संगीता गुप्ता : शब्द और चित्र
संगीता गुप्ता चित्रकार और कवयित्री हैं. उनके चित्रों की देश-विदेश में ३० एकल और २०० से अधिक सामूहिक प्रदर्शनियाँ आयोजित हुईं हैं. कई कविता संग्रह और हिंदी-अंग्रेजी में कुछ किताबें प्रकाशित हैं. संगीता...
View Articleहिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति (अभय कुमार दुबे) : नरेश गोस्वामी
विकासशील समाज अध्ययन पीठ (CSDS) के प्रोफ़ेसर, भारतीय भाषा कार्यक्रम के निदेशक और 'प्रतिमान'के प्रधान संपादक अभय कुमार दुबे को अक्सर टीवी चैनलों की बहसों में हम सुचिंतित हस्तक्षेप करते हुए देखते हैं....
View Articleखंजना सरमा की कविताएँ (असमिया) : अनुवाद रुस्तम सिंह
खंजना सरमा (जन्म 1978) असम के पाठसाला में रहती हैं. 2019 में उनकी कविताओं का पहला संग्रह प्रकाशित हुआ, जिसका शीर्षक है“पानीर दुआर” यानि“पानी द्वार”. इसके अलावा उनकी कविताएँ असम की कई महत्वपूर्ण...
View Articleसमकालीन हिंदी कहानी में मानवीय संसक्ति : रवि रंजन
(by Peju Alatise)समकालीन हिंदी कहानी में मानवीय संसक्ति रवि रंजन
View Articleनीलोत्पल : युद्ध और शांति (कविता)
युद्ध और शांति _________________________________________ नीलोत्पल1.युद्ध केवल युद्ध नहीं होताअंत मेंअधिक हिंस्रअधिक अमानवीय बन जाता हैवह बाज के पंजों में दबीनन्ही चिड़िया...
View Articleमो यान और चीन की एक बच्चा नीति : विजय शर्मा
मो यान और चीन की एक बच्चा नीतिविजय शर्माचीन की बढ़ती आबादी की समस्या से निपटने के लिए 1979 में एक बच्चा नीति की स्थापना हुई. हालाँकि इसे अस्थाई उपाय कहा गया लेकिन यह कई दशकों तक चलती रही. इसके पहले भी...
View Articleकुमार अम्बुज की कविताएँ
हिंदी के महत्वपूर्ण कवि कुमार अम्बुज की कुछ नयी कविताएँ प्रस्तुत हैं. ये कविताएँ हमारे समय को संबोधित हैं, ये हर उस काल से आखें मिलाती हैं जब कवियों से कहा जाता है कि कुछ तो है तुम्हारे साथ गड़बड़, तुम...
View Articleबाहर कुछ जल रहा है : लैस्ज़्लो क्रैस्ज़्नाहोरकाइ : अनुवाद : सुशांत सुप्रिय
हंगरी के लेखक लैस्ज़्लो क्रैस्ज़्नाहोरकाइ (Laszlo Krasznahorkai, जन्म : १९५४) के छह उपन्यास प्रकाशित हैं और उन्हें इनके लिए कई राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं जिसमें ‘ManInternational...
View Articleकहीं अधिक बड़े सच का लिबास है 'श्रीवन'का पागलपन : विनोद शाही
कहीं अधिक बड़े सच का लिबास है 'श्रीवन'का पागलपनविनोद शाही"अनुराधा ने मैत्रेय का नाम श्रीवन रख दिया था. उसे स्कूल में बच्चे मिस्टर फॉरेस्ट कहते थे. उसने सब पेड़ों के नाम लेखकों के नाम पर रख छोड़े थे....
View Articleकथा - गाथा : पहला ही आख़िरी है : आदित्य शुक्ल
पहला ही आख़िरी है आदित्य शुक्ल मैंजिस कहानी को महीनों से लिखने की कोशिश कर रहा था उसके सन्दर्भ में मेरे साथ आज एक अज़ीब घटना हुई. सुबह मैं जब सोकर उठा तो मैंने देखा वो...
View Articleआख्यान-प्रतिआख्यान (१):अग्निलीक(हृषीकेश सुलभ):राकेश बिहारी
यूरोप में राष्ट्र राज्य-और उपन्यासों का उदय साथ-साथ हुआ, लोकतंत्रात्मक समाज की ही तरह उपन्यासों में भी तरह-तरह के पात्र आपस में भिन्न विचारों के साथ संवादरत रहते हैं. भारत जैसे देशों में उपन्यास...
View Articleनन्दकिशोर आचार्य की कविता का आकाश : ओम निश्चल
‘न सही तुम्हारे दृश्य में मैं कहींअंधेरों में सही.’इस वर्ष के हिंदी के साहित्य अकादमी पुरस्कार से नन्दकिशोर आचार्य का कविता संग्रह ‘छीलते हुए अपने को’ सम्मानित हुआ है. चौथे सप्तक के कवि नन्दकिशोर...
View Articleआख्यान-प्रतिआख्यान (१):अग्निलीक(हृषीकेश सुलभ):राकेश बिहारी
यूरोप में राष्ट्र राज्य-और उपन्यासों का उदय साथ-साथ हुआ, लोकतंत्रात्मक समाज की ही तरह उपन्यासों में भी तरह-तरह के पात्र आपस में भिन्न विचारों के साथ संवादरत रहते हैं. भारत जैसे देशों में उपन्यास...
View Articleविजया सिंह की कविताएँ
विजया सिंह चंडीगढ़ में अंग्रेज़ी पढ़ाती हैं और फ़िल्मों में रुचि रखती हैं. उनकी किताब Level Crossing: Railway Journeys in Hindi Cinema, Orient Blackswan (2017) से प्रकाशित हुई है. उन्होंने दो लघु...
View Articleगणपत्या की गजब गोष्ठी : अम्बर पाण्डेय
उपन्यास-अंशगणपत्या की गजब गोष्ठी अम्बर पाण्डेय(दुनिया के सभी अनागरिकों के लिए) धुर्जटा गौडसारस्वत ब्राह्मणों के मठ केवलाद्वैत स्वामी अखण्डतीर्थ की एक शाखा गुड्डीपेठ,...
View Articleचन्द्रकान्ता (सन्तति) का तिलिस्म : अनुत्तरित प्रश्न : प्रचण्ड प्रवीर
देवकीनन्दन खत्री द्वारा रचित उपन्यास ‘चन्द्रकान्ता सन्तति’ हिंदी में अब एक क्लैसिक की हैसियत रखता है. आलोचना ने जिसे शुरू में तिलस्मी कहकर उपेक्षित किया उसी ने बाद में इसके साम्राज्यवाद विरोधी चरित्र...
View Articleपरख : आईनासाज़ (अनामिका) : अर्पण कुमार
वरिष्ठ लेखिका अनामिका का उपन्यास 'आईनासाज़' इस वर्ष राजकमल प्रकाशन से छप कर आया है. इसको देख-परख रहें हैं अर्पण कुमार.आईनासाज़ का आईना अर्पण कुमारकवयित्री और गद्यकार...
View Articleसंत रैदास के पद : सदानंद शाही
मध्यकाल के कवि केवल कवि नहीं थे, जैसे कबीर निरे कवि नहीं हैं, रैदास भी उसी तरह से भारतीय समाज की विसंगतियों के बीच पथ-प्रदर्शक, और नेतृत्वकर्ता की भूमिका का निर्वहन कर रहे थे. मध्यकाल के...
View Articleस्मरण में है आज जीवन : सूरज पालीवाल
स्मरण में है आज जीवन सूरज पालीवाल शैलेंद्र शैल हिंदी कविता में सुपरिचित नाम है. वे लगातार पत्र-पत्रिकाओं और साहित्यिक मित्रों के बीच अपनी उपस्थिति बनाये रखते हैं. कई बार नौकरियों के झमेले और...
View Articleजनवरी : संदीप नाईक की कविताएँ
जनवरी माँ की गोद है जनवरी - १इतनी मिली शुभेच्छाएँनये साल कीकुछ भी शुभ होने कीगुंजाईश नही बचीफूलों से लेकर पौधोंआसमान से ज़मीननदियों से समुंदर तकअटी पड़ी थी कामनाएंनये साल...
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