किसान आंदोलन और सांस्कृतिक क्रांति की संभावना: विनोद शाही
किसान आंदोलन और सांस्कृतिक क्रांति की संभावनाविनोद शाही किसान आंदोलन का जैसे-जैसे विस्तार हो रहा है, उसके सह समांतर एक नये समाज-सांस्कृतिक इन्कलाब की भूमिका भी बनने लगी है.इस तब्दीली की प्रक्रिया के...
View Articleसूरदास के भ्रमरगीत प्रसंग का पाठ–पुनर्पाठ: माधव हाड़ा
कवि सूरदास के साहित्य में वात्सल्य और श्रृंगार के साथ-साथ सगुण और निर्गुण के द्वंद्व का तीखा बोध है, इसके साथ ही उनके काव्य-संसार में उनका समय भी बोलता है. वे अपने समाज से निरपेक्ष कवि नहीं हैं....
View Articleमैं और मेरी कविताएँ (तेरह ): प्रभात
The poet is the priest of the invisible. : Wallace Stevens समकालीन कविता पर केंद्रित ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत आपने निम्न कवियों की कविताएं पढ़ीं और जाना कि वे कविताएं क्यों लिखते हैं.-आशुतोष...
View Articleपाकिस्तान-यात्रा: पंकज पराशर
लेखक-आलोचक पंकज पराशर द्वारा लिखे गये कला क्षेत्र की मकबूल शख्सियतों पर केंद्रित आलेख समालोचन पर आप पढ़ रहें हैं,इन्हें बहुत पसंद किया गया है. इस बीच वे अपनी यात्रा के अनुभवों को भी क़िताब की शक्ल दे...
View Articleजिल्द: अविनाश
कहानीजिल्दअविनाश 1.ऑफिस छूटे काफी वक़्त हो गया था. पहले तो वक़्त पानी की तरह बहा फिर धीरे धीरे जमने लगा. जब निठल्लापन पूरी तरह जम गया तब वक़्त पानी से भरा एक चट्टान बन गया. वक्त गतिमान है, जब वह रुकता...
View Articleसंदेश रासक: ज्ञान चंद बागड़ी
(Painting courtesy: Aritra Sen)प्रवासी प्रिय को संदेश भेजने की साहित्य-परंपरा प्राचीन है. पुरानी हिन्दी में रचित अब्दुर्रहमान की कृति संदेश-रासक एक ऐसा ही काव्य है, यही 'प्रवासी'भिखारी ठाकुर के नाटकों...
View Articleज़िंदगी लावारिस: सारंग उपाध्याय
समालोचन पर अविनाश की कहानी ‘जिल्द’, ज्ञानचंद बागड़ी की कहानी ‘संदेश रासक’ आपने पढ़ी,इसी क्रम में सारंग उपाध्याय की कहानी ‘ज़िंदगी लावारिस’ प्रस्तुत है.यह कहानी नशे के नर्क से आपका परिचय कराती है,बहुत...
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अजय गोयल पेशे से चिकित्सक हैं, ‘एक और मनोहर’ शीर्षक से उनका उपन्यास प्रकाशित हो चुका है. ‘गिनीपिग’ उनका तीसरा कहानी-संग्रह है जिसे हापुड़ से संभावना प्रकाशन ने छापा है, इसमें २१ कहानियां संकलित हैं....
View Articleअनामिका: कविता का मानवीय राग: रेखा सेठी
हिन्दी में साहित्य अकादमी पुरस्कार अनामिका को उनके कविता संग्रह ‘टोकरी में दिगंत- थेरी गाथा: 2014’ के लिए दिया गया है, निर्णायक समिति में थे- श्रीमती चित्रा मुद्गल, प्रो. के. एल. वर्मा और डॉ. राम वचन...
View Articleमीडिया का मानचित्र: अरविंद दास
पत्रकार अरविंद दास हिंदी में मीडिया के सरोकारों को समझने और उसपर लिखने वाले लेखक हैं. ‘अनुज्ञा बुक्स’ से उनकी इसी विषय पर नयी पुस्तक आ रही है- ‘मीडिया का मानचित्र’.पूंजी, मीडिया और सत्ता का गठजोड़...
View Articleपत्रों में केदारनाथ सिंह: हरिमोहन शर्मा
(केदार जी का चित्र कवि अनिल त्रिपाठी के फेसबुक दीवार से आभार सहित) आज कवि केदारनाथ सिंह (७ जुलाई १९३4 – १९ मार्च २०१८) के स्मरण का दिन है. उनकी पुण्यतिथि है. केदारजी भले ही दिल्ली में आ बसें हों,वह...
View Articleकौन हैं भारत माता ? (पुरुषोत्तम अग्रवाल) : आनंद पाण्डेय
‘‘हम हिन्दुस्तानियों को सुदूर और प्राचीन की तलाश में देश के बाहर नहीं जाना है, उसकी हमारे पास बहुतायत है. अगर हमें विदेशों में जाना है तो वह सिर्फ वर्तमान की तलाश में, यह तलाश जरूरी है, क्योंकि उससे...
View Articleफ़र्नांडो सोर्रेंटीनो : वापसी : अनुवाद- सुशांत सुप्रिय
स्पेनिश भाषा में लिखने वाले फ़र्नांडो सोर्रेंटीनो की कैफ़ी हाशमी द्वारा हिंदी में अनूदित कहानी ‘जीवनशैली’ समालोचन पर आप पढ़ चुके हैं. प्रस्तुत कहानी ‘वापसी’ का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद सुशांत सुप्रिय ने...
View Articleभीतर और बाहर का शहर: नरेश गोस्वामी
साहित्य के सामाजिक,आर्थिक अभिप्रायों की विवेचना की सुदृढ़ आलोचनात्मक प्रविधि है. हिंदी में भी रचनात्मक कृतियों में समय और समाज को देखने-परखने की कोशिशें हुईं हैं,इस लिहाज़ से ख़ासकर कहानियां और उपन्यास...
View Articleसमय और साहित्य (विजयमोहन सिंह ): शीतांशु
समय, साहित्यऔरविजयमोहनसिंहशीतांशु विजयमोहनसिंहकीआलोचना-पुस्तकसमय और साहित्य (2012) पर ज्यादा बातें नहीं हुई हैं. इसका एक कारण शायद यह है कि इसमें संकलित निबन्ध, समीक्षाएँ, टिप्पणियाँ, संस्मरण अलग-अलग...
View Articleपंकज सिंह की कविता: राजाराम भादू
कवि पंकज सिंह की कविताओं पर लिखते हुए आलोचक राजाराम भादू उन प्रसंगों को भी याद करते हैं जिनमें ये कविताएँ आकार ले रहीं थीं,आठवें दशक की जयपुर की सामाजिक-राजनीतिक सक्रियताओं में पंकज सिंह की भूमिका भी...
View Articleसमय और साहित्य (विजयमोहन सिंह ): शीतांशु
विजयमोहन सिंह (1 जनवरी, 1936-25 मार्च, 2015)ने कहानियां लिखीं,उपन्यास लिखे, पत्रिकाओं का संपादन किया, उनका आलोचनात्मक लेखन भी विस्तृत है. उनकी पुस्तक ‘समय और साहित्य’ (२०१२) के माध्यम से शीतांशु ने...
View Articleनिराला: चेतना का स्त्री-पक्ष: रजनी दिसोदिया
महाकवि निराला ने कविताओं के साथ-साथ कहानियाँ और उपन्यास भी लिखे हैं, उनके साहित्य को समग्रता में देखते हुए रजनी दिसोदिया ने निराला की स्त्री-चेतना की पड़ताल की हैदेखें आप. निरालाचेतना का स्त्री-पक्ष...
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