रे हैं लेकिन जिन प्रवृत्तियों से कोई सदी नई बनती है उस लिहाज़ से देखें तो और पीछे जाना पड़ेगा. आलोचक विनोद शाही ने इन दो दशकों में प्रकाशित वरिष्ठ और...
View Articleशम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी: कुछ बातें, चन्द यादें: रिज़वानुल हक़
अदब में नस्लें कैसे संवारी जाती हैं ? एक बड़ा लेखक किस तरह से अपनी भाषा के युवा से संवाद स्थापित करता है और उसकी खोज़-खबर रखता है ? कैसे वह एक बिसरी रवायत को तलाशता है और उसे जिंदा रखने के जतन करता...
View Articleभक्ति - कविता, किसानी और किसान आंदोलन : बजरंग बिहारी तिवारी
भक्ति-कविता, किसानी और किसान आंदोलनबजरंग बिहारी तिवारी दिल्ली की घेरेबंदी वाले किसान आंदोलन का एक महीना गुजर चुका है. राजधानी आने वाले कई रास्तों सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, नेशनल...
View Articleउपस्थिति का अर्थ (ज्ञानरंजन) : सूरज पालीवाल
उपस्थिति का अर्थ यह देश, समाज, साहित्य और धर्म का अंधकार काल है सूरज पालीवाल हिंदी के अनूठे कहानीकार और अप्रतिम संपादक ज्ञानरंजन के व्याख्यान/वक्तव्य, संस्मरण, रेडियो...
View Articleनिर्वास : पीयूष दईया की कविताएँ
निर्वासपीयूष दईया की कविताएँ वत्सल संतोष पासी, वत्सला योगिता शुक्ला के लिए बहुत दिन हुए, उर्दू के एक वरिष्ठ आधुनिक कवि ने कहा था: "कर लो'जदीद शायरी लफ़्ज़ों को जोड़ कर"अर्थात यह कि आधुनिक कविता अब...
View Articleरज़ा : जैसा मैंने देखा (९) : अखिलेश
रज़ा : जैसा मैंने देखा (८) मंडला के जंगलों का घना अंधेरा और चित्र की रौशनी अखिलेश रज़ा के चित्र अब नई दिशा ले चुके थे. उनका सौन्दर्य अब दृश्य में नहीं, उसके ज्यामितिक...
View Articleबेढब जी बेढब नहीं थे : मैनेजर पाण्डेय
(उग्र जी, बेढब जी और श्री सीताराम चतुर्वेदी) चित्र आभार मंगलमूर्तिबेढब बनारसी पर वरिष्ठ आलोचक प्रो. मैनजर पाण्डेय का यह लेख इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें जहाँ बेढब के व्यक्तित्व की आत्मीय ऊष्मा है वहीं...
View Articleरज़ा : जैसा मैंने देखा (९) : अखिलेश
प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा के जीवन और उनकी चित्रकला पर आधारित स्तम्भ ‘रजा: जैसा मैंने देखा’ पिछले कई महीनों से आप माह के पहले और तीसरे शनिवार को समालोचन पर पढ़ रहें हैं. आज इसकी नवीं क़िस्त...
View Articleभाष्य : विनोद कुमार शुक्ल : गिरिराज किराड़ू
भाष्य के अंतर्गत समालोचन महत्वपूर्ण रचना का पुनर्पाठ प्रस्तुत करता है. जिसमें आपने अब तक- निराला, मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह, श्रीकांत वर्मा, आलोक धन्वा, नंद चतुर्वेदी, मंगलेश डबराल, वीरेन डंगवाल...
View Articleउषा प्रियंवदा की स्त्रियाँ : प्रेमकुमार मणि
‘वापसी’ जैसी कालजयी कहानियों के अलावा ‘पचपन खंभे लाल दीवारें’, ‘रुकोगी नहीं राधिका’, ‘शेषयात्रा, ‘अंतर्वंशी’,‘भया कबीर उदास’,‘नदी’, 'अल्पविराम'आदि उपन्यासों की लेखिका उषा प्रियंवदा ने बीते २४ दिसंबर...
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