परख : घिसी चप्पल की कील : ज्योतिष जोशी
भारतरत्न भार्गव का दूसरा कविता संग्रह ‘घिसी चप्पल की कील’ संभावना प्रकाशन से इसी वर्ष (२०१८) प्रकाशित हुआ है. उनका पहला संग्रह 'दृश्यों की धार'१९८६ में प्रकाशित हुआ था. नए संग्रह को परख रहे हैं आलोचक...
View Articleपरख : हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज (गौतम राजऋषि)
गौतम राजऋषि के कहानी संग्रह 'हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज'की समीक्षा मीना बुद्धिराजा द्वारा.सरहद पर शहीद ,शहादत और इश्क मीना बुद्धिराजाकहानी सच, संवेदना और यथार्थ का जीवंत दस्तावेज...
View Articleपरख : हमन हैं इश्क मस्ताना (विमलेश त्रिपाठी)
विमलेश त्रिपाठी के नये उपन्यास 'हमन हैं इश्क मस्ताना'की समीक्षा विनोद विश्वकर्मा की कलम से .हमन हैं इश्क़ मस्तानामोहब्बतों की चाहत की कथा विनोद विश्वकर्मा'हमन है इश्क़ मस्ताना'...
View Articleकथा- गाथा : नुरीन : प्रदीप श्रीवास्तव
साहित्य में शामिल होने का रास्ता यह है कि प्रसिद्ध पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ छपें, छपती रहें, महत्वपूर्ण किसी प्रकाशक से आपका संग्रह निकले. विमोचन आदि हो, समीक्षाएं छपें और फिर बड़े लेखक-आलोचक आपकी कहीं...
View Articleसबद भेद : मोहन दास : डर के रंग : शिप्रा किरण
हिंदी के महत्वपूर्ण कथाकार उदय प्रकाश की चर्चित कथा-कृति ‘मोहनदास’ में डर के इतने रंग शिप्रा ने खोज़ निकाले हैं कि इन्हें पढ़ते हुए भय लगता है. एक सीधे, सच्चे और स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए अब कोई जगह रह...
View Articleकथा- गाथा : मिथुन : प्रचण्ड प्रवीर
प्रचण्ड प्रवीर की कहानियों में अक्सर कथा के साथ कुछ ‘बुद्धि-विलास’ के सूत्र भी रहते हैं. वह अपनी कथा की जमीन को पुष्ट करने के लिए दर्शन या प्राचीन साहित्य से भी कुछ सामग्री लिए चलते हैं. यह उनके...
View Articleसबद भेद : अनुपस्थिति के साये (मुक्तिबोध ) : आशुतोष भारद्वाज
स्मरण गजानन माधव मुक्तिबोध (१३ नवम्बर १९१७ – ११ सितम्बर १९६४) मुक्तिबोध को दिवंगत हुए पांच दशक से अधिक हो गए हैं पर आज भी हिंदी कविता की चर्चा उनके ज़िक्र के बिना पूरी...
View Articleपरख : पदमावत (पुरुषोत्तम अग्रवाल) : अखिलेश
मलिक मुहम्मद जायसी (१३९८-१४९४ ई.) के महाकव्य 'पदमावत'पर कथित तौर पर आधारित भंसाली की फ़िल्म पदमावत के दयनीय और भूहड़ निर्माण और उस पर हुए हिंसक और आपराधिक प्रदर्शन के बाद इस कृति को पढ़ने की फिर से जरूरत...
View Articleसबद भेद : अनुपस्थिति के साये (मुक्तिबोध ) : आशुतोष भारद्वाज
स्मरण गजानन माधव मुक्तिबोध (१३ नवम्बर १९१७ – ११ सितम्बर १९६४) मुक्तिबोध को दिवंगत हुए पांच दशक से अधिक हो गए हैं पर आज भी हिंदी कविता की चर्चा उनके ज़िक्र के बिना पूरी...
View Articleसबद भेद : मुक्तिबोध - सत्य और सत्ता का संघर्ष : अमरेन्द्र कुमार शर्मा
मुक्तिबोध को स्मरण करते हुए आपने आशुतोष भारद्वाज का आलेख ‘अनुपस्थिति के साये’पढ़ा. इस क्रम में अध्येता अमरेन्द्र कुमार शर्मा का यह आलेख आपके सम्मुख प्रस्तुत है. मुक्तिबोध की कविताएँ प्रतिबद्ध...
View Articleहिंदी - दिवस : भाषा और राजभाषा अधिकारी : राहुल राजेश
हिंदी–दिवस की शुभकामनाएं. हिंदी को जन की आकांक्षाओं, उम्मीदों और अनुभवों की संवाहिका बनने के साथ ही, तकनीकी रूप सक्षम भी बनना है. इस अवसर समालोचन विगत वर्षों से हिंदी-भाषा की व्यावहारिक समस्याओं पर...
View Articleभारत भूषण सम्मान और अदनान कफ़ील दरवेश की कविता 'क़िबला'
हिंदी साहित्य के लिए पुरस्कार तो बहुत हैं पर भारत भूषण अग्रवाल सम्मान अपनी तरह से अकेला ही है. हर वर्ष किसी युवा कवि की एक कविता पर दिया जाने वाला यह सम्मान (राशि ५००० हजार रूपये.) अपनी स्थापना से ही...
View Articleमंगलाचार : सुदर्शन शर्मा
बोधि प्रकाशन की कवि ‘दीपक अरोड़ा स्मृति पांडुलिपि प्रकाशन योजना’ के अंतर्गत इस वर्ष के चयनित कवि हैं, अखिलेश श्रीवास्तव और सुदर्शन शर्मा. अखिलेश की कविताएँ आप समालोचन पर पढ़ चुके हैं. सुदर्शन शर्मा की...
View Articleकविता - रहस्य : कृष्ण कल्पित की आर्स पोएटिका : शिव किशोर तिवारी
कहते हैं वाल्टर वेन्यामिन सिर्फ उद्धरणों द्वारा ही एक किताब लिखना चाहते थे. कृष्ण कल्पित ‘विरचित’ कविता–रहस्य (New Criticism उर्फ़ नया काव्यशास्त्र) को आप शास्त्र और काव्य के सहमिलन से तैयार दिलचस्प...
View Articleमंगलाचार : अमृत रंजन
हिंदी कविता की दुनिया में बिलकुल नयी पीढ़ी दस्तक दे रही है. कुछ दिन पहले आपने समालोचन पर ही अस्मिता पाठक की कविताएँ उत्साह से पढ़ी थीं. आज १५ वर्षीय अमृत रंजन की कुछ कविताएँ आपके लिए. यह देखना कि इन...
View Articleविष्णु खरे : वह अंतिम आदमी
(सौजन्य से अनुराग वत्स)कवि, आलोचक, अनुवादक, पत्रकार, संपादक और फ़िल्म कला मर्मग्य विष्णु खरे एक महान पाठक भी थे. उन्हें किसी नवोदित की कोई कविता पढ़कर उससे बात करने में कोई संकोच कभी नहीं रहा. किसी बड़े...
View Articleमेघ- दूत : बाल्थाज़ार की आश्चर्यजनक दोपहर : गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज़
कला व्यक्ति को कैसे, किस तरह और कितना उदात्त बना सकती हैं इसे देखना हो तो यथार्थ से भी आगे के यथार्थ को अपनी जादुई शैली में व्यक्त करने वाले महान कथाकार गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज़ की यह कहानी पढ़नी...
View Articleकथा - गाथा : गलत पते की चिट्ठियाँ : योगिता यादव
(by kallchar)कहानी गलत पते की चिट्ठियाँ योगिता यादवएक थी सांदली रानी. खाती सुनार की थी, गाती कुम्हार की थी. सुनार दिन भर पसीना बहाता. उसके लिए सुंदर...
View Articleभूमंडलोत्तर कहानी – २१ (गलत पते की चिट्ठियाँ ) : राकेश बिहारी)
राकेश बिहारी ने समकालीन कथा-साहित्य पर अपने स्तंभ ‘भूमंडलोत्तर कहानी’की शुरुआत लगभग चार वर्ष पूर्व समालोचन पर की थी. आज इसकी २१ वीं कड़ी योगिता यादव की कहानी ‘गलते पते की चिट्ठियाँ’ पर आधारित है. यह...
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