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Channel: समालोचन
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सिद्धेश्वर सिंह की कविताएँ

मनुष्य जब मनुष्यता से गिर जाता है, उसकी तुलना पशुओं से हम करते हैं. पर क्या पशु कभी अपनी ‘पशुता’ से गिरा है ? आख़िर मनुष्य ने सभ्यता की इस दौड़ में क्या हासिल किया है? कठुआ और उन्नाव में जो कुछ हुआ है...

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भाष्य : मुक्तिबोध : अन्तः करण का आयतन : शिव किशोर तिवारी

शिव किशोर तिवारी (१६ अप्रैल १९४७) का कविता की दुनिया में आगमन किसी घटना की तरह अचानक से हुआ है.इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी में एम. ए. करने के बाद साहित्य से उनका लगाव  सामने नहीं आया था.  अब जब वह...

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मोनिका कुमार की कविताएँ (पंजाबी)

कवि दो अलग भाषाओँ में कविताएँ लिख रहा हो तो दोनों तरह की कविताओं में संवेदनात्मक, वैचारिक और शिल्पगत अंतर होंगे. क्या ये अंतर भाषा के हैं, भाषा के पाठकों को ध्यान में रखने से क्या कविता का चेहरा बदल...

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गुरप्रीत की कविताएँ (पंजाबी)

पंजाबी भाषा के चर्चित कवि गुरप्रीत की चौदह कविताओं का हिंदी अनुवाद रुस्तम सिंह ने कवि की मदद से किया है. हिंदी के पाठकों के लिए इतर भाषाओँ के साहित्य का प्रमाणिक अनुवाद समालोचन प्रस्तुत करता रहा है,...

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फ़कत तुम्हारा हरजीत

हरजीत सिंह (1959-22अप्रैल, 1999) की शख़्सियत और शायरी के सम्बन्ध में तेजी ग्रोवर की मदद से समालोचन की प्रस्तुति (4 मार्च 2018) से हुआ यह कि उनके चाहने और उनके लिखे को सहेजकर रखने वाले सामने आ गए. योजना...

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कथा - गाथा : राजजात यात्रा की भेड़ें : किरण सिंह

"किरण के पास कथा कहने की समर्थ शैली है और कथा के चरित्रों की मन:स्थितियों की गहरी समझ है." २०११ में नामवर सिंह के दिए इस कथन के साथ 'पहल'के नए अंक में किरण सिंहकी लंबी कहानी ‘राजजात यात्रा की...

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परख : अज्ञातवास की कविताएँ (अविनाश मिश्र)

युवा कवि अविनाश मिश्र की कविताएँ ज़िद और जिरह की कविताएँ हैं, अपनी शर्तों पर जीने की ज़िद और तमाम शातिर, हिंसक, गुप्त दुरभिसंधियों से जिरह.  उनका पहला कविता संग्रह ‘अज्ञातवास की कविताएँ’ साहित्य अकादेमी...

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प्रमोद पाठक की कविताएँ

ये कविताएँ बच्चों के लिए लिखी गयी हैं पर बचकानी नहीं हैं, बच्चों के लिए लिखना चुनौतीपूर्ण तो है पर इनका लिखा जाना बहुत जरूरी है ? प्रमोद पाठक को आप समालोचन पर पिछले कई वर्षों से पढ़ते आ रहे हैं,  उनकी...

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बिपनप्रीत की कविताएँ (पंजाबी)

पंजाबी भाषा के कवि गुरप्रीत की कविताएँ आपने समालोचन पर पढ़ीं हैं. इस कड़ी में आज पंजाबी कवयित्री बिपनप्रीत की  बीस कविताओं का हिंदी अनुवाद आपके लिएप्रस्तुत है. बिपनप्रीत के दो कविता संग्रह प्रकाशित हैं...

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भाष्य : सेवादार (देवीप्रसाद मिश्र) : सदाशिव श्रोत्रिय

(गूगल से साभार)समालोचन के स्तम्भ ‘भाष्य’ के अंतर्गत किसी एक कविता पर व्याख्याता अपने आप को केन्द्रित रखता है और तरह-तरह से उसके मन्तव्य और काव्य-सौन्दर्य को उद्घाटित करता है. सदाशिव श्रोत्रिय को आपने...

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ख़ा मो श रामकुमार : अखिलेश

“मेरे अन्दर एक तरह का नैरन्तर्य (रहता) है”(मरहूम चित्रकार ‘रामकुमार के साथ पीयूष दईया का संवाद’ से)    भारत के श्रेष्ठम अमूर्त चित्रकार (23 सितम्बर, 1924 – 14 अप्रैल,2018) रामकुमार हिंदी के लेखक भी...

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ख़ राब कविता का अंत:करण : देवी प्रसाद मिश्र

(कृति - Saks Afridi)समकालीन महत्वपूर्ण हिंदी कवि देवी प्रसाद मिश्र की कविता ‘सेवादार’ की सदाशिव श्रोत्रिय द्वारा की गयी व्याख्या पिछले दिनों से बहस मे है. विष्णु खरे का मानना था “जब आप एक उम्दा कवि के...

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मीमांसा : मार्क्स की प्रासंगिकता और हमारा वर्तमान : अच्युतानंद मिश्र

कार्ल मार्क्स (5 May 1818-14 March 1883):  कार्ल मार्क्स मूलतः दार्शनिक थे, जिनकी चिंता समाज को समझने के साथ उसे बदलने की थी. धर्मों के उदय, प्रभाव और प्रभुत्व के बाद  मार्क्स की सोच ही वह संगठित...

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मंगलाचार : सुमीता ओझा

समालोचन पर सुमीता पहली बार छप रही हैं. कविताएँ ध्यान खींचती हैं, रोकती टोकती हैं, सोचने पर विवश करती हैं. जो दुनिया हमने अपने लिए बनाई है वह अब जगह-जगह से चुभती है, बदकिस्मती से जिनका इसमें कोई हाथ...

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सबद भेद : रामविलास शर्मा का कवि-कर्म : रवि रंजन

रामविलास शर्मा बड़े आलोचक हैं, १९४३ तक वह एक उदीयमान कवि भी थे. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने ‘तार सप्तक’ में उन्हें इसीलिए शामिल भी किया था. हालाँकि रामविलास शर्मा ने तब तक अपना रास्ता...

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भूपिंदरप्रीत की कविताएँ (पंजाबी)

कविताओं का अनुवाद ज़ोखिम से भरा मुश्किल काम है, एक ही कवि की एक ही कविता के दो अनुवादों में बड़ा अंतर भी कई बार दिख जाता है. अनुवाद एक तरह से अपनी भाषा में कवि को फिर से निर्मित करते हैं.   हिंदी में...

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स्त्री -चेतना : (२) : शिवरानी देवी : प्रेमचंद का विलोम : रोहिणी अग्रवाल

लेखिका शिवरानी देवी ‘प्रेमचंद अपने घर में’के लिए जानी जाती हैं, वह एक समर्थ कथाकार भी थीं. 'नारी हृदय'उनका कहानी संग्रह है. बाल विधवा शिवरानी देवी का विवाह 1905में प्रेमचंद से हुआ था, वह स्वाधीनता...

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रंग-राग : राज़ी के अंतर्द्वंद्व : रवीन्द्र त्रिपाठी

बहुत दिनों बाद ऐसी फ़िल्म प्रदर्शित हुई है जिसके प्रशंसकों में बुद्धिजीवी भी शामिल हैं. युद्ध, और त्याग-बलिदान पर आधारित फिल्मे ख़ासकर हिंदी फिल्में अपने इकहरे नरैटिव के कारण कभी भी गम्भीर बहस के केंद्र...

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सेवादार : पॉवर प्ले की कविता : आशुतोष कुमार

समालोचन पर सदाशिव श्रोत्रियकी सेवादार (देवी प्रसाद मिश्र) की प्रकाशित व्याख्या ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा है. हिंदी के अलावा दूसरी भाषाओँ में भी इस पर बहस ज़ारी है. आलोचक आशुतोष कुमार ने इस कविता और...

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ज्येष्ठ में तपे प्रेम के तीन रंग : मनीषा कुलश्रेष्ठ

कथाकार मनीषा कविताएँ भी लिखती हैं. अक्सर कहानियाँ लिखने वाले कवियों से पता नहीं क्यों हम कविताओं की उम्मीद छोड़ बैठते हैं, जबकि उनकी स्वाभाविक इच्छा यह रहती है कि उनकी कविताओं को भी तवज्जो मिले. मनीषा...

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