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Channel: समालोचन
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सहजि सहजि गुन रमैं : मृदुला शुक्ला

(पेंटिग : कैंसर ;  melissa-anne-carroll)मृदुला शुक्ला का पहला कविता संग्रह 'उम्मीदों के पाँव भारी हैं 'बोधि प्रकाशन से २०१४ में  प्रकाशित है. रचनात्मक लेखन में वह इधर लगातार सक्रिय हैं. कैंसर पर...

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फिदेल कास्त्रो : पाब्लो नेरुदा

(A photo of Fidel Castro in New York in 1959 taken by Roberto Salas)फिदेल कास्त्रो (जन्म: 13 अगस्त 1926 - मृत्यु: 25 नवंबर 2016) : ___________बीसवीं शताब्दी के महान क्रांतिकारी नेताओं में अग्रगण्य...

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मंगलाचार : दिव्या विजय (कहानी)

(Photo: Courtesy  Woody Gooch)बायोटेक्नोलॉजी से स्नातक, सेल्स एंड मार्केटिंग   में   एम.बी.ए.बैंकाक में आठ  साल रहीं फिर लौट कर ड्रामेटिक्स से स्नातकोत्तर और नाटकों में अभिनय और लेखन आदि.यह दिव्या विजय...

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सहजि सहजि गुन रमैं : नरेंद्र पुण्डरीक

पेंटिग : लाल रत्नाकरनरेंद्र पुण्डरीक की इन कविताओं  में गाँव घर है. माँ, पिता, भाई, बेटी, पत्नी और स्त्रियाँ हैं. कविताएँ कथ्य से बहुत मजबूत हैं. अनुभव पर विचारों का सेंसर एक सीमा तक ही है.  जो सच्चाई...

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सबद - भेद : अरुण कमल की काव्य-यात्रा : हरे प्रकाश उपाध्याय

वरिष्ठ कवि अरुण कमल के पांच कविता संग्रह  – ‘अपनी केवल धार’ (1980) ‘सबूत’(1989), ‘नये इलाके में’(1996), ‘पुतली  में संसार’(2004,‘मैं वो शंख महाशंख’ (2013). तथा  अंग्रेजी में समकालीन भारतीय कविता के...

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मेघ - दूत : दुनिया का सबसे रूपवान डूबा हुआ आदमी : गैबरिएल गार्सिया मार्केज़

जब परिस्थितियाँ विकट, त्रासद और दारुण हो जाती हैं तब साहित्य और कलाएं प्रतिपक्ष का नया शिल्प विकसित करती हैं जो सटीक हो और सूक्ष्मता से अपने समय की विद्रूपता और विडम्बना को व्यक्त कर सके.  विश्व...

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मंगलाचार : राहुल झाम्ब

(फोटोग्राफ : Michael Kenna)राहुल झाम्ब की कविताएँ                                        हाथ उठाया अपने हाथ सेभीगी मिट्टी सा ठंडामृत पिता का बूढ़ा हाथभीतर का ताप ढह गया माया का दर्पण चटक गयाछोड़ा अपने...

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सबद भेद : सिनेमा और कश्मीर : नीतू तिवारी

फिल्में केवल मनोरजंन का साधन नहीं हैं, वे एक तरह से जिंदा इतिहास भी हैं.सवाल यह है कि   बरतने वाला कितने वस्तुनिष्ठ ढंग से इसे निर्मित कर रहा है.फिल्मों पर गम्भीर और शोधपरक ढंग से लिखने वाले युवा...

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सबद भेद : स्तन, कैंसर और कविताएँ : संतोष अर्श

Painting by Javier Alvarezसाहित्य को अपने समय के अलग-अलग चश्मों से देखा जाता है, देखा भी जाना चाहिए. ‘टेक्स्ट’ के इन तमाम ‘रीडिंग्स’ में साहित्य में अंतर्निहित विचारों की विवेचनाएँ होती हैं, पर उनका जो...

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सहजि सहजि गुन रमैं : सुधांशु फिरदौस

पेंटिग : Rick Bainbridgeसुधांशु फिरदौस की कविताओं में ताज़गी है. इधर की पीढ़ी में  भाषा, शिल्प और संवेदना को लेकर साफ फ़र्क नज़र आता है. धैर्य और सजगता के साथ  सुधांशु कविता के पास जाते हैं.  बोध और शिल्प...

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मति का धीर : प्रभाकर श्रोत्रिय : ओम निश्चल

प्रभाकर श्रोत्रिय आलोचक, निबन्धकार और संपादक थे. उनके संपादकत्व की चर्चा हुई है. ज्ञानपीठ से युवा साहित्यकारों की रचनाओं के प्रकाशन की उनकी योजना में मुझे भी प्रकाशित होने का अवसर मिला था. ओम निश्‍चल...

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सहजि सहजि गुन रमैं : वीरू सोनकर

फोटो द्वारा Gordon Parksकला का अपने समय के यथार्थ से जटिल रिश्ता बनता है. कविताएँ यथार्थ नहीं बनतीं वे कुछ ऐसा करती हैं कि यथार्थ और भी यथार्थ बन जाता है, वह और रौशन हो जाता और अनुभव के दायरे में आ...

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सबद भेद : प्रगतिशील कविता और शमशेर बहादुर सिंह : रवि रंजन

कवियों के कवि शमशेर अपनी कविताओं की भाषा की बहुस्तरीयता और  जटिल काव्यानुभवों के कारण प्रसिद्ध हैं. उनकी कविताओं पर प्रोफेसर रवि रंजन का यह आलेख आपके लिए.प्रगतिशील कविता में शमशेरियत की शिनाख्त...

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सहजि सहजि गुन रमैं : पंकज चौधरी

(पंजाबी फ़िल्म चौथी कूट का एक दृश्य) लेखक अपने समय की सामाजिक राजनीतिक परिस्थितियों को आलोचनात्मक ढंग से देखता है, आक्रोश और आकांक्षा को वह उसके सम्यक यथार्थ में ग्रहण करता है और उसका यह बोध ही चेतना के...

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सबद भेद : हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि : कुछ जिज्ञासाएँ : बटरोही

बटरोहीब्रिटिश शासकों को पहाड़ी क्षेत्र का वातावरण उन्हें अपने देश की याद दिलाता था. वे अस्थाई रूप से यहाँ रहने लगे. बाद में ये क्षेत्र सैलानियों की जगहें बनतीं चली गयीं. हम भूल गए कि इन क्षेत्रों का...

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सबद भेद : उदय प्रकाश का कथा संसार : संतोष अर्श

संतोष अर्श कविताएँ लिखते हैं, इधर उनके कुछ आलोचनात्मक लेखों ने भी ध्यान खींचा है.प्रसिद्ध कथाकार उदय प्रकाश की कहानियों की संरचना में विन्यस्त वैचारिकी, संवेदना और शिल्प पर विस्तार से इस आलेख में...

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मेघ - दूत : शंख घोष की कविताएँ (अनुवाद :उत्पल बैनर्जी)

२०१६ का ५२ वां ज्ञानपीठ पुरस्कार आधुनिक बांग्ला साहित्य के जानेमाने कवि शंख घोष को दिए जाने की घोषणा हुई है. इससे पहले बांग्ला लेखकों में ताराशंकर, विष्णु डे, सुभाष मुखोपाध्याय, आशापूर्णा देवी और...

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परख : जल और समाज (ब्रजरतन जोशी)

डॉ. ब्रजरतन जोशी की पुस्तक ‘जल और समाज’ २००५ में प्रकाशित हुई थी, २०१७ में इसका परिवर्धित संस्करण आया है. इसकी एक भूमिका प्रसिद्ध गांधीवादी और पर्यावरणविद अनुपम मिश्र ने लिखी है ज़ाहिर इस भूमिका की भी...

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परिप्रेक्ष्य : २१वीं सदी का पहला महत्वपूर्ण साहित्यिक आन्दोलन : डेमियन वाल्टर्स

courtesy by revengeforwanda२१ वीं सदी में क्या कहीं कोई साहित्यिक आन्दोलन चल रहा है ? देश–विदेश कहीं भी. इस जिज्ञासा के कारण मैं तमाम पत्र पत्रिकाएं टटोल रहा था कि मेरी नज़र ‘theguardian’में प्रकाशित...

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सहजि सहजि गुन रमैं : अदनान कफ़ील दरवेश

फोटो : Michael Kenna कविता मनुष्यता की पुकार है. जब कहीं चोट लगती है, दिल दुखता है, हताशा घेरती है मनुष्य कविता के पास जाता है. उसे पुकारता है. उसे गाता है, सुनता है. कविताओं ने सभ्यताएं रची हैं.हर...

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