कथा - गाथा : सिंगिंग बेल : सुभाष पंत
वरिष्ठ कथाकार सुभाष पंत की समालोचन में प्रकाशित कहानी ‘अ स्टिच इन टाइम’ को पाठकों द्वारा खूब पसंद किया गया है और उनकी दूसरी कहानियों को भी पढ़ने की इच्छा व्यक्त की गयी है. ‘सिंगिंग बेल’ अकेली स्त्री के...
View Articleसहजि सहजि गुन रमैं : चंद्रेश्वर
चंद्रेश्वर का दूसरा कविता संग्रह ‘सामने से मेरे’ अभी प्रकाशित हुआ है. ये कविताएँ बुनावट में सरल लग सकती हैं पर वर्तमान की जटिलता को ये समझती हैं और व्यक्त भी करती हैं. इनका अपना एक प्रतिपक्ष है और...
View Articleआता रहूंगा तुम्हारे पास : चंद्रभूषण की कविताएँ
पूरा पत्रकार और अपने को आधा कवि ‘A journalist and half a poet’ मानने वाले चंद्रभूषण का पहला कविता संग्रह ‘इतनी रात गए’ २००१ में प्रकाशित हुआ था. सत्रह साल बाद दूसरे कविता संग्रह ‘आता रहूँगा तुम्हारे...
View Articleकला के सामाजिक सरोकार – १ : अमिताभ घोष : यादवेन्द्र
(Photo courtesy: Sattish Bate/Hindustan Times)भारत के प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक अमिताभ घोष की २०१६ में प्रकाशित किताब ‘The Great Derangement: Climate Change and the Unthinkable’ ने जहाँ प्रकृति और...
View Articleकथा - गाथा : वृश्चिक संक्रान्ति : प्रचण्ड प्रवीर
२००५ में आई. आई. टी. दिल्ली से रासायनिक अभियांत्रिकी में स्नातक प्रचण्ड प्रवीर हिंदी के बेहद संभवनाशील लेखक हैं. विश्व सिनेमा को भरत मुनि के रस सिद्धांत के आलोक में विश्लेषित करती उनकी पुस्तक ‘अभिनव...
View Articleपरख : जो कहूँगी सच कहूँगी (कमल कुमार) : हरीश नवल
‘जो कहूंगी सच कहूंगी’ हरीश नवल‘जोकहूंगी सच कहूंगी’ एक ऐसी लेखिका के संघर्ष और गहन आत्मविश्वास की गाथा है जो ‘कुछ’ बनना चाहती थी और उसने तमाम पारिवारिक, सामाजिक दवाबों और विरोधों के...
View Articleलोकधर्मिता और कुछ कविताएँ : विजेंद्र
कविताओं से कवि होना चाहिए, अगर बचनी हैं तो कविताएँ ही बचेंगी. जनकवि, जनता का कवि, लोककवि, लोकधर्मी कवि आदि-आदि कविताओं को समझने के क्रम में तैयार आलोचकीय वर्गीकरण हैं. ८३ वर्षीय विजेंद्र के दस से अधिक...
View Articleकरघे से बुनी औरत : शिव किशोर तिवारी
कविताएँ हमेशा की तरह खूब लिखी जा रही हैं, तमाम माध्यमों से उनके प्रकाशन की बहुलता २१ वीं सदी की विशेषता है. कविताओं को जितना ‘देखा’ और ‘पसंद’ किया जा रहा है क्या उन्हें उतना ही पढ़ा भी जा रहा है ? अगर...
View Articleसबद भेद : सेवासदन : हुस्न का बाज़ार या सेवा का सदन : गरिमा श्रीवास्तव
१०० वर्ष पूर्व प्रकाशित ‘सेवासदन’को कथाकार प्रेमचंद का ‘पहला मुख्य उपन्यास’माना जाता है, इस शताब्दी वर्ष में इसका गंभीर विवेचन-विश्लेषण होना चाहिए. ‘Illegitimacy of Nationalism: Rabindranath Tagore and...
View Articleसबद - भेद : विजेंद्र का कवि -कर्म : अमीर चन्द वैश्य
हिंदी के वरिष्ठ कवि विजेंद्र की कुछ कविताएँ और उनका आत्मकथ्य समालोचन पर आपने कुछ दिनों पहले पढ़ा था. ८३ वर्षीय विजेंद्र के १९६६ से २०१५ के दरमियाँ २४ कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और अब उनकी रचनावली भी...
View Articleभीमबैठका : पत्थरों की पानीदार कहानी : सुदीप सोहनी
भोपाल स्थित कला संस्थान 'विहान'के संस्थापक, फीचर फिल्मों के लेखक तथा डॉक्यूमेंटरी फिल्म निर्माण में सक्रिय सुदीप सोहनी (29दिसंबर 1984, खंडवा) की कुछ कविताएँ आपने समालोचन में पहले भी पढ़ी हैं. किसी स्थान...
View Articleपरख : नये शेखर की जीवनी (अविनाश मिश्र) : प्रचण्ड प्रवीर
युवा कवि अविनाश मिश्र की गद्य कृति ‘नये शेखर की जीवनी’ वाणी प्रकाशन से अभी-अभी प्रकाशित हुई है. अविनाश मिश्र ने अपनी कविताओं और आलोचना से सबका ध्यान खींचा है और उन्हें उम्मीद से देखा जा रहा है. ऐसे में...
View Articleस्मृति : गोपाल दास नीरज : संतोष अर्श
‘गीत एक और ज़रा झूम के गा लूँ तो चलूं..’हिंदी के प्रसिद्ध गीतकार ९३ वर्षीय गोपाल दास नीरज (४/जनवरी १९२५- १९ जुलाई २०१८) के न रहने से लोकप्रिय हिंदी कविता की परम्परा ठिठक सी गयी है, मंच पर उसके पास ऐसा...
View Articleबुढ़ा शजर : प्रीता व्यास की कविताएँ
बूढ़ा शजर : कुछ बिंबप्रीता व्यासकी कविताएँ (1)खोखला करता है पर कम से कम रोज़ आता तो है बूढ़े शजर को भाने लगा है कठफोड़वा. (2)बच्चे उसे छू रहे हैं खेल रहे हैं इर्द -गिर्द आंखमिचौली, बूढ़ा शजर...
View Articleमंगलाचार : जाई : अनिता सिंह
अकेली रह गयी माँ के शुरू हो रहे प्रेम सम्बन्ध को उसकी विवाहिता बेटी किस तरह देखेगी ? अब यह न वर्जित क्षेत्र है न विषय. अनिता सिंह ने संयत रहकर यह कहानी बुनी है. जाई...
View Articleमेघ -दूत : महमूद दरवेश की डायरी : यादवेन्द्र
निर्वासन और प्रतिरोध के कवि महमूद दरवेश (१३,मार्च १९४१ – ९,अगस्त २००८) को फिलस्तीन के राष्ट्रीय कवि के रूप में भी जाना जाता है. ३० कविता संग्रह और ८ गद्य पुस्तकों के लेखक दरवेश कई साहित्यिक पत्रिकाओं...
View Articleपरख : पदमावत (पुरुषोत्तम अग्रवाल) : अखिलेश
मलिक मुहम्मद जायसी (१३९८-१४९४ ई.) के महाकव्य 'पदमावत'पर कथित तौर पर आधारित भंसाली की फ़िल्म पदमावत के दयनीय और भूहड़ निर्माण और उस पर हुए हिंसक और आपराधिक प्रदर्शन के बाद इस कृति को पढ़ने की फिर से जरूरत...
View Articleमेघ-दूत : लाटरी : शर्ली जैक्सन : अनुवाद : शिव किशोर तिवारी
अमरीकी कथा साहित्य में Shirley Jackson की कहानी ‘The Lottery’ कुछ सबसे विवादास्पद कहानियों में से एक मानी जाती है. इस कहानी के छपते ही शर्ली रातों–रात प्रसिद्ध हो गयीं. यह ३०० की आबादी वाले गाँव के एक...
View Articleतुम कहाँ गए थे लुकमान अली : (दो)
सौमित्र मोहन विष्णु खरे के शब्दों में ‘वह ऐसा देसी कवि है जो एलेन गिन्सबर्ग के पाए का है’ के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें पिछले कई दशकों से साहित्य के तलघर में दफ़्न कर दिया गया. एक ‘कल्ट’ कवि और ‘लुकमान...
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